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जीपीआर सर्वे वाला देश का पहला शहर होगा बनारस, बिना खुदाई जानेंगे जमीन से 50 फुट नीचे क्या
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Fri, 12 May 2017 10:36 AM IST
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सर्वेयर जनरल ऑफ इंडिया डॉ. स्वर्णा सुब्बाराव
- फोटो : अमर उजाला
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बनारस देश का ऐसा पहला शहर होगा, जहां जीपीआर (ग्राउंड पेनेट्रेटिंग रडार) सर्वे कराया जाएगा। सर्वे की इस अत्याधुनिक तकनीक से बिना खुदाई कराए जमीन से 15 मीटर नीचे तक की सभी जानकारी आसानी से मिल जाएगी। स्मार्ट सिटी और मेट्रो रेल परियोेजना में इससे बड़ी मदद मिलने की संभावना है।
गुरुवार को यहां आए सर्वेयर जनरल ऑफ इंडिया डॉ. स्वर्णा सुब्बाराव ने बताया कि इस बारे में डीएम से बात हो चुकी है। एक से दो महीने के अंदर सर्वे शुरू करा दिया जाएगा।
जमीन के अंदर की स्थिति पता न होने से विकास परियोजनाओं के लिए खुदाई के दौरान खासी दिक्कतें होती हैं। अब जीपीआर सर्वे से बिना खुदाई के न सिर्फ भूमिगत तार और सीवर-पेयजल पाइप लाइन की स्थिति जानी जा सकेगी बल्कि 15 मीटर नीचे तक की सतह की स्थिति, कहीं कोई पुरातात्विक धरोहर तो नहीं दबी है, ऐसी तमाम जानकारियां भी मिल जाएंगी।
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सर्वेयर जनरल ने बताया कि वाराणसी पहला ऐसा शहर होगा, जहां इस तकनीक का इस्तेमाल होगा। काशी की प्राचीनता के हिसाब से यह बहुत जरूरी है कि खुदाई के समय उसकी सभ्यता का ध्यान रखा जाए।
बहुत सारी ऐसी जगहें होती हैं, जहां ऐतिहासिक धरोहरें दबी होती हैं। खुदाई में इनके नष्ट होने का खतरा अधिक रहता है। एक किलोमीटर के जीपीआर सर्वे पर करीब दस हजार रुपये खर्च आता है। इससे किसी तरह का कोई नुकसान नहीं होता है।
एक बार सर्वे होने के बाद मेट्रो परियोजना और स्मार्ट सिटी सहित अन्य विकास परियोजनाओं में इसका लाभ मिलेगा। कुलपति डॉ. पृथ्वीश नाग ने बताया कि काशी में सर्वे आफ इंडिया के इस अभियान से विश्वविद्यालय के भूगोल के छात्रों को भी लाभ होगा।
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गुरुवार को यहां आए सर्वेयर जनरल ऑफ इंडिया डॉ. स्वर्णा सुब्बाराव ने बताया कि इस बारे में डीएम से बात हो चुकी है। एक से दो महीने के अंदर सर्वे शुरू करा दिया जाएगा।
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जमीन के अंदर की स्थिति पता न होने से विकास परियोजनाओं के लिए खुदाई के दौरान खासी दिक्कतें होती हैं। अब जीपीआर सर्वे से बिना खुदाई के न सिर्फ भूमिगत तार और सीवर-पेयजल पाइप लाइन की स्थिति जानी जा सकेगी बल्कि 15 मीटर नीचे तक की सतह की स्थिति, कहीं कोई पुरातात्विक धरोहर तो नहीं दबी है, ऐसी तमाम जानकारियां भी मिल जाएंगी।
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सर्वेयर जनरल ने बताया कि वाराणसी पहला ऐसा शहर होगा, जहां इस तकनीक का इस्तेमाल होगा। काशी की प्राचीनता के हिसाब से यह बहुत जरूरी है कि खुदाई के समय उसकी सभ्यता का ध्यान रखा जाए।
बहुत सारी ऐसी जगहें होती हैं, जहां ऐतिहासिक धरोहरें दबी होती हैं। खुदाई में इनके नष्ट होने का खतरा अधिक रहता है। एक किलोमीटर के जीपीआर सर्वे पर करीब दस हजार रुपये खर्च आता है। इससे किसी तरह का कोई नुकसान नहीं होता है।
एक बार सर्वे होने के बाद मेट्रो परियोजना और स्मार्ट सिटी सहित अन्य विकास परियोजनाओं में इसका लाभ मिलेगा। कुलपति डॉ. पृथ्वीश नाग ने बताया कि काशी में सर्वे आफ इंडिया के इस अभियान से विश्वविद्यालय के भूगोल के छात्रों को भी लाभ होगा।