वन पंचायतों की आर्थिकी सुधारेगी जायका
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जायका परियोजना के माध्यम से वन पंचायतों का सुदृढ़ीकरण होगा। इससे ग्रामीणों की आजीविका में भी सुधार होगा। चालू वित्तीय वर्ष में अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, बागेश्वर, चंपावत जिले की 48 वन पंचायतें चयनित की गई हैं। करीब 30 करोड़ से महिला समूहों के जरिए वन पंचायतों में पौध रोपण, चारा विकास, भूमि संरक्षण, चाल-खाल, चैक डैम का निर्माण किया जाएगा।
जापान इंटरनेशनल कारपोरेशन एजेंसी (जायका परियोजना) अल्मोड़ा, बागेश्वर, पिथौरागढ़ और चंपावत जिले में लागू की गई है। परियोजना के तहत चारों जिलों में 48 वन पंचायतों का चयन किया गया है। इन वन पंचायतों में पौध रोपण, चारा विकास, भूमि संरक्षण, जल संचय के लिए चाल-खाल निर्माण, वन पंचायतों की घेराबंदी, चेकडैम के काम होंगे। इन क्षेत्रों में महिला समूहों का गठन किया जाएगा। महिला समूह की सदस्य ही इन कार्यों को करेंगी ताकि उनकी आय में बढ़ोतरी हो सके। वन संरक्षक उत्तरी कुमाऊं वृत्त प्रेम कुमार ने बताया कि इस पंचवर्षीय परियोजना में संबंधित वन पंचायत क्षेत्रों और गांवों के लिए मुफीद प्रजातियों के फलदार समेत अन्य पौधे, चारा घास आदि लगाई जाएंगी। इसके अलावा भूमि संरक्षण, जल संवर्धन के कार्य किए जाएंगे। ग्रामीणों के नाप खेतों में भी चारा घास लगाई जाएगी। वनों के सुदृढ़ीकरण को परियोजना में प्राथमिकता मिलेगी। इससे ग्रामीणों को मवेशियों के लिए पर्याप्त चारा मिलेगा और वन पंचायतों की आय में भी बढ़ोतरी होगी। फलदार पौधों के रोपण से भी ग्रामीण और वन पंचायतें आय कमा सकेंगी।