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अतिथि गृह के रूप में विकसित होंगी धर्मशालाएं
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जसुली देवी द्वारा बनाई गई इन धर्मशालाओं को अतिथि गृह के रुप में विकसित किया जाएगा।
- फोटो : ALMORA
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अल्मोड़ा। कैलाश मानसरोवर समेत अन्य धार्मिक यात्रियों के लिए डेढ़ सौ साल पहले दानवीर जसुली देवी शौक्याणी की ओर से बनाई गईं धर्मशालाएं अब नए रूप में नजर आएंगी। इन्हें अतिथि गृह के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके लिए अल्मोड़ा जिले में पांच धर्मशालाओं का चयन किया गया है।
दानवीर के नाम से प्रसिद्ध जसुली देवी शौक्याणी ने अल्मोड़ा, नैनीताल, पिथौरागढ़ समेत अन्य जगहों पर कई धर्मशालाओं का निर्माण कराया था। बताया जाता है कि जसुली शौक्याणी उस जमाने में सर्वाधिक धनी महिलाओं में से थीं। एकमात्र बेटे की मृत्यु के बाद उनकी संपत्ति का कोई वारिस नहीं था, जिसके चलते उन्होंने अपने पास रखे सोना चांदी और अन्य जेवरात को नदी में बहा देने का निर्णय लिया था। कहा जाता है कि जसुली शौक्याणी के इस फैसले की जानकारी तत्कालीन अंग्रेज कमिश्नर रैमजे को मिली। कमिश्नर रैमजे ने उन्हें अपनी संपत्ति को नष्ट करने के बजाय इसे सामाजिक कार्य में लगाने का सुझाव दिया। उनके सुझाव पर जसुली शौक्याणी ने कैलाश मानसरोवर धार्मिक यात्रा मार्ग पर 200 से अधिक धर्मशालाएं बनवाईं। इनमें से कुछ धर्मशालाओं का ढांचा आज भी पूरी तरह से सुरक्षित है, हालांकि रखरखाव के अभाव में अधिकांश धर्मशालाएं जीर्ण-शीर्ण हैं।
अब प्रदेश सरकार ने पर्यटन विभाग के माध्यम से इन धर्मशालाओं को नया रूप देने का फैसला लिया है। इसके तहत अल्मोड़ा जिले के तमाम स्थानों पर धर्मशालाओं की खोज कर चिन्हित किया जा रहा है। अब तक जिले में पांच धर्मशालाएं मिली हैं। जिला पर्यटन अधिकारी राहुल चौबे के मुताबिक इन धर्मशालाओं को अतिथि गृह के रूप में विकसित किया जाएगा। विभाग की ओर से 13 डिस्ट्रिक्ट 13 डेस्टिनेशन योजना के तहत इनका विकास होगा। यह भी जानकारी मिली है कि प्रदेश शासन ने कुमाऊं में सभी जिला पर्यटन विकास अधिकारियों को अपने क्षेत्रों में स्थित जसुली शौक्याणी द्वारा निर्मित इन धर्मशालाओं को अतिथि गृह के रूप में विकसित करने की योजना बनाने के निर्देश दिए गए हैं।
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अल्मोड़ा जिले में 30 से 40 धर्मशालाएं होने की संभावना
पर्यटन कार्यालय से मिली जानकारी के मुताबिक जिले में लगभग 30 से 40 स्थानों पर ऐतिहासिक धर्मशालाएं होने की संभावना बताई जा रही है। नौलों गधेरों के समीप बनीं इन धर्मशालाओं की हालत जीर्ण-क्षीर्ण है। अभी तक कटारमल, एनटीडी, ममरछीना, लमगड़ा और काकड़ीघाट में धर्मशालाएं मिल गई हैं, जिन्हें विकसित जल्द विकसित किया जाएगा।
