विकास दुबे मामला: कानपुर के प्रभात एनकाउंटर पर मानवाधिकार आयोग ने डीजीपी और डीएम-एसएसपी से तलब की रिपोर्ट
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कानपुर के बिकरू कांड के बाद पुलिस ने प्रभात मिश्र उर्फ कार्तिकेय को दहशतगर्द विकास दुबे के गिरोह का बदमाश बताया था। फरीदाबाद से कानपुर लाते समय पुलिस मुठभेड़ में प्रभात मारा गया था। बाद में जांच में सामने आया कि प्रभात नाबालिग था।
इसे लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने उत्तर प्रदेश के डीजीपी और कानपुर के डीएम-एसएसपी से प्रभात की पोस्टमार्टम रिपोर्ट, बैलिस्टिक रिपोर्ट और इंक्वेस्ट रिपोर्ट तलब की है।
मानवाधिकार मामलों के जानकार वाराणसी निवासी अधिवक्ता अंशुमान त्रिपाठी ने मंगलवार को 'अमर उजाला' से बताया कि उन्होंने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में शिकायत दर्ज कराई थी। विकास दुबे गैंग का बदमाश बताकर एसटीएफ व पुलिस की टीम ने प्रभात मिश्र नामक 16 वर्षीय किशोर का एनकाउंटर पनकी, कानपुर के पास किया था।
पुलिस का कहना था कि प्रभात हथकड़ी पहन कर कस्टडी से भाग रहा था। जबकि, प्रभात को पुलिस ने फरीदाबाद से गिरफ्तार किया था। अधिवक्ता का आरोप है कि डीके बसु और जोगिंदर कुमार के प्रकरण में उच्चतम न्यायालय द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन पुलिस ने नहीं किया है। इसलिए उनकी शिकायत पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने उत्तर प्रदेश के डीजीपी और कानपुर के डीएम-एसएसपी को चार हफ्ते में रिपोर्ट देने को कहा है।
ये होती है बैलिस्टिक रिपोर्ट और इंक्वेस्ट रिपोर्ट :
बैलिस्टिक रिपोर्ट मतलब जो गन चली है, जो गोली उसे लगी है। इंक्वेस्ट (अन्वीक्षा) रिपोर्ट का मतलब, उस न्यायिक जांच को कहते हैं जो किसी व्यक्ति की मृत्यु के कारणों का पता लगाने के लिए की जाती है।