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राजकीय संग्रहालय का सुंदरीकरण नहीं हो सका
अमर उजाला ब्यूरो, अल्मोड़ा
Updated Fri, 29 Sep 2017 11:23 PM IST
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राजकीय संग्रहालय परिसर के बाहर पड़ी नानकमत्ता के खमरिया गांव से लाई गई लोहे की नाव
- फोटो : अमर उजाला
सातवीं से बारहवीं सदी की पुरानी विशाल प्रस्तर प्रतिमाओं को राजकीय संग्रहालय के बाहर लगाने का कार्य सितंबर के शुरुआत में ही पूरा किया जाना था। पिछले दो माह से संग्रहालय के अधिकारी प्रस्तर प्रतिमाएं लगाने की बात कर रहे हैं, लेकिन प्रतिमाएं आज तक नहीं लग पाईं। वहीं, अपना उदासीन रवैया छुपाने के लिए अधिकारी स्तंभ न पहुंचने की बात कहकर पल्ला झाड़ रहे हैं।
मालरोड बस स्टेशन के पास स्थित राजकीय संग्रहालय में सदियों पुरानी प्रतिमाएं, बहुमूल्य सिक्के समेत कई ऐतिहासिक धरोहर हैं। स्थानीय लोग समेत बाहर से आने वाले लोग भी अक्सर संग्रहालय में यहां की ऐतिहासिक धरोहरों को देखने पहुंचते हैं। संग्रहालय को खूबसूरत बनाने और पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बनाने के लिए संस्कृति विभाग ने संग्रहालय के बाहर प्राचीन प्रस्तर प्रतिमाएं लगाने की अनुमति दी थी।
प्रस्तर प्रतिमाओं में सूर्य, रावणानुगृह समेत करीब सात से नौ मूर्तियां शामिल हैं, जो सातवीं से बारहवीं सदी की हैं। इनके अलावा जिले के विभिन्न स्थानों से स्तंभ, वीरखंभ आदि लाकर संग्रहालय परिसर में लगाए जाने थे। संस्कृति विभाग ने प्रस्तर प्रतिमा और स्टैंड लगाने के लिए 1.23 लाख रुपये निर्माण एजेंसी ग्रामीण निर्माण विभाग को पहले ही दे दिए थे। निर्माण एजेंसी ने सर्वे काम भी पूरा कर लिया था, लेकिन संग्रहालय अधिकारियों के ढीले रवैये के कारण कार्य अभी तक पूरा नहीं हो सका है।
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यही नहीं 2015 में नानकमत्ता के खमरिया गांव से लाई गई करीब 125 साल पुरानी लोहे की नाव भी बगैर स्टैंड के संग्रहालय के बाहर पड़ी हुई है। इधर, संग्रहालय प्रभारी डॉ. ज्ञान प्रकाश तिवारी ने देघाट और कुछ अन्य क्षेत्रों से स्तंभ नहीं आने के कारण कार्य में विलंब होने की बात कहकर अपना पल्ला झाड़ लिया, जबकि कार्य सितंबर पहले सप्ताह तक पूरा होना था।
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मालरोड बस स्टेशन के पास स्थित राजकीय संग्रहालय में सदियों पुरानी प्रतिमाएं, बहुमूल्य सिक्के समेत कई ऐतिहासिक धरोहर हैं। स्थानीय लोग समेत बाहर से आने वाले लोग भी अक्सर संग्रहालय में यहां की ऐतिहासिक धरोहरों को देखने पहुंचते हैं। संग्रहालय को खूबसूरत बनाने और पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बनाने के लिए संस्कृति विभाग ने संग्रहालय के बाहर प्राचीन प्रस्तर प्रतिमाएं लगाने की अनुमति दी थी।
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प्रस्तर प्रतिमाओं में सूर्य, रावणानुगृह समेत करीब सात से नौ मूर्तियां शामिल हैं, जो सातवीं से बारहवीं सदी की हैं। इनके अलावा जिले के विभिन्न स्थानों से स्तंभ, वीरखंभ आदि लाकर संग्रहालय परिसर में लगाए जाने थे। संस्कृति विभाग ने प्रस्तर प्रतिमा और स्टैंड लगाने के लिए 1.23 लाख रुपये निर्माण एजेंसी ग्रामीण निर्माण विभाग को पहले ही दे दिए थे। निर्माण एजेंसी ने सर्वे काम भी पूरा कर लिया था, लेकिन संग्रहालय अधिकारियों के ढीले रवैये के कारण कार्य अभी तक पूरा नहीं हो सका है।
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यही नहीं 2015 में नानकमत्ता के खमरिया गांव से लाई गई करीब 125 साल पुरानी लोहे की नाव भी बगैर स्टैंड के संग्रहालय के बाहर पड़ी हुई है। इधर, संग्रहालय प्रभारी डॉ. ज्ञान प्रकाश तिवारी ने देघाट और कुछ अन्य क्षेत्रों से स्तंभ नहीं आने के कारण कार्य में विलंब होने की बात कहकर अपना पल्ला झाड़ लिया, जबकि कार्य सितंबर पहले सप्ताह तक पूरा होना था।