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बगैर पद सृजित किए दस साल से चल रहा कोर्स
Updated Sat, 21 Oct 2017 09:02 PM IST
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अल्मोड़ा। कुविवि एसएसजे परिसर में पत्रकारिता विषय पढ़ने वाले छात्रों को नियमित शिक्षक नहीं मिल रहे हैं। यही नहीं पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग को खुले दस साल हो गए, लेकिन आज तक पद सृजित नहीं हो सके हैं। रोजगारपरक विषय होने के बावजूद अब छात्रों की संख्या में भी गिरावट आ रही है।
छात्रों की रोजगारपरक विषय खोलने की मांग के बाद परिसर में पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग 2008 में खुला था। शुरू में इस कोर्स को करने के लिए छात्रों की संख्या हर साल बढ़ते गई। पहले वर्ष 25 छात्र तो अगले दो-तीन सालों में बढ़कर संख्या 30 से 35 तक पहुंच गई, लेकिन पत्रकारिता करने वाले छात्रों के लिए विवि की ओर से नियमित शिक्षकों की व्यवस्था नहीं की जा सकी। बगैर पद सृजन के विभाग नौ तक आश्वासन के नाम पर चलता रहा।
विभाग में वर्तमान में एक प्रोफेसर, एक एसोसिएट और दो असिस्टेंट प्रोफेसरों की जरूरत है, लेकिन विभाग छात्रों को पढ़ाने के लिए मानदेय पर अतिथि शिक्षकों से काम चला रहा है। अब हालत इतनी खराब हो गई कि पिछले वर्ष तक विभाग में 28 छात्र-छात्राएं पंजीकृत थे लेकिन इस बार यह संख्या घटकर 15 तक पहुंच गई है। अगर यही स्थिति बनी रही तो संभव है कि पत्रकारिता करने वाले छात्रों की संख्या शून्य हो जाएगी। इधर पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के समन्वयक प्रो. देवसिंह पोखरिया का कहना है कि उन्होंने पद सृजित करने के लिए विवि से कई बार मांग की है, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
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छात्रों की रोजगारपरक विषय खोलने की मांग के बाद परिसर में पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग 2008 में खुला था। शुरू में इस कोर्स को करने के लिए छात्रों की संख्या हर साल बढ़ते गई। पहले वर्ष 25 छात्र तो अगले दो-तीन सालों में बढ़कर संख्या 30 से 35 तक पहुंच गई, लेकिन पत्रकारिता करने वाले छात्रों के लिए विवि की ओर से नियमित शिक्षकों की व्यवस्था नहीं की जा सकी। बगैर पद सृजन के विभाग नौ तक आश्वासन के नाम पर चलता रहा।
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विभाग में वर्तमान में एक प्रोफेसर, एक एसोसिएट और दो असिस्टेंट प्रोफेसरों की जरूरत है, लेकिन विभाग छात्रों को पढ़ाने के लिए मानदेय पर अतिथि शिक्षकों से काम चला रहा है। अब हालत इतनी खराब हो गई कि पिछले वर्ष तक विभाग में 28 छात्र-छात्राएं पंजीकृत थे लेकिन इस बार यह संख्या घटकर 15 तक पहुंच गई है। अगर यही स्थिति बनी रही तो संभव है कि पत्रकारिता करने वाले छात्रों की संख्या शून्य हो जाएगी। इधर पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के समन्वयक प्रो. देवसिंह पोखरिया का कहना है कि उन्होंने पद सृजित करने के लिए विवि से कई बार मांग की है, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
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