'अखिलेश सरकार के रहने तक नहीं दर्ज होगी रेप की रिपोर्ट'
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बरेली मंडल के आयुक्त के रविंद्र नायक बुधवार को संवेदना जताने कटरा सआदतगंज में पीड़ित परिवार के घर पहुंचे तो पीड़ित परिवार से ज्यादा परेशानियां दूसरे गांवों के लोगों ने गिना डालीं।
एक महिला ने तो कमिश्नर के अलावा एसएसपी की पेशानी पर बल भी डाल दिए। पीड़ित परिवार से पांच से सात मिनट की बातचीत के दौरान दोनों भाइयों ने रोते हुए अपनी पीड़ा बताई। परिवार की महिलाओं ने भी वही बातें दोहराईं, जिन्हें वे घटना के बाद आने वाले नेताओं और अफसरों से कहती रही हैं।
एसएसपी अतुल सक्सेना ने पूछा कि आप इसी गांव में रहती हैं क्या? तब महिला ने बताया कि पड़ोस के गांव भकरोली में रहती है। यहां की घटना के बाद उसे न्याय की उम्मीद बढ़ी तो वह चली आई। फिर उसने अफसरों को एक तहरीर सौंपी। इसके मुताबिक उसका पति हरिद्वार में नौकरी करता है। जब वह घर पर अकेली थी तो दूसरे गांव के दबंगों ने उसके साथ दुराचार की कोशिश की। वह चिल्लाई तो पड़ोसी निकल आए और उसकी इज्जत बच गई। तहरीर पर कोई तारीख नहीं थी।
एसएसपी ने पूछा कि कब की घटना है, महिला बोली- 2013 की। हतप्रभ कमिश्नर ने जानना चाहा कि एक साल बाद आप शिकायत क्यों कर रही हैं? महिला ने बताया कि वह कई बार थाने गई लेकिन रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई। दबंग कहते हैं कि जब तक उनकी सरकार है, रिपोर्ट नहीं लिखी जाएगी। अधिकारियों ने महिला को कार्रवाई का आश्वासन देकर तहरीर रख ली। यहां कई अन्य महिलाओं ने भी अधिकारियों को इसी तरह की शिकायत की।
'ओबीसी मतलब मोदी कास्ट'
जापान की महिला पत्रकार ने अफसरों से पूछा कि दलितों पर जुल्म आखिर कब तक होता रहेगा? इस पर प्रभारी डीएम उदयराज सिंह ने बताया कि वादी और प्रतिवादी पक्ष दोनों ही पिछड़ी जाति के हैं, दलित कोई नहीं है। समझाने के लिए एसएसपी ने कहा कि सब ओबीसी कास्ट के हैं। महिला पत्रकार ने कैमरा उधर करते हुए कहा कि ओबीसी मतलब मोदी कास्ट। मोदी भी ओबीसी के हैं न। इस पर अफसर हैरान रह गए।
कमिश्नर ने समझाया कि ऐसा नहीं है, ओबीसी में कई कास्ट आती हैं। कहा, वह यहां पीड़ित पक्ष को दिलासा देने आए हैं। आप को बाद में इत्मीनान से समझा देंगे।
महिला पत्रकार ने अफसरों को बताया कि पीड़ित परिवारों को धमकाया जा रहा है। अफसरों ने घरवालों से पूछा कि घर पर तो सुरक्षा लगी है, कोई मोबाइल से कॉल कर रहा हो तो नंबर बताओ? इस पर परिवार के साथ समूह में बैठी एक महिला काफी नाराज हो गई। उसने एक जाति विशेष का जिक्र करते हुए कहा कि जब तक यह सरकार रहेगी, हमें धमकियां मिलती रहेंगी। कहा, अभी भी भकरोली चौराहे से गुजरते हुए लोग धमकियां दे रहे थे।
कटरी के नौ में से छह एसओ यादव
बदायूं जिले के कटरी क्षेत्र के थानों में जाति विशेष के थानेदारों की तैनाती के पीछे कोई न कोई राज तो है ही। गुंडई, दबंगई और बदमाशी के लिए बदनाम जिले के कटरी इलाके में कभी अपहरण उद्योग चलता था। जिले में गंगा और रामगंगा की कटरी में कलुआ, नरेशा धीमर, रानी ठाकुर, जोगराज जोगिया, विश्राम सिंह, रामफल भगत जैसे दस्यु गिरोहों का आतंक रहा है। जिले के नौ थाने ऐसे हैं, जो गंगा और रामगंगा की कटरी से जुड़े हुए हैं। कटरा सआदतगंज कांड के बाद कटरी एक बार फिर सुर्खियों में है।
जिले में कुल 22 थानों में से 11 थानों में यादव बिरादरी के थानेदार हैं और कटरी के नौ में से छह थानों में जाति विशेष के ही थानेदार हैं। कटरा सआदतगंज कांड के बाद पुलिसिंग का ये स्याह पहलू सामने आने के बाद हुक्मरान इसमें सुधार करने लगे हैं। आरोप लगने पर उसहैत से गंगा सिंह यादव को हटाकर उनकी जगह पर जिस दरोगा को चार्ज दिया गया है, वह गैर यादव हैं। कटरा सआदतगंज चौकी पर तैनात नए स्टाफ में एक भी यादव बिरादरी का नहीं है। वारदात होने तक इस चौकी पर भी दीवान छत्रपाल के अलावा बाकी पूरा स्टाफ यादव बिरादरी का ही था।