बदायूं: यहां के थानों में चलता है यादव राज
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पुलिस के आला अफसरों की मजबूरी कहें या फिर सत्ताधारियों का दबदबा, बदायूं जिले के आधे थाने यादव थानेदारों के कब्जे में हैं। अधिकतर चौकियां भी इसी जाति के दरोगाओं के हवाले हैं। बदायूं ही क्यों बरेली मंडल के दूसरे जिलों में भी इस बिरादरी के थानेदार कम नहीं हैं।
मंडल के 88 थानों में से 24 पर यादवों की तैनाती है। जिन थानों में गैर बिरादरी के थाना प्रभारी हैं वहां भी यादव दरोगा और सिपाही उन थाना प्रभारियों पर हावी हैं। यही वजह है कि थानों में आने वाले फरियादियों से उनकी जाति पूछकर तय होता है कि उनकी शिकायत पर क्या कार्रवाई होगी।
दूसरा पक्ष यादव है तो उसके खिलाफ कार्रवाई करना मुश्किल हो जाता है।
बदायूं के आधे थानों में यादव प्रभारी
मंडल के बदायूं जिले में महिला थाना को मिलाकर कुल 22 थाने हैं। इनमें से 11 थानों में यादव बिरादरी के थाना प्रभारी हैं। नेताओं की मेहरबानी से उप निरीक्षकों को चार्ज दे रखा है। अधिकतर चौकियों पर ही यादव बिरादरी के दरोगा ही काबिज हैं। बरेली जिले में 29 थाने, कोतवाली हैं।
इनमें से भमोरा में जवाहर लाल यादव, फतेहगंज पूर्वी कमल सिंह यादव, अलीगंज थाने में अखिलेश यादव, भुता में राजवीर सिंह यादव, भोजीपुरा में सिकंदर यादव पांच की तैनाती है। चार में मुस्लिम थाना प्रभारी हैं।
पीलीभीत के 14 थानों में से चार में यादव बिरादारी के थाना प्रभारी नियुक्त हैं। शाहजहांपुर के 23 थानों में पांच महत्वपूर्ण थानों के प्रभारी यादव बिरादरी के थानाध्यक्ष और इंस्पेक्टर हैं। बरेली कोतवाली में रेलवे के लोको पायलट के बेटे दीपक यादव की पुलिस हिरासत में मौत के जिम्मेदार इंस्पेक्टर वीरेंद्र सिंह यादव शाहजहांपुर की कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक हैं। यहां तीन मुस्लिम और दो अनुसूचित जाति के थानाध्यक्ष हैं।
महत्वपूर्ण पुलिस चौकियों पर यादवों का कब्जा
हाइवे की चौकियों पर भी यादव ही यादव मंडल के चारों जिलों की मलाईदार चौकियों पर यादव बिरादरी के दरोगा और सिपाहियों का कब्जा है। बदायूं में यादवों के वर्चस्व का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जिले की महत्वपूर्ण पुलिस चौकियों में से एक कछला पुलिस चौकी पर इंचार्ज समेत दस पुलिस कर्मी तैनात हैं और इनमें से नौ यादव हैं।
बदायूं जिले के 22 थानों और कोतवाली में से एक में भी एससी-एसटी कोटे का इंचार्ज नहीं है। महकमे के लोग कहते हैं कि फोर्स में यादव, जाटव और जाट बिरादरी की हमेशा से बहुलता रही है। सरकार के हिसाब से इन्हें कभी अच्छे थाने-चौकी पर पोस्टिंग मिलती है तो कभी सजा बतौर दुर्गम इलाकों में। कर्तव्यनिष्ठा और ईमानदारी की इसमें कोई भूमिका नहीं होती। बदायूं जिले में करीब सवा नौ सौ सिपाही और हेड हैं। इनमें करीब पौने दो सौ महिला आरक्षी भी शामिल हैं। विभागीय सूत्रों के मुताबिक इनमें से करीब तीस फीसदी यादव बिरादरी से ताल्लुक रखते हैं।
बरेली की बात करें तो हाईवे की नकटिया पुलिस चौकी के प्रभारी राकेश यादव हैं और परसाखेड़ा चौकी के प्रभारी जेपी यादव। बैरियर टू चौकी पर भी भारत सिंह यादव और रजऊ चौकी पर रामसिंह यादव तैनाती है। यही हाल बाकी जिलों की महत्वपूर्ण चौकियों का भी है।
यह है लखीमपुर की हकीकत
लोकसभा चुनाव के समय जिले के दस थानों पर यादव जाति के एसओ व निरीक्षक तैनात किए गए थे, लेकिन इनमें दो एसओ को चुनाव आयोग ने पक्षपात का आरोप लगने के बाद हटा दिया था।
मौजूदा समय में सात थाने पर एक ही जाति के एसओ व निरीक्षक तैनात हैं, जो शासन के बेहद करीबी माने जाते हैं और गाहे-बगाहे इसकी झलक भी देखने को मिल जाती है। इसी तरह जिले की 44 पुलिस चौकियों में करीब 20 चौकियों पर एक ही जाति के दरोगाओं की तैनाती है।