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श्री राम नाम शब्द की महिमा अपरंपार: बापू
Updated Sun, 22 Apr 2018 10:52 PM IST
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लमगड़ा(अल्मोड़ा)। श्री कल्याणिका हिमालय देवस्थानम कनरा डोल आश्रम में संत मुरारी बापू ने रविवार को रामकथा सुनाते हुए कहा कि श्री राम नाम शब्द की महिमा अपरंपार है। भगवान राम के अनंत रूप हैं। मनुष्य के मन में छल, कपट होते हैं, इसलिए उन्हें भगवान के दर्शन नहीं हो पाते।
प्रसिद्ध रामकथा वाचक मुरारी बापू ने कहा कि भगवान राम जानते थे कि उनके मार्ग में बहुत बाधाएं हैं। उन्होंने धर्म मार्ग पर चलते हुए
ही इन बाधाओं को पार किया। राम नाम की महिमा का बखान करते हुए उन्होंने कहा कि भगवान राम को वही व्यक्ति पा सकता है जिसका मन निर्मल हो। हर कोई मनुष्य भगवान को पाना चाहता है, लेकिन यह राह इतनी आसान नहीं है। भक्ति का मार्ग बहुत कठिन है जो इसे पार कर लेता है उसे ही भगवान की प्राप्ति हो सकती है।
उन्होंने कहा कि रामचरित मानस में श्री शब्द 18 बार आया है जो पूर्णांक में है। समस्त विश्व का केंद्र बिंदु भी श्री शब्द है। प्रभु की महिमा देखिए मनुष्य की लंबाई एक सीमा तक ही बढ़ती है जबकि उसकी उम्र लगातार बढ़ते रहती है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग कहते हैं कि मंदिर-मजिस्द में खुदा और भगवान रहता है लेकिन बच्चे जहां खेलते हैं हंसते है वहीं यह दोनों रहते हैं। सुतर्क द्वारा सिद्ध की गई आस्था का नाम ही श्रद्धा है।
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उन्होंने कहा कि कोई यह नहीं कह सकता है कि शास्त्र मेरे बस का हो गया बल्कि मनुष्य को शास्त्र के बस में होना होगा। श्री राम का नाम जपना तपस्या है। इस मौके पर भजन-कीर्तन भी हुए। इससे आश्रम में वातावरण भक्तिमय बना रहा। सांस्कृतिक कार्यक्रम भी हुए। रामकथा सुनने गुजरात, उड़ीसा, छतीसगढ़, मुंबई, लखनऊ, दिल्ली, गाजियाबाद, अमेरिका से बापू के भक्तजन पहुंचे हुए हैं। आसपास समेत दूरस्थ गांवों में काफी संख्या में लोग रामकथा सुनने पहुंचे हुए थे। इस मौके पर पूर्व मुख्यमंत्री और सांसद भगत सिंह कोश्यारी, पूर्व विधायक मनोज तिवारी, सुभाष पांडे, लता तिवारी आदि मौजूद थे।
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प्रसिद्ध रामकथा वाचक मुरारी बापू ने कहा कि भगवान राम जानते थे कि उनके मार्ग में बहुत बाधाएं हैं। उन्होंने धर्म मार्ग पर चलते हुए
ही इन बाधाओं को पार किया। राम नाम की महिमा का बखान करते हुए उन्होंने कहा कि भगवान राम को वही व्यक्ति पा सकता है जिसका मन निर्मल हो। हर कोई मनुष्य भगवान को पाना चाहता है, लेकिन यह राह इतनी आसान नहीं है। भक्ति का मार्ग बहुत कठिन है जो इसे पार कर लेता है उसे ही भगवान की प्राप्ति हो सकती है।
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उन्होंने कहा कि रामचरित मानस में श्री शब्द 18 बार आया है जो पूर्णांक में है। समस्त विश्व का केंद्र बिंदु भी श्री शब्द है। प्रभु की महिमा देखिए मनुष्य की लंबाई एक सीमा तक ही बढ़ती है जबकि उसकी उम्र लगातार बढ़ते रहती है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग कहते हैं कि मंदिर-मजिस्द में खुदा और भगवान रहता है लेकिन बच्चे जहां खेलते हैं हंसते है वहीं यह दोनों रहते हैं। सुतर्क द्वारा सिद्ध की गई आस्था का नाम ही श्रद्धा है।
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उन्होंने कहा कि कोई यह नहीं कह सकता है कि शास्त्र मेरे बस का हो गया बल्कि मनुष्य को शास्त्र के बस में होना होगा। श्री राम का नाम जपना तपस्या है। इस मौके पर भजन-कीर्तन भी हुए। इससे आश्रम में वातावरण भक्तिमय बना रहा। सांस्कृतिक कार्यक्रम भी हुए। रामकथा सुनने गुजरात, उड़ीसा, छतीसगढ़, मुंबई, लखनऊ, दिल्ली, गाजियाबाद, अमेरिका से बापू के भक्तजन पहुंचे हुए हैं। आसपास समेत दूरस्थ गांवों में काफी संख्या में लोग रामकथा सुनने पहुंचे हुए थे। इस मौके पर पूर्व मुख्यमंत्री और सांसद भगत सिंह कोश्यारी, पूर्व विधायक मनोज तिवारी, सुभाष पांडे, लता तिवारी आदि मौजूद थे।