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बंदियों को कानूनी अधिकारों के बारे में जानकारी दी
Updated Mon, 03 Jul 2017 10:07 PM IST
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अल्मोड़ा। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से जिला कारागार अल्मोड़ा में आयोजित विधिक साक्षरता शिविर में बंदियों को उनके कानूनी अधिकारों के बारे में जानकारी दी गई।
अध्यक्षता करते हुए प्राधिकरण के सचिव डा. शेष चंद्र ने कहा कि कारागार में विचाराधीन बंदी अथवा सजा प्राप्त बंदियों को कानून के अनुसार सुविधाएं अनुमन्य हैं। कारागार में पुरुष और महिलाओं के कक्ष अलग-अलग और पर्याप्त दूरी पर होने चाहिए। बंदियों के स्वास्थ्य परीक्षण के लिए जेल में डाक्टर की सुविधा होनी चाहिए और मुख्य रूप से बंदियों के चिकित्सीय इलाज कारागार के भीतर ही होने चाहिए। सजा प्राप्त बंदियों से एक दिन में नौ घंटे तक परिश्रम करवाया जा सकता है। जेलर मेघराज सिंह ने बताया कि जेल अधिकारी के निर्देश का पालन नहीं करना, झगड़ा करना, गाली गलौच करना, अनैतिक व्यवहार, परिश्रम करने से इंकार करना, कारागार की संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, प्रतिबंधित सामान को रखना कारागार अपराध की श्रेणी में आते हैं।
उन्होंने कहा कि कारागार में सफाई रखने, अनुशासित रहकर नियमों का पालन करना बंदियों का दायित्व है। कारागार का उद्देश्य किसी व्यक्ति को दंडित करना नहीं बल्कि सुधार लाना है। पैनल लायर प्रमोद कुमार और रितेश कुमार ने बंदियों की समस्याएं प्राधिकरण सचिव के समक्ष रखी। इस मौके पर कैदियों को सरल कानूनी ज्ञान माला पुस्तकों का वितरण किया गया। प्राधिकरण सचिव डा. शेष चंद्र ने जिला कारागार का निरीक्षण कर जेलर को समस्याओं के निस्तारण के निर्देश दिए।
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अध्यक्षता करते हुए प्राधिकरण के सचिव डा. शेष चंद्र ने कहा कि कारागार में विचाराधीन बंदी अथवा सजा प्राप्त बंदियों को कानून के अनुसार सुविधाएं अनुमन्य हैं। कारागार में पुरुष और महिलाओं के कक्ष अलग-अलग और पर्याप्त दूरी पर होने चाहिए। बंदियों के स्वास्थ्य परीक्षण के लिए जेल में डाक्टर की सुविधा होनी चाहिए और मुख्य रूप से बंदियों के चिकित्सीय इलाज कारागार के भीतर ही होने चाहिए। सजा प्राप्त बंदियों से एक दिन में नौ घंटे तक परिश्रम करवाया जा सकता है। जेलर मेघराज सिंह ने बताया कि जेल अधिकारी के निर्देश का पालन नहीं करना, झगड़ा करना, गाली गलौच करना, अनैतिक व्यवहार, परिश्रम करने से इंकार करना, कारागार की संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, प्रतिबंधित सामान को रखना कारागार अपराध की श्रेणी में आते हैं।
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उन्होंने कहा कि कारागार में सफाई रखने, अनुशासित रहकर नियमों का पालन करना बंदियों का दायित्व है। कारागार का उद्देश्य किसी व्यक्ति को दंडित करना नहीं बल्कि सुधार लाना है। पैनल लायर प्रमोद कुमार और रितेश कुमार ने बंदियों की समस्याएं प्राधिकरण सचिव के समक्ष रखी। इस मौके पर कैदियों को सरल कानूनी ज्ञान माला पुस्तकों का वितरण किया गया। प्राधिकरण सचिव डा. शेष चंद्र ने जिला कारागार का निरीक्षण कर जेलर को समस्याओं के निस्तारण के निर्देश दिए।
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