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8वीं में ही दिखने लगे थे जिया उल के जलवे
सलेमपुर/पवन कुमार मिश्र
Updated Wed, 06 Mar 2013 01:56 PM IST
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उस वक्त वह कक्षा आठ का छात्र था ज़िया। अध्यापक रियासत अली छात्रों को गणित पढ़ा रहे थे। उसी बीच एसडीआई स्कूल में जांच के आ गए। क्लास में पहुंचकर एसडीआई ने छात्रों से रेखागणित का सवाल पूछ दिया। अटपटा सवाल सुनकर बहुत सारे छात्र खामोश रहे। लेकिन इसी बीच ज़िया उठा और सवाल का सटीक जवाब देकर सबको चकित कर दिया। ज़िया से प्रभावित एसडीआई ने रजिस्टर में लिखा कि यह प्रतिभाशाली छात्र है। इसका ध्यान रखा जाए।
शहीद डीएसपी जियाउल हक के गुरू रहे मंगराइच निवासी रिटायर शिक्षक रामकृपाल तिवारी और जैतपुरा गांव के रिटायर शिक्षक रियासत अली यह कहकर भावुक हो उठे। जियाउल हक ने खुखुंदू के जूनियर हाईस्कूल से कक्षा छह, सात और आठ की पढ़ाई की। मंगलवार को अमर उजाला ने दोनों गुरुजनों ने ज़िया की बहुत सारी बातें साक्षा की। मंगराइच गांव में अपने घर पर बैठे रामकृपाल तिवारी से जब संवाददाता बात करने पहुंचा तो ज़ियाउल हक का नाम लेते ही वह भावुक हो गए और उनकी आंखों से छलक उठी।
उन्होंने बताया कि ज़ियाउल हक स्कूल के तीन शिक्षकों से बेहद प्रभावित था। जिसमें उसके चाचा हातिम अली, रियासत अली और उनसे। वह उसे हिंदी और संस्कृत पढ़ाते थे। हातिम अली अंग्रेजी और सामाजिक विषय जबकि रियासत अली भूगोल और गणित पढ़ाते थे। उन्होंने बताया कि जियाउल बेहद अनुशासित और सौम्य छात्र था। अन्य बाकी छात्रों की तरह शरारती नहीं था। काफी परिश्रमी और मेधावी था। वहीं गुरु रियासत अली एक वाकया याद करते हुए भावुक हो गए। वह नम आंखों और लड़खड़ाती जुबान से बताते हैं कि कक्षा आठ में वह बच्चों को पढ़ा रहे थे। उसी समय एसडीआई साहब भी पहुंच गए।
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उन्होंने छात्रों से पूछा कि त्रिभुज की दो भुजाओं के मध्य बिंदु को मिलाने वाली रेखा तीसरी भुजा के समानांतर और आधी होती है, इसका विलोम बताओ। उलझाऊं सवाल सुनकर बच्चे खामोश हो गए। इसी बीच ज़ियाउल हक अपने स्थान पर खड़ा हुआ और सटीक जवाब देकर सबको चकित कर दिया। उसका जवाब सुनकर एसडीआई साहब मुस्कुराए बिना नहीं रह सके। उन्होंने उसे शाबासी दी और स्कूल के रजिस्टर में लिखा कि यह छात्र बहुत प्रतिभाशाली छात्र है। इसका ध्यान रखा जाए।
गुरू रामकृपाल तिवारी कहते हैं कि पीपीएस बनने के बाद भी वह काफी सामान्य तरीके से रहता था। सिसई चौराहे पर सब्जी खरीदने वह पैदल आता था। अक्सर मुलाकात होने पर अभिवादन करना कतई नहीं भूलता। इलाहाबाद में तैयारी के दौरान परिजनों की ओर से दिए गए चिट्ठी और घरेलू उपयोग के सामानों लेकर कई बार गया। पांच साल पूर्व जब उसके अफसर बनने की खबर पढ़ी तो खुशी की लहर दौड़ गई और अब शहीद होने की खबर हिलाकर रख दिया है।
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शहीद डीएसपी जियाउल हक के गुरू रहे मंगराइच निवासी रिटायर शिक्षक रामकृपाल तिवारी और जैतपुरा गांव के रिटायर शिक्षक रियासत अली यह कहकर भावुक हो उठे। जियाउल हक ने खुखुंदू के जूनियर हाईस्कूल से कक्षा छह, सात और आठ की पढ़ाई की। मंगलवार को अमर उजाला ने दोनों गुरुजनों ने ज़िया की बहुत सारी बातें साक्षा की। मंगराइच गांव में अपने घर पर बैठे रामकृपाल तिवारी से जब संवाददाता बात करने पहुंचा तो ज़ियाउल हक का नाम लेते ही वह भावुक हो गए और उनकी आंखों से छलक उठी।
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उन्होंने बताया कि ज़ियाउल हक स्कूल के तीन शिक्षकों से बेहद प्रभावित था। जिसमें उसके चाचा हातिम अली, रियासत अली और उनसे। वह उसे हिंदी और संस्कृत पढ़ाते थे। हातिम अली अंग्रेजी और सामाजिक विषय जबकि रियासत अली भूगोल और गणित पढ़ाते थे। उन्होंने बताया कि जियाउल बेहद अनुशासित और सौम्य छात्र था। अन्य बाकी छात्रों की तरह शरारती नहीं था। काफी परिश्रमी और मेधावी था। वहीं गुरु रियासत अली एक वाकया याद करते हुए भावुक हो गए। वह नम आंखों और लड़खड़ाती जुबान से बताते हैं कि कक्षा आठ में वह बच्चों को पढ़ा रहे थे। उसी समय एसडीआई साहब भी पहुंच गए।
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उन्होंने छात्रों से पूछा कि त्रिभुज की दो भुजाओं के मध्य बिंदु को मिलाने वाली रेखा तीसरी भुजा के समानांतर और आधी होती है, इसका विलोम बताओ। उलझाऊं सवाल सुनकर बच्चे खामोश हो गए। इसी बीच ज़ियाउल हक अपने स्थान पर खड़ा हुआ और सटीक जवाब देकर सबको चकित कर दिया। उसका जवाब सुनकर एसडीआई साहब मुस्कुराए बिना नहीं रह सके। उन्होंने उसे शाबासी दी और स्कूल के रजिस्टर में लिखा कि यह छात्र बहुत प्रतिभाशाली छात्र है। इसका ध्यान रखा जाए।
गुरू रामकृपाल तिवारी कहते हैं कि पीपीएस बनने के बाद भी वह काफी सामान्य तरीके से रहता था। सिसई चौराहे पर सब्जी खरीदने वह पैदल आता था। अक्सर मुलाकात होने पर अभिवादन करना कतई नहीं भूलता। इलाहाबाद में तैयारी के दौरान परिजनों की ओर से दिए गए चिट्ठी और घरेलू उपयोग के सामानों लेकर कई बार गया। पांच साल पूर्व जब उसके अफसर बनने की खबर पढ़ी तो खुशी की लहर दौड़ गई और अब शहीद होने की खबर हिलाकर रख दिया है।