बच्चों के मां-बाप हो जाएं सावधान! पढ़ें यह खबर
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इस वर्ष 24 जनवरी को कड़ाके की सर्दी में कंपकंपाते महाराष्ट्र के तादंडवाडी निवासी किशोर सुमित कुमार को देख झांसी रेलवे स्टेशन पर तैनात जीआरपी के जवान का माथा ठनका। पूछताछ की तो वह रोने लगा।
दरअसल, मां की डांट से क्षुब्ध होकर घर से भाग निकला था। झांसी में ट्रेन रुकी तो भूख मिटाने के लिए वह ट्रेन से नीचे उतरा। इसी बीच ट्रेन चल पड़ी और वह यहीं छूट गया।
इसी तरह, बीते नौ मई को नई दिल्ली के सरकोजी निवासी संगीता व उसकी दो सहेलियां स्टेशन पर रोती हुईं मिलीं। प्लेटफार्म पर मौजूद कुछ लोगों ने एक युवक को इन किशोरियों के पास मंडराते देखा तो उन्हें संदेह हुआ। जीआरपी को सूचना मिली तो जवानों ने इन तीनों किशोरियों को अपने कब्जे में लेकर पूछताछ शुरू की। संगीता ने बताया कि पिता ने डांटा था। गुस्से में घर छोड़ कर चेन्नईमें रहने वाली बहन के पास जा रही थी। उसकी दोनों सहेलियां भी उसके साथ चल पड़ीं।
पढ़ाई या मां-बाप की डांट से झुब्ध बच्चे
वर्ष 2014 में अब तक ऐसे 47 बच्चे जीआरपी तक पहुंचे हैं, जो विभिन्न वजहों से बगैर सोचे समझे घर छोड़ कर अनजानी डगर पर निकल पड़े थे। इनमें से अधिकतर बच्चे गलत हाथों में पड़ते-पड़ते बचे। बाद में जीआरपी ने उन्हें उनके ठिकाने तक पहुंचाया।
इसी तरह, 2013 में ऐसे 94 बच्चों को जीआरपी ने फिर से उनके आशियाने में पहुंचाने का काम किया था। रेलवे स्टेशन पर बरामद अधिकतर बच्चों की कहानी एक जैसी ही निकली। इनमें कई बच्चे घर से पढ़ाई से बचने या माता- पिता की डांट से क्षुब्ध होकर निकले थे तो कई गलत संगत में पड़ने और गरीबी से तंग आकर घर से भाग पड़े थे।
जीआरपी इंस्पेक्टर एन एस सेंगर ने बताया कि जवानों के अलावा चेतना संस्था के कार्यकर्ता ऐसे बच्चों को बरामद करने में अच्छी भूमिका निभा रहे हैं। उनके मुताबिक घर तक वापस लौटने वाले कुछ ही सौभाग्यशाली बच्चे होते हैं। अनेक बच्चे ऐसे होते हैं जिनकी जिंदगी लावारिसों की तरह गुजरती है।