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सोबन सिंह जीना विवि की पहल: अब क्यूआर कोड से जानें औषधीय पौधों के गुणधर्म, मिलेगी पेड़ों की जानकारी

Thu, 22 Feb 2024 04:23 PM IST
हीरा मेहरा अमर उजाला नेटवर्क, अल्मोड़ा
अमर उजाला नेटवर्क, अल्मोड़ा Published by: हीरा मेहरा Updated Thu, 22 Feb 2024 04:23 PM IST
सार

अल्मोड़ा के सोबन सिंह जीना परिसर का वनस्पति विज्ञान विभाग परिसर के साथ ही पर्यटक स्थलों, मंदिरों और सार्वजनिक स्थानों पर औषधीय पौधों पर क्यूआर कोड लगाएगा। इस कोड को स्कैन कर पौधे की आयु और उसके गुणों के बारे में पता चलेगा।

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Know the properties of medicinal plants through QR code in Soban Singh Jeena University almora
सोबन सिंह जीना परिसर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अल्मोड़ा के सोबन सिंह जीना परिसर का वनस्पति विज्ञान विभाग परिसर के साथ ही पर्यटक स्थलों, मंदिरों और सार्वजनिक स्थानों पर औषधीय पौधों पर क्यूआर कोड लगाएगा। इस कोड को स्कैन कर पौधे की आयु और उसके गुणों के बारे में पता चलेगा।

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इसकी शुरुआत विभाग में स्थापित बॉटनिकल गार्डन से हुई है। यहां अब तक 50 से अधिक पौधों पर क्यूआर कोड लगा दिया गया है। इसके विभाग नगर समेत पर्यटन स्थलों और सार्वजनिक स्थानों पर गींगो बाइलोबा, साइकस, टैक्सस, सिकोया उतीस, तुलसी, बेल पत्र, एलोवेरा, पीपल, गुड़हल चौड़े, बुरांश, रोजमेरी, तिमूर, तेजपत्ता आदि पौधों की करीब 300 दुर्लभ प्रजातियां पर क्यूआर कोड लगाएगा। इसके लिए विभाग प्रस्ताव तैयार कर रहा है। स्वीकृति मिलने पर इन पौधों का संरक्षण होने के साथ ही पर्यटक इनके महत्व को जान सकेंगे।
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उतीस नाइट्रोजन को बनाए रखने में है सहायक
अल्मोड़ा जिले में कई स्थानों पर उतीस काफी संख्या में पैदा होता है। उतीस ( एल्नस नेपालेंसिस ) और इसकी प्रजाति कोरेरिया नेपलेंसिस, अकेशिया डेलाबेटा प्रजाति पर्यावरण में नाइट्रोजन के स्थिरीकरण में सहायक है। 

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कोट-पौधे पर लगे क्यूआर कोड को स्कैन करते ही पौधे का नाम, उसका वानस्पतिक नाम, पौधे रोपने का समय, फूल और फल आने की पूरी जानकारी मिल सकेगी। इसके साथ ही पौधे के पाए जाने वाले स्थानों, उसके मूल्य और इससे तैयार उत्पादों के बारे में भी पता चल सकेगा। - डॉ. धनी आर्या, विभागाध्यक्ष वनस्पति विज्ञान विभाग, एसएसजे परिसर अल्मोड़ा।
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