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'हम वो हैं जो तेरे चेहरे से दिखाई देंगे...'

Tue, 20 Dec 2016 02:23 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी Updated Tue, 20 Dec 2016 02:23 AM IST
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"We will show them that your face ..."
काव्य पाठ करते पद्मभूषण गोपाल दास नीरज। साथ्‍ा बैठे अशोक चक्रधर (बाएं से दूसरे)।

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गीतों के राजकुमार कहे जाने वाले पद्मभूषण गोपाल दास नीरज भले 93 साल के हो गए हों, लेकिन उनकी सांसों की दमकशी और आवाज की खनक अभी वैसी ही है। सोमवार की रात वह ह्वील चेयर पर जब बीएचयू के स्वतंत्रता भवन में दाखिल हुए तो बॉलकनी से लेकर मुख्य हाल की दर्शक दीर्घा में तालियों की बौछार के साथ हर हरह महादेव के उद्घोष गूंजने लगे। चिरपरिचित अंदाज में नीरज ने दोहों से शुरुआत की और गीतों की गुनगुनाहट से सर्द रात में गरमाहट का एहसास करा दिया। मौका था बीएचयू के राष्ट्रीय संस्कृति महोत्सव के तहत आयोजित अखिल भारतीय कविसम्मेलन का। इस मंच पर जाने माने गजलकार वसीम बरेलवी और अंजुम रहबर के गीतों-गजलों पर जहां तालियों की गड़गड़ाहट गूंजती रही, वहीं अशोक चक्रधर के व्यंग पर लोग हंसते-हंसते लोटपोट हो गए।


नीरज की हर सांस में कविता थी। गुनगुनाते गीत थे। अस्वस्थता के चलते शुरुआती दौर में ही उन्होंने माइक संभाल लिया। वो सीधे कविता लेकर आए-मेरी डोली को देख के हंसने वाले/मेरी दुल्हन को
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देख/लौटती बारात को न देख...। उन्होंने बताया कि आत्मा के सौंदर्य का शब्द रूप काव्य है। दोहा पढ़ा- तन से भारी सांस है इसे समझ लो खूब/ मुर्दा जल में तैरता जिंदा जाता डूब...। हर धर्म के आदेश को माना मैंने/ हम कुछ नहीं जानते ये जाना मैंने...। इनके बाद अनिल चौबे ने अपने हास्य-व्यंग से खूब तालियां बटोरीं। इनके बाद बारी आई विष्णु सक्सेना की। उन्होंने गजल की पंक्तियां पढ़ीं- प्यास बुझ जाए तो शबनम खरीद सकता हूं/जख्म मिल जाए तो मरहम खरीद सकता हूं/ये मानता हूं मैं दौलत नहीं कमा पाया/मगर तुम्हारा हर एक गम खरीद सकता हूं..। इसके बाद उन्होंने गीत पढ़ा- चांदनी रात में रंग ले हाथ में जिंदगी को नया मोड़ दे/ तुम हमारी कसम तोड़ दो हम तुम्हारी कसम तोड़ दें...।
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इनके बाद वसीम बरेलवी ने शेर पढ़ा- वो मेरे चेहरे तक अपनी नफरत लाया तो था/मैंने उसके हाथ चूमें और वेबस कर दिया...। अगली गजल सुनाई - तू समझता है कि रिश्तों की दुहाई देंगे/हम तो वो हैं जो तेरे चेहरे से दिखाई देंगे/हमको महसूस किया जाए खुशबू की तरह/हम कोई शोर नहीं जो सुनाई देंगे...। इनके अलावा आलोक श्रीवास्तव, व्यंगकार सर्वेश अस्थाना, शिव कुमार व्यास, कमलेश मौर्य, सांड़ बनारसी ने कविताएं पढ़ीं। कश्मीर, पाकिस्तान के अलावा जेएनयू, बीएचयू के नारों से लेकर सर्जिकल स्ट्राइक और नोटबंदी पर भी कविताएं पढ़ी गईं। इस दौरान कई बार स्वतंत्रता भवन मोदी-मोदी के शोर से गूंजता रहा।
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