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उपडाकघर पोखरखाली का चर्चित घोटाला
Updated Sat, 12 May 2018 10:32 PM IST
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भारतीय करंसी
अल्मोड़ा। उपडाकघर पोखरखाली में 2015 में हुए चर्चित घोटाले में विभाग ने करीब 15 कर्मचारियों को जिम्मेदार ठहराते हुए उनसे 55 लाख रुपये से अधिक की वसूली की कार्रवाई शुरू कर दी है। इसके लिए कर्मचारियों के वेतन से प्रतिमाह कटौती की जा रही है। विभाग कुछ कर्मचारियों से काफी पैसा वसूल भी कर चुका है। इन कर्मचारियों से 40 हजार रुपये से लेकर पांच लाख रुपये तक की वसूली की जा रही है।
पोखरखाली उपडाकघर में 2015 में यह घोटाला प्रकाश में आया था। विभागीय जांच में स्पष्ट हुआ था कि डाकघर के खाता धारकों की पासबुक में तो राशि दर्शाई गई थी, लेकिन डाकघर में यह राशि जमा ही नहीं हुई थी। विभाग ने प्रथम दृष्ट्या इसके लिए उपडाकघर की अतिरिक्त विभागीय कर्मचारी (ग्रामीण डाक सेवक) महिला कर्मी को जिम्मेदार ठहराया था। विभाग ने महिला कर्मी को हटाकर उसके खिलाफ भी प्राथमिकी दर्ज कराई थी। विभाग द्वारा की गई जांच में लापरवाही के लिए महिला कर्मी और उप डाकघर समेत प्रधान डाकघर के करीब 15 कर्मचारियों को जिम्मेदार ठहराया गया। इस राशि की वसूली के लिए विभाग द्वारा जिम्मेदार ठहराए गए कर्मियों के वेतन से प्रतिमाह कटौती की जा रही है। बताते हैं कि करीब 25 से 30 लाख की राशि विभाग द्वारा कर्मचारियों से वसूल कर ली गई है। डाक अधीक्षक एसके कंडवाल ने भी कर्मचारियों से राशि वसूले की पुष्टि की है।
उपडाकघर पोखरखाली का चर्चित घोटाला
विभाग मासिक वेतन से काट रहा राशि
डाक कर्मचारियों ने किया वसूली का विरोध, महिला कर्मी के नार्को टेस्ट की मांग
अल्मोड़ा। अल्मोड़ा डाक मंडल के कर्मचारियों ने पोखरखाली उपडाकघर में हुए घोटाले के लिए अतिरिक्त विभागीय महिला कर्मी को जिम्मेदार ठहराते हुए उसका नार्को टेस्ट कराने की मांग की है। कर्मचारियों के शिष्टमंडल ने शनिवार को डीएम, एसएसपी से मुलाकात कर राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजा। शिष्टमंडल ने इस मामले में कर्मचारियों से 55 लाख रुपये से अधिक की विभागीय वसूली का विरोध किया। बताया कि आरोपी महिला के खिलाफ तत्कालीन डाक निरीक्षक के आदेशों के बावजूद समय से कार्रवाई नहीं की गई। कर्मचारियों के दबाव पर काफी दिनों बाद प्राथमिकी दर्ज हुई। इस दौरान महिला को साक्ष्य नष्ट करने का समय मिल गया। उन्होंने आरोप लगाया कि विभाग द्वारा कर्मचारियों से 55 लाख से अधिक का गबन दिखाकर वसूली की जा रही है, जबकि आरोपी महिला के नाम पर मात्र 1.62 लाख का गबन दिखाकर एफआईआर दर्ज की गई। महिला से कोई वसूली नहीं हुई है। कर्मचारियों ने यह भी सवाल उठाया है कि गबन को उजागर करने वाले उपडाकपाल को निलंबित करना, निर्दोष कर्मचारियों को दंडित कर उनसे वसूली करवाने की कार्रवाई राजनीतिक दबाव में भी हो सकती है। गबन की राशि किसी नेता के चुनाव प्रचार में भी खर्च करने की भी आशंका जताई। कहा कि आरोपी महिला के नार्को परीक्षण से ही सच्चाई सामने आ सकती है। शिष्टमंडल में एनडी पांडे, नरेंद्र शाही, दीपेश चंद्र आर्या, आशुतोष प्रकाश जोशी, रवि मेहता, गिरिजाशंकर पांडे, क्षितिज पांडे, स्वाति, चंदन प्रकाश, रविराज, मो. यूसुफ, दीप चंद्र डंगवाल आदि थे।
