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7 समंदर पार आकर 70 साल की उम्र में किया कमाल

Thu, 09 May 2013 01:02 AM IST
हल्द्वानी/ब्यूरो
हल्द्वानी/ब्यूरो Updated Thu, 09 May 2013 01:02 AM IST
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a choice in the himalayas film

71 साल की उम्र आराम करने के लिए होती है। नाती-नातिनों के साथ खेलना इस उम्र का सौभाग्य समझा जाता है।

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कैथरीन की तरह बिरले ही लोग होते हैं जो इस उम्र में भी समाज को नई मजबूती देने घर से हजारों किलोमीटर दूर निकल आते हैं। देश की सीमाएं, रिश्तों का मोह इनके लिए मायने नहीं रखता।

मानवता का तकाजा अधिक महत्वपूर्ण होता है। यही कारण है कि फ्रांस की कैथरीन अदोर क्रौनफीनो झूलाघाट के दिगोली गांव तक पहुंचीं और दिगोली के कठिन जीवन को दुनिया के सामने लेकर आईं।
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कैथरीन की फिल्म ने ही यूरोप के देशों को दिखाया कि गौरा के देश में महिलाएं आज भी उत्तराखंड की रीढ़ हैं।
पेशे से आर्किटेक्ट कैथरीन के लिए इस उम्र में फिल्में और पेंटिंग बनाना कोई शौक नहीं।

ये समाज बदलने के हथियार हैं। गांधीजी को पढ़कर 15 साल पूर्व पहली बार भारत में कौसानी दर्शन को आई कैथरीन ने केवल यहां की खूबसूरती नहीं देखी। पहाड़ के दर्द को भी महसूस किया और इस पर फिल्म बनाकर दुनिया के सामने लाने की ठानी।
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हालांकि इसके लिए उन्होंने कौसानी को नहीं चुना जो दुनिया भर से पर्यटकों का आकर्षण है बल्कि फिल्म ‘ए च्वाइस इन हिमालया’ के लिए भारत-नेपाल सीमा पर बसे दिगोली गांव को चुना।


फिल्म की केंद्रीय भूमिका में पहाड़ की उस बेटी को रखा जिसका जीवन आज भी पहाड़ की तरह है। ‘ए च्वाइस इन हिमालया’ केवल दिगोली गांव की कहानी नहीं है।

ये पहाड़ के हर उस गांव की कहानी है जो बेरोजगारी की मार से टूटकर पलायन के रस्ते पर चल रहा है। ये केवल नायिका हेमा की भी कहानी नहीं।

ये पहाड़ की उस हर महिला का जीवन है जो कभी पिता, कभी भाई तो कभी पति की बेरोजगारी से टूटकर परिवार के लिए मजबूत संभल बनती है।

कैथरीन के मजबूत इरादों के कारण ही आज यूरोप के कई देशों तक दिगोली का दर्द पहुंचा है। इस फिल्म के लिए उन्हें कई अवार्ड भी मिल चुके हैं। अगले महीने चीन में भी यह फिल्म दिखाई जानी है।

इस बेहतरीन काम के लिए चीन उन्हें ‘वूमन लीडर’ के खिताब से भी सम्मानित करने वाला है। हालांकि ये पुरस्कार कैथरीन के लिए मायने नहीं रखते।

वह कहती हैं कि उनका मकसद पहाड़ के दूसरे पहलू को दुनिया के सामने लाना है। इस उम्र में भी वह थकी नहीं हैं।

अब वह लगातार बढ़ रहे लिंगानुपात पर फिल्म बनाने की तैयारी में हैं। कैथरीन कहती हैं कि भारत के लिए यह भयावह समस्या है। इसे दुनिया के सामने लाना होगा।

फिल्म के अलावा उनकी पेंटिंग में बने चेहरे भी बहुत कुछ कहते हैं। फ्रांस में रह रहे पति और अपने दो बेटों और एक बेटी से वह अक्सर दूर रहती हैं।

चार नाती-नातिनों से भी मिलने का मन करता है लेकिन दिगोली और कौसानी जैसे पहाड़ के गांव-कस्बों से भी अब कैथरीन अलग नहीं हो सकतीं।

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