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लिंगायत समुदाय के आस्था के केंद्र जंगमबाड़ी मठ के इस महत्व को नहीं जानते होंगे आप

Sun, 16 Feb 2020 07:39 PM IST
स्‍वाधीन तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: स्‍वाधीन तिवारी Updated Sun, 16 Feb 2020 07:39 PM IST
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You will not know this importance of Jangambadi Math
जंगमबाड़ी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। - फोटो : अमर उजाला।

जंगमबाड़ी का अर्थ है शिव को जानने वालों का स्थान। जंगमों का स्थान बहुत ऊंचा माना जाता है, जिनका कर्त्तव्य धर्म का प्रचार करना है। काशी का जंगमबाड़ी मठ दरअसल वीर शैव मत की पांच पीठों में से प्रमुख विश्वाराध्य पीठ है। यह वीर शैव संप्रदाय का प्रमुख केंद्र है।

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वीर शैव मत के मुताबिक शिव के अंश अवतार माने जाने वाले विश्वाराध्य जी ने इस मठ की स्थापना की थी। यहां उनका ज्ञानपीठ भी है। लगभग 50 हजार वर्ग फीट क्षेत्रफल में बसे इस मठ में असंख्य शिवलिंग स्थापित हैं। उनमें नीलम, पारद आदि के शिवलिंग भी हैं। लिंग को शिव का प्रतिरूप माना जाता है। ऐसे में भक्त मठ में शिव लिंगों की स्थापना करते हैं। वीर शैव के लिए शाकाहारी होना जरूरी है। मांस, मद्य और परस्त्रीगमन का निषेध है।

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इस मठ में पुस्तकालय और गुरुकुल भी हैं। यहां तमाम दुर्लभ पुस्तकें और पांडुलिपियां संग्रहीत हैं। साथ ही यह मठ उच्च शिक्षा के लिए विद्यार्थियों की मदद भी करता है। जगद्गुरु विश्वाराध्य की इस पीठ के परिसर में दरबार हाल, हरिश्वर मंदिर, जन मंदिर, पुस्तकालय, भक्त निवास, शोभा मंडल आदि हैं। वीर शैव की सभ्यता को द्रविड़ सभ्यता कहा जाता है। इतिहासकारों के मुताबिक 1700 ईसा पूर्व में वीर शैव मत अफगानिस्तान, कश्मीर, पंजाब और हरियाणा में बस गए। वीर शैव के मुताबिक शिव ही परम तत्व, परम ज्ञान है और लिंग उसका साकार रूप है।

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महाशिवरात्रि उत्सव यहां धूमधाम से मनाया जाता है और विश्वाराध्य की झांकी निकलती है जिसका रथ खींचते हुए भक्त दशाश्वमेध घाट तक जाते हैं। यह मठ हिंदू-मुस्लिम एकता का भी केंद्र रहा है। मुस्लिम शासकों ने इस मठ को जमीन दान में दी है।



अकबर ने 480 बीघा जमीन मठ को दान में दी थी, इसका दानपत्र मंदिर में है। हुमायूं ने भी 300 बीघा जमीन दी थी। औरगंजेब के हस्ताक्षर वाला पत्र यहां संरक्षित है। काशी के राजा ने भी मठ को दान दिया था। मठ में कई गुरुओं की समाधियां हैं।

 

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