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Almora News: रानीखेत में दिखा दुर्लभ सफेद भौंह वाला बुलबुल
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रानीखेत (अल्मोड़ा)। पर्वतीय क्षेत्र की समृद्ध जैव विविधता का एक और अनूठा नजारा सामने आया है। क्षेत्र के प्रसिद्ध नेचर एवं बर्ड फोटोग्राफर कमल गोस्वामी ने रानीखेत के रानीझील क्षेत्र में सफेद भौंह वाले बुलबुल की एक बेहद आकर्षक तस्वीर अपने कैमरे में कैद की है।
कमल गोस्वामी ने बताया कि यह पक्षी अक्सर झाड़ियों, जंगलों के किनारों और घने पेड़ों वाले क्षेत्रों में दिखाई देता है। इस पक्षी की सबसे खास पहचान इसका सफेद सिर, आंखों के पास काले मास्क जैसा पैटर्न और भूरे रंग का शरीर है। इस प्रजाति में नर और मादा दिखने में लगभग समान होते हैं। नर पक्षी अपेक्षाकृत अधिक सक्रिय होते हैं और तेज स्वर में गान करते हैं जबकि मादा पक्षी का व्यवहार थोड़ा शांत और घोंसला बनाने में अधिक केंद्रित होता है।
कमल गोस्वामी ने बताया कि प्रत्येक पक्षी प्रकृति की एक महत्वपूर्ण कड़ी है। जंगल केवल पेड़ों का समूह नहीं बल्कि हजारों जीव-जंतुओं और पक्षियों का घर है। हमें पक्षियों के घोंसलों को नष्ट नहीं करना चाहिए और न ही उन्हें पकड़ने या परेशान करना चाहिए। यदि हम पक्षियों को बचाएंगे तभी प्रकृति का संतुलन और आने वाली पीढ़ियों का भविष्य सुरक्षित रहेगा।
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गोस्वामी ने बताया कि यह पक्षी मुख्य रूप से कीड़े-मकोड़े, छोटे फल, फूलों का रस और झाड़ियों में पाए जाने वाले छोटे कीटों पर निर्भर रहता है।
पक्षी की शारीरिक बनावट और महत्व
मापदंड विवरण
आकार
लगभग 19–20 सेंटीमीटर लंबा
वजन
करीब 25-35 ग्राम
मुख्य विशेषता कीटों की संख्या नियंत्रित करने और बीजों के प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाकर जंगल के पारिस्थितिक संतुलन को बनाए रखना है।
कोट
वन्यजीवों और पक्षियों का संरक्षण बेहद आवश्यक है क्योंकि यह सीधे तौर पर हमारे पर्यावरण की गुणवत्ता को दर्शाता है। लोगों को इनके प्राकृतिक आवास को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहिए। आम जनता से अपील है कि पक्षियों को नुकसान न पहुंचाएं और इनके संरक्षण में वन विभाग का सहयोग करें। - तापस मिश्रा, वन क्षेत्राधिकारी, रानीखेत
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कमल गोस्वामी ने बताया कि यह पक्षी अक्सर झाड़ियों, जंगलों के किनारों और घने पेड़ों वाले क्षेत्रों में दिखाई देता है। इस पक्षी की सबसे खास पहचान इसका सफेद सिर, आंखों के पास काले मास्क जैसा पैटर्न और भूरे रंग का शरीर है। इस प्रजाति में नर और मादा दिखने में लगभग समान होते हैं। नर पक्षी अपेक्षाकृत अधिक सक्रिय होते हैं और तेज स्वर में गान करते हैं जबकि मादा पक्षी का व्यवहार थोड़ा शांत और घोंसला बनाने में अधिक केंद्रित होता है।
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कमल गोस्वामी ने बताया कि प्रत्येक पक्षी प्रकृति की एक महत्वपूर्ण कड़ी है। जंगल केवल पेड़ों का समूह नहीं बल्कि हजारों जीव-जंतुओं और पक्षियों का घर है। हमें पक्षियों के घोंसलों को नष्ट नहीं करना चाहिए और न ही उन्हें पकड़ने या परेशान करना चाहिए। यदि हम पक्षियों को बचाएंगे तभी प्रकृति का संतुलन और आने वाली पीढ़ियों का भविष्य सुरक्षित रहेगा।
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गोस्वामी ने बताया कि यह पक्षी मुख्य रूप से कीड़े-मकोड़े, छोटे फल, फूलों का रस और झाड़ियों में पाए जाने वाले छोटे कीटों पर निर्भर रहता है।
पक्षी की शारीरिक बनावट और महत्व
मापदंड विवरण
आकार
लगभग 19–20 सेंटीमीटर लंबा
वजन
करीब 25-35 ग्राम
मुख्य विशेषता कीटों की संख्या नियंत्रित करने और बीजों के प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाकर जंगल के पारिस्थितिक संतुलन को बनाए रखना है।
कोट
वन्यजीवों और पक्षियों का संरक्षण बेहद आवश्यक है क्योंकि यह सीधे तौर पर हमारे पर्यावरण की गुणवत्ता को दर्शाता है। लोगों को इनके प्राकृतिक आवास को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहिए। आम जनता से अपील है कि पक्षियों को नुकसान न पहुंचाएं और इनके संरक्षण में वन विभाग का सहयोग करें। - तापस मिश्रा, वन क्षेत्राधिकारी, रानीखेत