World Brain Tumor Day: वरुणा के किनारे रहने वालों में ब्रेन ट्यूमर का खतरा ज्यादा, बीएचयू अस्पताल में चल रहा 7 मरीजों का इलाज
बीएचयू के न्यूरोलॉजी विभाग के प्रो. विजयनाथ मिश्र का कहना है कि पिछले पांच वर्षों में वरुणा संगम के इलाके राजघाट, भैंसासुर घाट, सरायमोहाना, राजेपुर, तातेपुर में रहने वालों में ब्रेन ट्यूमर होने का खतरा बढ़ा है।
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वाराणसी स्थित वरुणा संगम में नदी किनारे रहने वाले लोगों में ब्रेन ट्यूमर का खतरा बढ़ता जा रहा है। इसकी वजह संगम के पास गंगा जल में मिलने वाली धातुओं में प्रदूषण की मात्रा का अधिक होना है। आईएमएस बीएचयू के न्यूरोलॉजी विभाग में इस समय संगम किनारे रहने वाले ब्रेन ट्यूमर से ग्रसित सात लोगों का इलाज भी चल रहा है। ये मरीज ऐसे हैं, जो नदी के जल का नियमित उपयोग करते थे। विभाग की टीम इलाज के साथ ही इनकी लगातार मॉनीटरिंग कर रही है।
ब्रेन ट्यूमर के बचाव और उसके रोकथाम के बारे में जागरूकता के उद्देश्य से ही हर साल आठ जून को विश्व ब्रेन ट्यूमर दिवस मनाया जाता है। यह एक ऐसी बीमारी है, जो जेनेटिक भी है। बीएचयू के न्यूरोलॉजी विभाग के प्रो. विजयनाथ मिश्र का कहना है कि पिछले पांच वर्षों में वरुणा संगम के इलाके राजघाट, भैंसासुर घाट, सरायमोहाना, राजेपुर, तातेपुर में रहने वालों में ब्रेन ट्यूमर होने का खतरा बढ़ा है।
इस समय जिन सात मरीजों का इलाज चल रहा है, उसमें दो नाविक परिवार, दो ग्रामीण और एक प्रवासी और एक घाट पर रोजगार करने वाले हैं। इन मरीजों में पाया गया कि गंगा के जल का नियमित प्रयोग करते थे। इस क्षेत्र में गंगा के जल में धातुओं की मात्रा अधिक पाई गई है।
इसमें क्रोमियम, निकिल, एल्युमुनियम, मरकरी अधिक है। केवल जल ही नहीं सिल्ट में भी इन धातुओं की मात्रा अधिक है। यहीं नहीं मछलियों में भी धातुओं का स्तर अधिक है। प्रो. मिश्रा के अनुसार यह शोध का विषय है कि प्रदूषण से भी ब्रेन टयूमर अधिक हो रहा है। आज भी विश्व में दस से 15 प्रतिशत ब्रेन ट्यूमर केस के पीछे धातुओं का प्रदूषण है। ब्रेन ट्यूमर अब लाइलाज नहीं है, इससे निराश होने की जरूरत नहीं है। समय से इसका इलाज कराना चाहिए।