{"_id":"5ee8b5ae8ebc3e42d05de4bc","slug":"lillium-flowers-are-not-getting-buyers-in-lockdown-almora-news-hld386418333","type":"story","status":"publish","title_hn":"लॉकडाउन में लिलियम के फूलों को नहीं मिल रहे खरीदार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
लॉकडाउन में लिलियम के फूलों को नहीं मिल रहे खरीदार
विज्ञापन
काफलीखान(अल्मोड़ा)। लॉकडाउन में लिलियम के फूल नहीं बिकने से जहां फूल उत्पादकों में मायूसी है वहीं उनका पूर्व में बेचे गए फूलों का लाखों रुपये का भुगतान अटका है। इससे किसानों पर दोहरी मार पड़ी है।
विश्व बैंक वित्त पोषित विकेंद्रीकृत जलागम विकास परियोजना (ग्राम्या) फेज टू के तहत धौलादेवी विकास खंड में किसानों से लिलियम के फूलों की खेती कराई गई। जलागम ने उत्पादित फूलों की बिक्री के लिए बाजार की व्यवस्था की। एक साल गुजर जाने के बाद भी किसानों को फूलो की बिक्री की राशि का भुगतान नहीं किया गया। जिससे काश्तकारों में मायूसी है।
फूल उत्पादक किसानों का एक तरफ लाखों रुपये का भुगतान अटका है तो वहीं वर्तमान में लिलियम के फूल न बिकने से उन्हें आर्थिक नुकसान हो रहा है। लिलियम ठंडी आबोहवा का बेहद खूबसूरत फूल है। सजावट में यह बहुत काम आता है जिसकी वजह से बाजार में इसकी अच्छी कीमत मिल जाती है।
विज्ञापन
लॉकडाउन में लाखों रुपये का फूल नहीं बिकने से काश्तकारों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। ग्राम्या फेज टू के तहत धौलादेवी में किसानों से पिछले पांच सालों से समूह और व्यक्तिगत तौर पर आय संवर्धन के अनेक कार्य कराए जा रहे हैं। जिसमें फलदार पौध लगाने, कृषि उत्पादन, मुर्गी पालन, मौन पालन, सब्जी उत्पादन, कैटरिग, टेलरिंग, टेंट हाउस की स्थापना, टोकरी उद्योग समेत अनेक कल्याणकारी योजनाओं का लाभ ग्रामीण काश्तकारों को मिल रहा है। काश्तकारों ने बताया कि लिलियम के फूलों की बिक्री के बाद ग्राम्या ने उनका भुगतान रोक दिया है। लाखों रुपये का भुगतान नहीं होने से वह आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं। दूसरी तरफ लॉकडाउन के चलते लिलियम के फूलों को खरीदार नहीं मिल रहे हैं। ऐसे में उन पर दोहरी मार पड रही है।
विज्ञापन
विश्व बैंक वित्त पोषित विकेंद्रीकृत जलागम विकास परियोजना (ग्राम्या) फेज टू के तहत धौलादेवी विकास खंड में किसानों से लिलियम के फूलों की खेती कराई गई। जलागम ने उत्पादित फूलों की बिक्री के लिए बाजार की व्यवस्था की। एक साल गुजर जाने के बाद भी किसानों को फूलो की बिक्री की राशि का भुगतान नहीं किया गया। जिससे काश्तकारों में मायूसी है।
विज्ञापन
फूल उत्पादक किसानों का एक तरफ लाखों रुपये का भुगतान अटका है तो वहीं वर्तमान में लिलियम के फूल न बिकने से उन्हें आर्थिक नुकसान हो रहा है। लिलियम ठंडी आबोहवा का बेहद खूबसूरत फूल है। सजावट में यह बहुत काम आता है जिसकी वजह से बाजार में इसकी अच्छी कीमत मिल जाती है।
विज्ञापन
लॉकडाउन में लाखों रुपये का फूल नहीं बिकने से काश्तकारों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। ग्राम्या फेज टू के तहत धौलादेवी में किसानों से पिछले पांच सालों से समूह और व्यक्तिगत तौर पर आय संवर्धन के अनेक कार्य कराए जा रहे हैं। जिसमें फलदार पौध लगाने, कृषि उत्पादन, मुर्गी पालन, मौन पालन, सब्जी उत्पादन, कैटरिग, टेलरिंग, टेंट हाउस की स्थापना, टोकरी उद्योग समेत अनेक कल्याणकारी योजनाओं का लाभ ग्रामीण काश्तकारों को मिल रहा है। काश्तकारों ने बताया कि लिलियम के फूलों की बिक्री के बाद ग्राम्या ने उनका भुगतान रोक दिया है। लाखों रुपये का भुगतान नहीं होने से वह आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं। दूसरी तरफ लॉकडाउन के चलते लिलियम के फूलों को खरीदार नहीं मिल रहे हैं। ऐसे में उन पर दोहरी मार पड रही है।