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Bageshwar News: सतनिया में बाघ की दस्तक से दहशत,वन विभाग ने बिछाया जाल फिर भी हाथ खाली
Sat, 29 Aug 2026 12:38 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
Updated Sat, 29 Aug 2026 12:38 AM IST
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मौलेखाल(अल्मोड़ा)। सल्ट विकासखंड के मोहान वन क्षेत्र के डभरा-सौराल, तड़म और काठ की नाव क्षेत्र में बाघ की मौजूदगी ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। बृहस्पतिवार को सतनिया गांव की सीता देवी का बाघ से आमना-सामना होने के बाद ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। शुक्रवार को रक्षा बंधन का त्योहार मनाने के लिए सीता देवी काशीपुर चली गई हैं, लेकिन आने वाले दिनों में उन्हें रोजाना विद्यालय जाना है। ऐसे में जंगल और बाघ की सक्रियता के बीच अकेले विद्यालय जाने को लेकर वह चिंतित हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि बाघ की लगातार मौजूदगी के बावजूद उसे पकड़ने में वन विभाग अब तक सफल नहीं हो पाया है। विभाग की ओर से क्षेत्र में व्यापक स्तर पर निगरानी और रेस्क्यू अभियान चलाया जा रहा है, लेकिन बाघ वन विभाग की तमाम तैयारियों को चकमा दे रहा है। वन विभाग ने ग्राम सभा तड़म में रेस्क्यू पिंजरा लगाया गया है। वन विभाग की टीमों ने क्षेत्र में 10 पिंजरे, दो ड्रोन, दो लाइव कैमरे और 45 कैमरा ट्रैप लगाए हैं। गश्ती दल लगातार क्षेत्र में निगरानी कर रहे हैं और पिंजरों, कैमरा ट्रैप समेत अन्य उपकरणों की जांच की जा रही है। बाघ की गतिविधियों को ट्रैक करने के साथ ही डॉक्टर टीम भी रेस्क्यू टीम के साथ जुटी है। कॉर्बेट की विशेषज्ञ टीम का सहयोग भी लिया जा रहा है।
पैदल मार्गों के आसपास की जा रही झाड़ियों की कटाई
इधर डभरा-सौराल और तड़म गांवों के ग्रामीणों द्वारा रास्तों व पैदल मार्गों के आसपास झाड़ियों की कटाई भी की जा रही है, वन विभाग की ओर से ग्रामीणों को जागरूक करने के लिए पोस्टर, लाउडस्पीकर और जन-जागरूकता गोष्ठियों का भी सहारा लिया जा रहा है।बृहस्पतिवार की घटना के बाद ग्रामीणों में सुरक्षा को लेकर चिंता और बढ़ गई है। खासकर सीता देवी के विद्यालय जाने की चिंता इस बात को उजागर करती है कि जब तक बाघ पकड़ा नहीं जाता, ग्रामीणों के लिए सामान्य दिनचर्या में लौटना आसान नहीं होगा। इधर मोहान रेंज की रेंजर हेमा कर्नाटक ने बताया कि बाघ के रेस्क्यू के लिए वन विभाग की टीम क्षेत्र में लगातार गश्त कर रही है। ट्रैप कैमरों से निगरानी रखी जा रही है।
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ग्रामीणों का कहना है कि बाघ की लगातार मौजूदगी के बावजूद उसे पकड़ने में वन विभाग अब तक सफल नहीं हो पाया है। विभाग की ओर से क्षेत्र में व्यापक स्तर पर निगरानी और रेस्क्यू अभियान चलाया जा रहा है, लेकिन बाघ वन विभाग की तमाम तैयारियों को चकमा दे रहा है। वन विभाग ने ग्राम सभा तड़म में रेस्क्यू पिंजरा लगाया गया है। वन विभाग की टीमों ने क्षेत्र में 10 पिंजरे, दो ड्रोन, दो लाइव कैमरे और 45 कैमरा ट्रैप लगाए हैं। गश्ती दल लगातार क्षेत्र में निगरानी कर रहे हैं और पिंजरों, कैमरा ट्रैप समेत अन्य उपकरणों की जांच की जा रही है। बाघ की गतिविधियों को ट्रैक करने के साथ ही डॉक्टर टीम भी रेस्क्यू टीम के साथ जुटी है। कॉर्बेट की विशेषज्ञ टीम का सहयोग भी लिया जा रहा है।
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पैदल मार्गों के आसपास की जा रही झाड़ियों की कटाई
इधर डभरा-सौराल और तड़म गांवों के ग्रामीणों द्वारा रास्तों व पैदल मार्गों के आसपास झाड़ियों की कटाई भी की जा रही है, वन विभाग की ओर से ग्रामीणों को जागरूक करने के लिए पोस्टर, लाउडस्पीकर और जन-जागरूकता गोष्ठियों का भी सहारा लिया जा रहा है।बृहस्पतिवार की घटना के बाद ग्रामीणों में सुरक्षा को लेकर चिंता और बढ़ गई है। खासकर सीता देवी के विद्यालय जाने की चिंता इस बात को उजागर करती है कि जब तक बाघ पकड़ा नहीं जाता, ग्रामीणों के लिए सामान्य दिनचर्या में लौटना आसान नहीं होगा। इधर मोहान रेंज की रेंजर हेमा कर्नाटक ने बताया कि बाघ के रेस्क्यू के लिए वन विभाग की टीम क्षेत्र में लगातार गश्त कर रही है। ट्रैप कैमरों से निगरानी रखी जा रही है।
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