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पुष्कर से आस, खत्म होगा आपदा से मिला वनवास

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Tue, 06 Jul 2021 11:13 PM IST
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disaster affected people of Dhaulchina waiting for help since 11 years
धौलछीना (दरबान रावत)। राज्य में नौ मुख्यमंत्री और नौ डीएम बदलने के बाद भी वनवासी की तरह जीवन काट रहे 13 लोगों की जिंदगी नहीं बदली है। आपदा से बेघर हुए तीन परिवारों के इन लोगों को सरकार मदद के नाम पर नाममात्र की राशि और टेंट देकर छोड़ दिया गया है। इसके बाद किसी ने इनकी खैरियत पूछने की जहमत भी नहीं उठाई है। अब सूबे के नए मुखिया से आपदा प्रभावितों को विस्थापन की उम्मीद जग गई है।
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2010 में आई आपदा ने खैरखेत निवासी दनी राम, गोविंद राम, हरीश राम, बहादुर राम, सुजान राम और किशन राम के परिवारों के 36 लोगों के सिर से छत छीन ली। आपदा के समय सदमे से एक परिवार के मुखिया धनी राम की मौत तक हो गई। अन्य परिवारों के कुछ सदस्यों की भी मौत हो गई। काफी इंतजार के बाद भी जब मदद नहीं मिली तो बहादुर राम के परिवार ने पलायन कर लिया। दो परिवार किराए में जीवन यापन करने के लिए मजबूर हैं।
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गांव की डेढ़ सौ नाली उपजाऊ भूमि और कई मकान आपदा की भेंट चढ़ गए थे। पीड़ित परिवारों को सरकार ने मदद के नाम पर स्कूल में आसरा दिया, कुछ परिवारों को टेंट और लालटेन थमा दिए। 11 साल बीतने के बाद भी स्कूल और पंचायत घर में रह रहे पीड़ितों की किसी ने सुध नहीं ली। भवन में न बिजली है और न पानी का इंतजाम। चहारदीवारी और शौचालय तक नहीं है।
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एक पीड़ित परिवार की मुखिया कमला देवी का कहना है इन 11 सालों में कक्षा तीन में पढ़ने वाली बेटी ने इंटर पास कर लिया, दो बेटे और एक बेटी विवाह के योग्य हो गए हैं, लेकिन अपना भवन नहीं होने से दिक्कतें हैं। ग्राम प्रधान संतोष आर्य का कहना है कई बार शासन प्रशासन से विस्थापन की गुहार लगा चुके हैं, चक्का जाम से लेकर जिला अधिकारी कार्यालय में धरना भी दे दिया लेकिन आश्वासन के सिवा कुछ नहीं मिल सका। (संवाद)
मंत्री और अधिकारी बदलते रहे और मिलता रहा आश्वासन
धौलछीना। सरकारें और अधिकारी बदलते रहे लेकिन पीड़ितों को आश्वासन के सिवा कुछ नहीं मिल सका। इन दस सालों में भाजपा-कांग्रेस के कई विधायक, अधिकारी समेत तमाम जन प्रतिनिधियों ने क्षेत्र में पहुंचकर आश्वासन दिया। न ही स्कूल भवन में कोई सुविधा मिल सकी और न ही विस्थापन हो सका। कभी वन भूमि मामले में पेंच फंसा तो कभी सीमा विवाद में मामला उलझा। (संवाद)

बरसात में सहम उठते हैं पीड़ित परिवार
धौलछीना। बरसात आते ही पीड़ित परिवार सहम उठते हैं। नदी किनारे होने के कारण इन दिनों भी पीड़ितों के माथे पर चिंता की लकीरें उभरती हैं। वहीं सर्दियों में कंपकंपाती ठंड के बीच दुश्वारियों का सामना करना पड़ता है। प्रभावित परिवारों के पास श्रम विभाग में पंजीकरण, जॉब कार्ड तक नहीं होने से उन्हें योजनाओं का भी लाभ नहीं मिल पाता है। किसी तरह पीड़ित परिवार अपनी आजीविका चला रहे हैं।(संवाद)
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