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पोखरखाली उपडाकघर में 2015 में यह घोटाला प्रकाश में आया था। विभागीय जांच में स्पष्ट हुआ था कि डाकघर के खाता धारकों की पासबुक में तो राशि दर्शाई गई थी, लेकिन डाकघर में यह राशि जमा ही नहीं हुई थी। विभाग ने प्रथम दृष्ट्या इसके लिए उपडाकघर की अतिरिक्त विभागीय कर्मचारी (ग्रामीण डाक सेवक) महिला कर्मी को जिम्मेदार ठहराया था। विभाग ने महिला कर्मी को हटाकर उसके खिलाफ भी प्राथमिकी दर्ज कराई थी। विभाग द्वारा की गई जांच में लापरवाही के लिए महिला कर्मी और उप डाकघर समेत प्रधान डाकघर के करीब 15 कर्मचारियों को जिम्मेदार ठहराया गया। इस राशि की वसूली के लिए विभाग द्वारा जिम्मेदार ठहराए गए कर्मियों के वेतन से प्रतिमाह कटौती की जा रही है। बताते हैं कि करीब 25 से 30 लाख की राशि विभाग द्वारा कर्मचारियों से वसूल कर ली गई है। डाक अधीक्षक एसके कंडवाल ने भी कर्मचारियों से राशि वसूले की पुष्टि की है।
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उपडाकघर पोखरखाली का चर्चित घोटाला
विभाग मासिक वेतन से काट रहा राशि
डाक कर्मचारियों ने किया वसूली का विरोध, महिला कर्मी के नार्को टेस्ट की मांग
अल्मोड़ा। अल्मोड़ा डाक मंडल के कर्मचारियों ने पोखरखाली उपडाकघर में हुए घोटाले के लिए अतिरिक्त विभागीय महिला कर्मी को जिम्मेदार ठहराते हुए उसका नार्को टेस्ट कराने की मांग की है। कर्मचारियों के शिष्टमंडल ने शनिवार को डीएम, एसएसपी से मुलाकात कर राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजा। शिष्टमंडल ने इस मामले में कर्मचारियों से 55 लाख रुपये से अधिक की विभागीय वसूली का विरोध किया। बताया कि आरोपी महिला के खिलाफ तत्कालीन डाक निरीक्षक के आदेशों के बावजूद समय से कार्रवाई नहीं की गई। कर्मचारियों के दबाव पर काफी दिनों बाद प्राथमिकी दर्ज हुई। इस दौरान महिला को साक्ष्य नष्ट करने का समय मिल गया। उन्होंने आरोप लगाया कि विभाग द्वारा कर्मचारियों से 55 लाख से अधिक का गबन दिखाकर वसूली की जा रही है, जबकि आरोपी महिला के नाम पर मात्र 1.62 लाख का गबन दिखाकर एफआईआर दर्ज की गई। महिला से कोई वसूली नहीं हुई है। कर्मचारियों ने यह भी सवाल उठाया है कि गबन को उजागर करने वाले उपडाकपाल को निलंबित करना, निर्दोष कर्मचारियों को दंडित कर उनसे वसूली करवाने की कार्रवाई राजनीतिक दबाव में भी हो सकती है। गबन की राशि किसी नेता के चुनाव प्रचार में भी खर्च करने की भी आशंका जताई। कहा कि आरोपी महिला के नार्को परीक्षण से ही सच्चाई सामने आ सकती है। शिष्टमंडल में एनडी पांडे, नरेंद्र शाही, दीपेश चंद्र आर्या, आशुतोष प्रकाश जोशी, रवि मेहता, गिरिजाशंकर पांडे, क्षितिज पांडे, स्वाति, चंदन प्रकाश, रविराज, मो. यूसुफ, दीप चंद्र डंगवाल आदि थे।
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