केदार घाटी में फैली महामारी से लड़ने पहुंची सेना
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केदारघाटी में लाशें सड़ने से फैल रही महामारी को रोकने का जिम्मा भी अब सेना के जवानों ने संभाल लिया है। बृहस्पतिवार को आर्मी के विशेष कमांडो घाटी में उतरे और वहां फैल रहे संक्रमण को रोकने के लिए अभियान छेड़ दिया।
उनके साथ विशेष रूप से प्रशिक्षित सफाईकर्मी भी गए हैं जो लाशों को ठिकाने लगाने में उनकी मदद करेंगे। इस कार्य में इन कमांडो की मदद के लिए नेवी के 14 विशेष कमांडो को भी बुलाया गया है। ये कमांडो भी गुप्तकाशी पहुंच गए हैं।
संभावना है कि इन्हें शुक्रवार को घाटी में उतारा जाएगा। गुप्तकाशी (देवशाल) हेलीपैड पर बृहस्पतिवार को हेलीकाप्टर से आर्मी के विशेष कमांडो और सफाईकर्मी पहुंचे। यहां से इनको आर्मी के तीन हेलीकाप्टर से केदार घाटी में उतारा गया।
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ये कमांडो अपने साथ दवाइयां, ब्लीचिंग पाउडर, रासायनिक घोल के अलावा अन्य जरूरी चीजें अपने साथ ले गए हैं। 12 दिनों से घाटी में पड़ी लाशें न सिर्फ सड़ चुकी हैं बल्कि इनकी बदबू से पूरे क्षेत्र में संक्रमण भी फैल गया है।
यही नहीं बारिश से इन लाशें के टुकड़े भी जलस्रोतों में जाने लगे हैं जिससे न सिर्फ पेयजल संक्रमित होने लगा है बल्कि दूसरे क्षेत्रों में भी महामारी फैलने की आशंका बढ़ गई है।
ये कमांडो गौरीकुंड से जंगलचट्टी तक फैले जंगलों में सर्च अभियान चलाएंगे तथा रासायनिक घोल और ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव करेंगे। जिससे लाशों पर भनभना रही मक्खियां और कीड़े मकोड़े मर जाएं।
राहत पर हो रही सियासत की तस्वीरें
कमांडो गौरीकुंड से जंगलचट्टी के बीच के जंगलों में सर्च अभियान चलाकर भूले भटके लोगों को भी निकालने का कार्य करेंगे। उधर, स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक संक्रामक रोग तथा डायरिया का कोई ताजा मामला रिपोर्ट नहीं हुआ है।
निमोनिया के कुछ मामले सामने आए हैं। आपदा प्रभावित रुद्रप्रयाग, चमोली, उत्तरकाशी और पिथौरागढ़ जिलों में अब तक डायरिया के मामले तीन जगहों पर मिले। किसी अन्य संक्रामक रोग की सूचना नहीं आई है।