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जिले में अब तक पांच स्थानों पर शौक्याणी देवी द्वारा बनाई गईं एतिहासिक धर्मशालाएं मिल चुकी हैं। अन्य जगह भी धर्मशालाओं की खोज कर उन्हें विकसित किया जाएगा। इन पांच स्थानों पर अतिथि गृह बनाने के लिए 13 डिस्ट्रिक्ट 13 डेस्टिनेशन के तहत कार्य किए जाएंगे। इसके लिए कार्यदायी संस्था आरईएस से भी पत्राचार किया गया है। -राहुल चौबे, जिला पर्यटन अधिकारी अल्मोड़ा।
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दानवीर के नाम से प्रसिद्ध जसुली देवी शौक्याणी ने अल्मोड़ा, नैनीताल, पिथौरागढ़ समेत अन्य जगहों पर कई धर्मशालाओं का निर्माण कराया था। बताया जाता है कि जसुली शौक्याणी उस जमाने में सर्वाधिक धनी महिलाओं में से थीं। एकमात्र बेटे की मृत्यु के बाद उनकी संपत्ति का कोई वारिस नहीं था, जिसके चलते उन्होंने अपने पास रखे सोना चांदी और अन्य जेवरात को नदी में बहा देने का निर्णय लिया था। कहा जाता है कि जसुली शौक्याणी के इस फैसले की जानकारी तत्कालीन अंग्रेज कमिश्नर रैमजे को मिली। कमिश्नर रैमजे ने उन्हें अपनी संपत्ति को नष्ट करने के बजाय इसे सामाजिक कार्य में लगाने का सुझाव दिया। उनके सुझाव पर जसुली शौक्याणी ने कैलाश मानसरोवर धार्मिक यात्रा मार्ग पर 200 से अधिक धर्मशालाएं बनवाईं। इनमें से कुछ धर्मशालाओं का ढांचा आज भी पूरी तरह से सुरक्षित है, हालांकि रखरखाव के अभाव में अधिकांश धर्मशालाएं जीर्ण-शीर्ण हैं।
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अब प्रदेश सरकार ने पर्यटन विभाग के माध्यम से इन धर्मशालाओं को नया रूप देने का फैसला लिया है। इसके तहत अल्मोड़ा जिले के तमाम स्थानों पर धर्मशालाओं की खोज कर चिन्हित किया जा रहा है। अब तक जिले में पांच धर्मशालाएं मिली हैं। जिला पर्यटन अधिकारी राहुल चौबे के मुताबिक इन धर्मशालाओं को अतिथि गृह के रूप में विकसित किया जाएगा। विभाग की ओर से 13 डिस्ट्रिक्ट 13 डेस्टिनेशन योजना के तहत इनका विकास होगा। यह भी जानकारी मिली है कि प्रदेश शासन ने कुमाऊं में सभी जिला पर्यटन विकास अधिकारियों को अपने क्षेत्रों में स्थित जसुली शौक्याणी द्वारा निर्मित इन धर्मशालाओं को अतिथि गृह के रूप में विकसित करने की योजना बनाने के निर्देश दिए गए हैं।
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अल्मोड़ा जिले में 30 से 40 धर्मशालाएं होने की संभावना
पर्यटन कार्यालय से मिली जानकारी के मुताबिक जिले में लगभग 30 से 40 स्थानों पर ऐतिहासिक धर्मशालाएं होने की संभावना बताई जा रही है। नौलों गधेरों के समीप बनीं इन धर्मशालाओं की हालत जीर्ण-क्षीर्ण है। अभी तक कटारमल, एनटीडी, ममरछीना, लमगड़ा और काकड़ीघाट में धर्मशालाएं मिल गई हैं, जिन्हें विकसित जल्द विकसित किया जाएगा।
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जिले में अब तक पांच स्थानों पर शौक्याणी देवी द्वारा बनाई गईं एतिहासिक धर्मशालाएं मिल चुकी हैं। अन्य जगह भी धर्मशालाओं की खोज कर उन्हें विकसित किया जाएगा। इन पांच स्थानों पर अतिथि गृह बनाने के लिए 13 डिस्ट्रिक्ट 13 डेस्टिनेशन के तहत कार्य किए जाएंगे। इसके लिए कार्यदायी संस्था आरईएस से भी पत्राचार किया गया है। -राहुल चौबे, जिला पर्यटन अधिकारी अल्मोड़ा।