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क्या हादसे के बाद ही चेतेंगे

Mon, 04 Apr 2016 01:18 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला वाराणसी
ब्यूरो/अमर उजाला वाराणसी Updated Mon, 04 Apr 2016 01:18 AM IST
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What happened after Chetenge
धूल से हांफ रहे राहगीर
चौकाघाट से लहरतारा तक  निर्माणाधीन फ्लाईओवर में सुरक्षा मानकों की अनदेखी के साथ ही अब धूल और धुएं ने राहगीरों को परेशान कर दिया है। दिन हो या रात, वाहनों की आवाजाही के बीच लगातार उड़ती धूल मुसीबत का सबब बन गई है। मालगोदाम कैंट के पास जीटी रोड पर गड्ढा खोदने, सड़क खराब होने, बगल में कूड़ा जमा होने और सीवर बहने से हालात और बदतर हो गए हैं। रोजाना जाम लगने के साथ ही धूल और धुएं के बीच कब हादसा हो जाए कोई ठीक नहीं रह गया है। धूल और धुएं से श्वासं और फेफड़े की बीमारियां बढ़ रही हैं। बावजूद इसके सेतु निगम के अधिकारी आंखें मूंदे बैठे हैं।
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कार्यस्थल पर सुरक्षा घेरा के लिए लोहे की बैरिकेडिंग को इस तरह बेतरतीब तरीके से आड़े-तिरछे रखा गया है कि उससे सहूलियत की जगह एक और मुसीबत खड़ी हो गई है। चौकाघाट से लहरतारा स्थित रेलवे कैंसर हास्पिटल तक करीब 1700 मीटर लंबे फ्लाईओवर का निर्माण तय समय पर कराने के लिए अंधरापुल के साथ ही दूसरे छोर लहरतारा से भी काम सेतु निगम करा रहा है। दिसंबर 2017 तक इसे तैयार करने का लक्ष्य तय किया गया है लेकिन निर्माण कार्य में सुरक्षा मानकों की अनदेखी से हर कोई परेशान है।
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व्यस्त रूट होने के बावजूद कार्यस्थल पर न ठीक से बैरिकेडिंग कराई गई है और न ही सर्विस रोड दुरुस्त है। धूल न उड़ने पाए, इसके लिए पानी का छिड़काव तक नहीं कराया जा रहा है। धूल और धुएं के बीच जाम में फंसकर राहगीर रोजाना त्रस्त हो रहे हैं लेकिन सेतु निगम को किसी की कोई परवाह नहीं रह गई है।
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