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संविधान की देन है भारत का सफल लोकतंत्र
ब्यूरो/अमर उजाला अमरोहा
Updated Mon, 21 Dec 2015 12:07 AM IST
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जेएस हिंदू पीजी कालेज में यूजीसी नई दिल्ली द्वारा संपोषित डॉ. भीमराव अंबडेकर अध्ययन केंद्र की ओर से डॉ. अंबेडकर के सपनों का लोकतांत्रिक भारत विषय पर अखिल भारतीय सेमिनार का आयोजन हुआ। इमसें वक्ताओं ने भारत के लोकतंत्र को संविधान की देेन बताया।
कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे एमएलसी जयपाल सिंह व्यस्त ने कहा कि भारत में लोकतांत्रिक व्यवस्था मजबूती के साथ जड़े जमाए हुए है।
सफल लोकतंत्र भारत की पहचान है संविधान के मुताबिक देश में लोकतंत्र मजबूती से काम कर रहा है। कहा, अंबेडकर के नेतृत्व में बना संविधान विश्व का एक अनोखा संविधान है।
मुख्य वक्ता पाञ्चजन्य के संपादकीय सलाहकार व इंडिया टुडे के पूर्व संपादक जगदीश उपासने ने कहा कि भारतीय संविधान के निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर एक महान मानव थे।
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उन्होंने महात्मा बुद्घ के समता, स्वतंत्रता और बंधुत्व की भावना से प्रभावित होकर बौद्ध धर्म स्वीकार कर लिया था। प्रबंध समिति के मंत्री सुमत कुमार जैन ने कहा कि डॉ. भीमराव अंबेडकर ने शोषित तथा पीड़ित लोगों के उद्घार एवं उनके सम्मान का मार्ग प्रशस्त किया।
योगदान के सापेक्ष नहीं मिला सम्मान
प्राचार्या डा. वंदना रानी गुप्ता ने कहा कि डा. भीमराव अंबेडकर को देश के लिए उनके द्वारा किए गए योगदान के सापेक्ष सम्मान नहीं मिला। इसके बावजूद भी उन्होंने मानवीय मूल्यों के संरक्षण का काम किया।
इससे पहले डा. बीना रुस्तगी ने सेमिनार की स्मारिका और समाज विज्ञान शोध पत्रिका का विमोचन किया। सेमिनार के संयोजक राजनीति विज्ञान विभाग के अध्यक्ष डा. अशोक कुमार रुस्तगी ने कहा कि डॉ. अंबेडकर के जीवन की कहानी मानवीय अधिकारों के विजेता के संघर्ष की कहानी है।
सेमिनार के समन्वयक डॉ. बबलू सिंह ने कहा कि अंबेडकर ने स्वाभिमान की सुरक्षा एवं नागरिकों के अपने अधिकार पाने का ठोस अधिकार दिया।
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कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे एमएलसी जयपाल सिंह व्यस्त ने कहा कि भारत में लोकतांत्रिक व्यवस्था मजबूती के साथ जड़े जमाए हुए है।
सफल लोकतंत्र भारत की पहचान है संविधान के मुताबिक देश में लोकतंत्र मजबूती से काम कर रहा है। कहा, अंबेडकर के नेतृत्व में बना संविधान विश्व का एक अनोखा संविधान है।
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मुख्य वक्ता पाञ्चजन्य के संपादकीय सलाहकार व इंडिया टुडे के पूर्व संपादक जगदीश उपासने ने कहा कि भारतीय संविधान के निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर एक महान मानव थे।
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उन्होंने महात्मा बुद्घ के समता, स्वतंत्रता और बंधुत्व की भावना से प्रभावित होकर बौद्ध धर्म स्वीकार कर लिया था। प्रबंध समिति के मंत्री सुमत कुमार जैन ने कहा कि डॉ. भीमराव अंबेडकर ने शोषित तथा पीड़ित लोगों के उद्घार एवं उनके सम्मान का मार्ग प्रशस्त किया।
योगदान के सापेक्ष नहीं मिला सम्मान
प्राचार्या डा. वंदना रानी गुप्ता ने कहा कि डा. भीमराव अंबेडकर को देश के लिए उनके द्वारा किए गए योगदान के सापेक्ष सम्मान नहीं मिला। इसके बावजूद भी उन्होंने मानवीय मूल्यों के संरक्षण का काम किया।
इससे पहले डा. बीना रुस्तगी ने सेमिनार की स्मारिका और समाज विज्ञान शोध पत्रिका का विमोचन किया। सेमिनार के संयोजक राजनीति विज्ञान विभाग के अध्यक्ष डा. अशोक कुमार रुस्तगी ने कहा कि डॉ. अंबेडकर के जीवन की कहानी मानवीय अधिकारों के विजेता के संघर्ष की कहानी है।
सेमिनार के समन्वयक डॉ. बबलू सिंह ने कहा कि अंबेडकर ने स्वाभिमान की सुरक्षा एवं नागरिकों के अपने अधिकार पाने का ठोस अधिकार दिया।