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वार्ता के बाद सर्वदलीय संघर्ष समिति का आंदोलन स्थगित

Fri, 20 Apr 2018 11:24 PM IST
Updated Fri, 20 Apr 2018 11:24 PM IST
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वार्ता के बाद सर्वदलीय संघर्ष समिति का आंदोलन स्थगित
अल्मोड़ा। डीडीए समाप्त करने की मांग को लेकर सर्वदलीय संघर्ष समिति का गांधी पार्क में चल रहा धरना डीएम इवा आशीष श्रीवास्तव से हुई वार्ता के बाद 15 दिन के लिए स्थगित हो गया है। डीएम ने बताया कि समिति की मांगों को संस्तुति सहित शासन को प्रेषित कर दिया गया है। मांगों को प्राधिकरण बोर्ड की बैठक में रखा जाएगा।
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शिष्टमंडल ने डीएम को बताया कि अल्मोड़ा नगर और जिले की विषम भौगोलिक परिस्थितियों के चलते प्राधिकरण लागू किया जाना अव्यवहारिक है। प्राधिकरण द्वारा विभिन्न प्रकार के शुल्क पालिका की अपेक्षा 10 गुना कर दिए गए हैं। प्राधिकरण गठन से पूर्व लोगों से रायशुमारी, आपत्तियां नहीं ली गईं।
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डीएम ने आश्वासन दिया कि समिति की ओर से रखी गई समस्याओं को संस्तुति सहित प्राधिकरण बोर्ड और शासन को भेजा है। वार्ता के बाद समिति के सदस्यों ने पंद्रह दिन तक धरना स्थगित करने का निर्णय लिया।
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वार्ता में प्राधिकरण सचिव एडीएम कैलाश टोलिया के अलावा समिति के अध्यक्ष पालिकाध्यक्ष प्रकाश जोशी, आनंद सिंह बगडवाल, आनंद सिंह ऐरी, पीसी तिवारी, हेम जोशी, लक्ष्मण ऐठानी, मनोज सनवाल, डीके कांडपाल, राजीव कर्नाटक, पूरन रौतेला, अमरनाथ रावत, त्रिलोचन जोशी, राधा नेगी, पुष्पा सती, सरिता टम्टा, रेखा धस्माना, शेखर लखचौरा, हर्ष कनवाल, अरुण पंत आदि शामिल थे।

समिति ने ये मुद्दे उठाए
1 - पर्वतीय क्षेत्र के लिए पार्किंग की बाध्यता समाप्त हो।
2 - भवन निर्माण में न्यूनतम 25 फीसदी क्षेत्र छोड़ने, दो मीटर रास्ते की बाध्यता समाप्त हो।
3 - ग्रामीण इलाकों में सड़क के दोनों ओर 200 मीटर दूरी तक प्राधिकरण के नियम लागू करने के मानक को कम किया जाए।
4 - गरीबों को 30 वर्ग मीटर से कम भूमि पर भवन निर्माण की अनुमति मिले।
5 - पूर्व में भवन निर्माण के लिए पालिका और रोड साइड कंट्रोल एक्ट के तहत दी गई अनुमति में प्राधिकरण पांच वर्ष तक हस्तक्षेप नहीं करे।
6 - मानचित्र स्वीकृति के लिए अनापत्ति जिन विभागों से पालिका परिषद द्वारा ली जाती थी उसे ही लागू करें।
7 - स्टेट बिल्डिंग बायलॉज के अनुसार पर्वतीय क्षेत्रों में भवन की ऊंचाई 12 मीटर हो।
8 - जहां दो मीटर कम चौड़े रास्ते हैं। वहां भवनों की ऊंचाई निर्धारण में प्राधिकरण के मानक बाधक नहीं हो।
9 - डीडीए में 50 प्रतिशत जनप्रतिनिधियों की भागीदारी हो।
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