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गाजियाबाद के एसएसपी की गिरफ्तारी का आदेश
अमर उजाला, इलाहाबाद
Updated Sat, 05 Oct 2013 12:12 AM IST
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उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट में व्यक्तिगत रूप से हाजिर होने के आदेश की अनदेखी कर अपने मातहत को कोर्ट में भेजना एसएसपी गाजियाबाद को भारी पड़ गया।
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कोर्ट ने मामले को बेहद गंभीरता से लेते हुए एसएसपी गाजियाबाद, सिहनी गेट थानाध्यक्ष, सब इंस्पेक्टर और सिपाहियों के खिलाफ गिरफ्तारी का वारंट जारी करने का आदेश दिया है।
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कोर्ट ने सीजेएम गाजियाबाद को निर्देश दिया है कि आदेश की प्रति फैक्स से प्राप्त होते ही तत्काल उपरोक्त अधिकारियों को गिरफ्तार कर इस न्यायालय में पेश किया जाए। कोर्ट ने 23 अक्तूबर को प्रकरण की सुनवाई के दौरान डीजीपी को भी उपस्थित रहने का निर्देश दिया है।
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गाजियाबाद के महेंद्र पाल की आपराधिक अपील पर सुनवाई कर रही न्यायमूर्ति डीडी झा और न्यायमूर्ति पंकज नकवी की खंडपीठ ने एसएसपी गाजियाबाद को 30 सितंबर को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया था।
यह भी कहा था कि यदि उस दिन उनकी बेंच नहीं बैठती है तो किसी दूसरी बेंच के सामने उपस्थित हो सकते हैं। इस आदेश का अनुपालन करने के बजाए एसएसपी ने एसपी यातायात किरन यादव को अपने स्थान पर भेज दिया।
उस दिन न्यायमूर्ति डीडी झा की बेंच मौजूद नहीं थी। एसपी यातायात दूसरी बेंच के समक्ष उपस्थित हुईं और बिना किसी लिखित प्रार्थनापत्र के अगली तारीख के लिए अपनी हाजिरी से माफी प्राप्त कर ली।
जिस बेंच के समक्ष पेशी हुई, वहां से एसएसपी गाजियाबाद सहित एसओ सिहनी गेट और सब इंस्पेक्टर तथा कांस्टेबलों को भी अगली तारीख पर उपस्थिति से माफी प्रदान कर दी गई। इस पर कड़ी नाराजगी जाहिर करते हुए न्यायमूर्ति डीडी झा की पीठ ने कहा कि बिना व्यक्तिगत रूप से हाजिर हुए और लिखित प्रार्थनापत्र के अगली तारीख पर उपस्थित होने से छूट नहीं दी जा सकती है।
झूठा हलफनामा देने पर तलब थे एसएसपी
हाईकोर्ट ने एसएसपी गाजियाबाद और अन्य पुलिसकर्मियों को कोर्ट में झूठा हलफनामा देने और गुमराह करने के मामले में व्यक्तिगत तौर पर तलब किया था। याची महेंद्र पाल की अपील पर कोर्ट ने विपक्षियों की गिरफ्तारी का वारंट सीजेएम गाजियाबाद के मार्फत जारी करने और उनकी गिरफ्तारी का आदेश दिया था।
पुलिस ने सीजेएम के वारंट पर बिना कोई गिरफ्तारी किए बता दिया कि अभियुक्तगण बताए गए पते पर नहीं रहते हैं। बाद में उसी पते से अभियुक्तों की गिरफ्तारी भी कर ली गई। किसी ने इस बात पर विवाद नहीं किया कि वारंट में दिया पता गलत था।
हाईकोर्ट ने पुलिस की करतूत को गंभीरता से लेते हुए एसएसपी सहित अन्य लोगों को 30 सितंबर को तलब किया था।