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Varanasi News: बाल सर्जरी विभाग में वार्ड के गेट पर इलेक्टि्रक पैनल पर तारों का जंजाल

Sun, 17 Nov 2024 12:15 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 17 Nov 2024 12:15 AM IST
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Wire mesh on the electric panel at the gate of the ward in the pediatric surgery department.
अमर उजाला पड़ताल
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झांसी मेडिकल कॉलेज की घटना के बाद बीएचयू अस्पताल में नहीं दिखी कोई सतर्कता
बाल रोग विभाग की बिल्डिंग के अंदर से बाहर तक खुले तार से हो सकती है बड़ी दुघर्टना
माई सिटी रिपोर्टर
वाराणसी। बीएचयू अस्पताल के बाल रोग विभाग में वार्ड के गेट पर लगे इलेक्टि्रक पैनल पर तारों का झुंड खुला है। इसके अलावा बाल सर्जरी विभाग में पहले तल पर बने वार्ड के गेट के बाहर हर ओर तार लटक रहे हैं। नीचे लगे पर भी तार खुले दिख रहे हैं। झांसी स्थित मेडिकल कॉलेज में शुक्रवार की देर रात एनआईसीयू में आग लगने और नवजातों की मौत के बाद शनिवार को अमर उजाला की पड़ताल में बीएचयू अस्पताल में कुछ ऐसा ही दृश्य नजर आया।
जिस तरह की व्यवस्था यहां वर्तमान में हैं, उससे कभी भी शॉर्ट सर्किट जैसी घटना का खतरा हो सकता है। बीएचयू अस्पताल परिसर में सीटी स्कैन सेंटर के ठीक सामने बाल रोग विभाग और बाल सर्जरी विभाग बना है। इसमें बच्चों और किशोरों को भर्ती कर उनका इलाज किया जा रहा है। बाल रोग विभाग के पहले तल पर ही पीआईसीयू और एसएनसीयू भी बनाया गया है, इसमें गंभीर बच्चे भर्ती होते हैं।
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शनिवार को दोपहर करीब एक बजे कुछ लोग बच्चों को लेकर डॉक्टर को दिखाने जा रहे थे, वार्ड में भर्ती बच्चों के परिजन भी इधर-उधर बैठे रहे। विभाग में गेट के अंदर घुसने पर ओपीडी जाने वाले गलियारे के ऊपर भी कई जगहों पर तार लटकते रहे। यहीं पर पहले मंजिल पर वार्ड के बाहर इलेक्टि्रक पैनल के ठीक बगल में मरीजों के परिजनों के बैठने के लिए बेंच रखा है। पैनल के ऊपर तार भी पूरी तरह से खुले हैं। इसके सामने से ही लोग बच्चों को लेकर अंदर अन्य वार्डों में भी आते-जाते नजर आए। बाल सर्जरी विभाग के पहले मंजिल पर बने वार्ड के गेट पर तो जिधर देखिए जैसे-तैसे तार ही लटक रहे थे। अगर कोई शॉर्ट सर्किट की घटना हो जाए, तो तारों के झुंड से समस्या बढ़ सकती है।
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निदेशक ने जानी व्यवस्था, बोले-जल्द दूर होगी समस्या
झांसी मेडिकल कॉलेज में आग लगने की घटना के बाद आईएमएस बीएचयू प्रशासन ने व्यवस्थाओं की जानकारी ली। निदेशक प्रो. एसएन संखवार का कहना है कि अस्पताल में आग से बचाव के जो भी उपकरण हैं, उसकी नए सिरे से मॉनिटरिंग करवाई जाएगी। बाल रोग विभाग के अध्यक्ष प्रो. अंकुर सिंह से विभाग में लगे इलेक्टि्रक उपकरणों के प्रयोग, आग लगने पर बचाव के उपाय के बारे में बातचीत की गई। साथ ही नए सिरे से सभी सुविधाओं की मॉनिटरिंग करने को कहा गया।
मानक पर फेल है बीएचयू अस्पताल की पुरानी बिल्डिंग, स्वामी विवेकानंद अस्पताल
अस्पतालों में आग से बचाव के उपाय, अग्निशमन यंत्रों के काम करने सहित अन्य मामलों को लेकर अग्निशमन विभाग की ओर से फायर सेफ्टी ऑडिट की जाती है। इस मामले में मुख्य अग्निशमन अधिकारी आनंद सिंह राजपूत ने बताया कि बीएचयू अस्पताल की पुरानी बिल्डिंग और स्वामी विवेकानंद अस्पताल में आग लगने से बचाव के उपायों के जो मानक हैं, वो फेल हैं। दीनदयाल उपाध्याय जिला अस्पताल, मंडलीय अस्पताल कबीरचौरा, बीएचयू ट्रॉमा सेंटर, महामना कैंसर संस्थान, जिला महिला अस्पताल कबीरचौरा, शास्त्री अस्पताल रामनगर, ईएसआईसी अस्पताल में सभी मानक पूरे हैं। समय-समय पर निजी और सरकारी अस्पतालों की फायर सेफ्टी ऑडिट कराई जाती रहती है।


ये हैं मानक
अस्पताल में अग्निशमन यंत्र लगे हों और ठीक स्थिति में हों। समय-समय पर मॉक डि्रल होती रहे। बिजली के तार कटे न हों और वायरिंग सुरक्षित हो। यंत्र और उपकरण आउटडेटेड न हों। प्रवेश और निकास के लिए अलग-अलग और पर्याप्त चौड़े रास्ते हों।
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