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Almora News: किसानों ने सीखे संतुलित उर्वरक उपयोग और मृदा परीक्षण के गुर
Tue, 03 Nov 2026 11:51 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
Updated Tue, 03 Nov 2026 11:51 PM IST
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अल्मोड़ा। विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (वीपीकेएएस) अल्मोड़ा में 15 दिवसीय जनजातीय गौरव दिवस कार्यक्रम के तीसरे दिन जनजातीय किसानों के लिए मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन, मृदा परीक्षण एवं संतुलित उर्वरक उपयोग विषय पर ऑनलाइन प्रशिक्षण एवं परिचर्चा आयोजित की गई।
मुख्य वक्ता और संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. राजेंद्र प्रसाद मीणा ने मिट्टी के भौतिक, रासायनिक एवं जैविक गुणों के साथ-साथ मृदा परीक्षण के महत्त्व पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने किसानों को मिट्टी के नमूने एकत्र करने की वैज्ञानिक विधि समझाई और मृदा स्वास्थ्य कार्ड के आधार पर संतुलित उर्वरक उपयोग की सलाह दी। डॉ. मीणा ने बताया कि रासायनिक खादों के साथ गोबर की सड़ी खाद, कंपोस्ट और वर्मी कंपोस्ट का समन्वित प्रयोग मिट्टी की उर्वरता और फसल उत्पादकता बनाए रखने के लिए बेहद जरूरी है। सभी सहभागी वैज्ञानिकों और जनजातीय गांवों के किसानों को स्थानीय संसाधनों का समुचित उपयोग कर मृदा स्वास्थ्य व कृषि उत्पादकता में सुधार लाने के लिए प्रोत्साहित किया गया। कार्यक्रम का सफल समन्वय जनजातीय उपयोजना के नोडल अधिकारी डॉ. बीएम पांडेय ने किया।
वर्मी कंपोस्ट इकाइयों की स्थापना का अनुरोध
परिचर्चा के दौरान चमोली जिले के बंपा गांव के प्रगतिशील किसान हरीश नेगी ने दूरस्थ सीमावर्ती जनजातीय गांवों (नीति, मलारी, बंपा, कैलाशपुर, मेराग) में संस्थान की ओर से संचालित कृषि गतिविधियों की सराहना की। उन्होंने किसानों के लिए स्थानीय स्तर पर वर्मी कंपोस्ट इकाइयों की स्थापना और मृदा परीक्षण आधारित तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराने का अनुरोध किया।
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मुख्य वक्ता और संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. राजेंद्र प्रसाद मीणा ने मिट्टी के भौतिक, रासायनिक एवं जैविक गुणों के साथ-साथ मृदा परीक्षण के महत्त्व पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने किसानों को मिट्टी के नमूने एकत्र करने की वैज्ञानिक विधि समझाई और मृदा स्वास्थ्य कार्ड के आधार पर संतुलित उर्वरक उपयोग की सलाह दी। डॉ. मीणा ने बताया कि रासायनिक खादों के साथ गोबर की सड़ी खाद, कंपोस्ट और वर्मी कंपोस्ट का समन्वित प्रयोग मिट्टी की उर्वरता और फसल उत्पादकता बनाए रखने के लिए बेहद जरूरी है। सभी सहभागी वैज्ञानिकों और जनजातीय गांवों के किसानों को स्थानीय संसाधनों का समुचित उपयोग कर मृदा स्वास्थ्य व कृषि उत्पादकता में सुधार लाने के लिए प्रोत्साहित किया गया। कार्यक्रम का सफल समन्वय जनजातीय उपयोजना के नोडल अधिकारी डॉ. बीएम पांडेय ने किया।
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वर्मी कंपोस्ट इकाइयों की स्थापना का अनुरोध
परिचर्चा के दौरान चमोली जिले के बंपा गांव के प्रगतिशील किसान हरीश नेगी ने दूरस्थ सीमावर्ती जनजातीय गांवों (नीति, मलारी, बंपा, कैलाशपुर, मेराग) में संस्थान की ओर से संचालित कृषि गतिविधियों की सराहना की। उन्होंने किसानों के लिए स्थानीय स्तर पर वर्मी कंपोस्ट इकाइयों की स्थापना और मृदा परीक्षण आधारित तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराने का अनुरोध किया।
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