{"_id":"06a07052278e1fe53013e6df4acd5b5e","slug":"chhath-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"हे छठ मैया, हमहूं अरघिया देबै.. ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हे छठ मैया, हमहूं अरघिया देबै..
ब्यूरो/अमर उजाला अमरोहा
Updated Wed, 18 Nov 2015 12:41 AM IST
विज्ञापन
शहर में मंगलवार को बिहार और पूर्वांचल से जुड़ी महिलाओं ने छठ मैया का व्रत रखा। इसके लिए बांस की टोकरी में जलता हुआ दीपक, नारियल, पचौकरा, कच्ची अदरक, कच्ची हल्दी रखकर वासुदेव तीर्थ स्थल के सरोवर में खड़े होकर अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य दिया।
इस दौरान महिलाओं ने छठ मैया हमहूं अरघिया देबै समेत तमाम लोकगीत गाकर पूजा-अर्चना की। बुधवार को सप्तमी तिथि के दिन उगते सूर्य को अर्घ्य देकर छठ पूजा पर्व का पारायण किया जाएगा।
अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देने के लिए मंगलवार को शहर के वासुदेव तीर्थ स्थल स्थित सरोवर पर श्रद्धालुओं की भीड़ थी। सूर्य को अर्घ्य देने के लिए बांस से बने सूप और टोकरी में शरद ऋतुओं के फलों को सजाया गया था।
विज्ञापन
महिलाओं ने पूजा की टोकरी में नारियल, पचौकरा, कच्ची हल्दी, कच्ची अदरक और जलता हुआ दीपक रखकर सरोवर में खड़े होकर डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया और प्रार्थना की। व्रत रखने वाली महिलाएं अभी 36 घंटे के उपवास पर हैं।
विज्ञापन
इस दौरान महिलाओं ने छठ मैया हमहूं अरघिया देबै समेत तमाम लोकगीत गाकर पूजा-अर्चना की। बुधवार को सप्तमी तिथि के दिन उगते सूर्य को अर्घ्य देकर छठ पूजा पर्व का पारायण किया जाएगा।
विज्ञापन
अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देने के लिए मंगलवार को शहर के वासुदेव तीर्थ स्थल स्थित सरोवर पर श्रद्धालुओं की भीड़ थी। सूर्य को अर्घ्य देने के लिए बांस से बने सूप और टोकरी में शरद ऋतुओं के फलों को सजाया गया था।
विज्ञापन
महिलाओं ने पूजा की टोकरी में नारियल, पचौकरा, कच्ची हल्दी, कच्ची अदरक और जलता हुआ दीपक रखकर सरोवर में खड़े होकर डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया और प्रार्थना की। व्रत रखने वाली महिलाएं अभी 36 घंटे के उपवास पर हैं।