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जीबी पंत हिमालय संस्थान और अर्थवाच के बीच करार
ब्यूरो, अमर उजाला ब्यूरो/ अल्मोड़ा
Updated Tue, 09 Jun 2015 11:23 PM IST
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भारतीय हिमालय क्षेत्र में जन सामान्य के मध्य वैज्ञानिक अभिरूचि और सहभागिता को बढ़ावा देने के लिए गत दिवस दिल्ली में गोविंद बल्लभ पंत हिमालय पर्यावरण और विकास संस्थान के निदेशक डा. पीपी ध्यानी और अर्थवाच संस्थान गुडगांव के राष्ट्रीय निदेशक डा. रघु सक्सेना ने एक करार पर हस्ताक्षर किए।
संस्थान के निदेशक डा. पीपी ध्यानी ने दिल्ली से लौटने पर यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इस करार के अस्तित्व में आने से हिमालय के विभिन्न राज्यों में इन दोनों संस्थानों की ओर से वानिकी, कृषि, ऊर्जा, जलवायु परिवर्तन, जल संसाधन और जैव विविधता पर शोध कार्य के लिए जन सहभागिता को बढ़ावा देने के साथ ही इन विषयों पर तकनीकी ज्ञान को जन सामान्य तक पहुंचाने के प्रयास किए जाएंगे। इस कार्य में विद्यार्थियों, काश्तकारों का सहयोग भी लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि विश्व स्तरीय संस्थान के साथ करार होने से संस्थान के शोध और विकास कार्यक्रमों को हिमालय के सुदूर क्षेत्रों में पहुंचाने में मदद मिलेगी।
मालूम हो कि अर्थवाच विश्व स्तरीय संस्थान है। यह उच्च स्तरीय शोध पर आधारित ज्ञान का जन सहभागिता से प्रचार प्रसार कर शोध कार्य में नागरिकों की मदद लेता है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में पर्यावरण संस्थान के साथ भी एक शोध परियोजना इस संस्थान के वित्तीय सहयोग से कुल्लू हिमाचल प्रदेश, अल्मोड़ा, गैंगटाक सिक्किम में संचालित की जा रही है। जिसमें हिमालयी वनों की पर्यावरणीय सेवा और कीट परागण का अध्ययन किया जा रहा है।
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संस्थान के निदेशक डा. पीपी ध्यानी ने दिल्ली से लौटने पर यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इस करार के अस्तित्व में आने से हिमालय के विभिन्न राज्यों में इन दोनों संस्थानों की ओर से वानिकी, कृषि, ऊर्जा, जलवायु परिवर्तन, जल संसाधन और जैव विविधता पर शोध कार्य के लिए जन सहभागिता को बढ़ावा देने के साथ ही इन विषयों पर तकनीकी ज्ञान को जन सामान्य तक पहुंचाने के प्रयास किए जाएंगे। इस कार्य में विद्यार्थियों, काश्तकारों का सहयोग भी लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि विश्व स्तरीय संस्थान के साथ करार होने से संस्थान के शोध और विकास कार्यक्रमों को हिमालय के सुदूर क्षेत्रों में पहुंचाने में मदद मिलेगी।
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मालूम हो कि अर्थवाच विश्व स्तरीय संस्थान है। यह उच्च स्तरीय शोध पर आधारित ज्ञान का जन सहभागिता से प्रचार प्रसार कर शोध कार्य में नागरिकों की मदद लेता है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में पर्यावरण संस्थान के साथ भी एक शोध परियोजना इस संस्थान के वित्तीय सहयोग से कुल्लू हिमाचल प्रदेश, अल्मोड़ा, गैंगटाक सिक्किम में संचालित की जा रही है। जिसमें हिमालयी वनों की पर्यावरणीय सेवा और कीट परागण का अध्ययन किया जा रहा है।
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