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एक फूल हुआ कम तो, विष्णु ने शिव को अर्पित कर दी आंख
अमर उजाला, प्रमोद सेमवाल, गोपेश्वर
Updated Fri, 06 Sep 2013 10:25 PM IST
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इन दिनों हिमालय क्षेत्र ब्रह्म कमल के फूलों से महका है। माणा और बामणी गांव के लोग प्रतिदिन सुबह बदरीनाथ धाम में ब्रह्मकमल चढ़ाने के लिए ला रहे हैं। रावल द्वारा बदरीविशाल का श्रृंगार भी ब्रह्मकमल के फूलों से ही किया जा रहा है।
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राज्य पुष्प ब्रह्म कमल बदरीनाथ, रुद्रनाथ, केदारनाथ, कल्पेश्वर आदि ऊच्च हिमालयी क्षेत्रों में पाया जाता है। किवदंति है कि जब भगवान विष्णु हिमालय क्षेत्र में आए तो उन्होंने भोलेनाथ को 1000 ब्रह्म कमल चढ़ाए, जिनमें से एक पुष्प कम हो गया था।
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एक आंख भोलेनाथ को की समर्पित
तब विष्णु भगवान ने पुष्प के रुप में अपनी एक आंख भोलेनाथ को समर्पित कर दी थी। तभी से भोलेनाथ का एक नाम कमलेश्वर और विष्णु भगवान का नाम कमल नयन पड़ा। हिमालय क्षेत्र में इन दिनों जगह-जगह ब्रह्म कमल खिलने शुरु हो गए हैं।
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पुष्प के पीछे हुआ था भीम का गर्व चूर
जब द्रोपदी ने भीम से हिमालय क्षेत्र से ब्रह्म कमल लाने की जिद्द की तो भीम बदरीकाश्रम पहुंचे। लेकिन बदरीनाथ से तीन किमी पीछे हनुमान चट्टी में हनुमान जी ने भीम को आगे जाने से रोक दिया।
हनुमान ने अपनी पूंछ को रास्ते में फैला दिया था। जिसे उठाने में भीम असमर्थ रहा। यहीं पर हनुमान ने भीम का गर्व चूर किया था। बाद में भीम हनुमान जी से आज्ञा लेकर ही बदरीकाश्रम से ब्रह्म कमल लेकर गए।
औषधीय गुण भी हैं भरपूर
ससोरिया ओबिलाटा वानस्पतिक नाम वाला ब्रह्म कमल औषधीय गुणों से भी परिपूर्ण है। इसे सुखाकर कैंसर रोग की दवा के रुप में इस्तेमाल किया जाता है। इससे निकलने वाले पानी को पीने से थकान मिट जाती है।
साथ ही पुरानी खांसी भी काबू हो जाती है। भोटिया जनजाति के लोग गांव में रोग-व्याधि न हो, इसके लिए इस पुष्प को घर के दरवाजों पर लटका देते हैं।
बोले धर्माधिकारी
भगवान बदरीनाथ का इन दिनों प्रतिदिन ब्रह्मकमल से श्रृंगार किया जा रहा है। बदरीनाथ धाम के आचार्य ब्राह्मण नंगे पांव ब्रह्म कमल लाकर बदरीनाथ को अर्पित कर रहे हैं। ब्रह्म कमल की महक से बदरीनाथ पुरी महक रही है।
- भुवन चंद्र उनियाल, धर्माधिकारी, बदरीनाथ धाम।