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रोहिणी में सूर्य के प्रवेश के साथ ही बढ़ जाएगी गर्मी
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वाराणसी। रोहिणी नक्षत्र में सूर्य के प्रवेश के साथ ही गर्मी का प्रकोप बढ़ जाएगा। ज्येष्ठ महीने के शुक्लपक्ष की तृतीया यानि 25 मई को सूर्य नक्षत्र परिवर्तन करेंगे। भगवान भाष्कर कृतिका से निकलकर रोहिणी में प्रवेश करेंगे और आठ जून तक इसी नक्षत्र में रहेंगे। ज्योतिषाचार्य पं. गणेश प्रसाद मिश्र का कहना है कि सूर्य के नक्षत्र परिवर्तन के साथ ही नौतपा शुरू हो जाएगा। नौ दिनों तक लोगों का गर्मी का प्रकोप झेलना पड़ सकता है।
इसकी वजह यह है कि इस दौरान सूर्य की लंबवत किरणें धरती पर पड़ती हैं। लेकिन इस बार शुक्र अस्त होने से इसका प्रभाव कम रहेगा। शुक्र 31 मई को अस्त होंगे, जिससे कि तेज हवा और बारिश के आसार बन रहे हैं। इससे लोगों को गरमी से राहत मिलेगी। ज्योतिषाचार्य के अनुसार 25 मई को सुबह करीब 8.10 पर सूर्यदेव रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। सूर्य जब रोहिणी नक्षत्र में होकर वृष राशि के 10 से 20 अंश तक रहते हैं, तब नौतपा होता है। इस नक्षत्र में सूर्य करीब 15 दिनों तक रहेंगे। शुरुआती नौ दिनों में गर्मी बहुत बढ़ जाती है। इसलिए इन 9 दिनों के समय को ही नौतपा कहा जाता है। ये समय 25 मई से 2 जून तक रहेगा। इसके अलावा ज्येष्ठ महीने के शुक्लपक्ष में चंद्रमा जब आद्रा से स्वाती तक 10 नक्षत्रों में रहता हो तो नौतपा होता है। रोहिणी नक्षत्र के साथ ही बारिश शुरू हो जाती है। इसे रोहिणी नक्षत्र का गलना भी कहा जाता है।
काशी विद्वत परिषद के अध्यक्ष प्रो. रामयत्न शुक्ला ने बताया कि परंपरा के अनुसार नौतपा के दौरान महिलाएं हाथ पैरों में मेहंदी लगाती हैं। मेहंदी की तासीर ठंडी होने से तेज गर्मी से राहत मिलती है। इन दिनों में पानी खूब पिया जाता है और जलदान भी किया जाता है ताकि पानी की कमी से लोग बीमार न हो। इस तेज गर्मी से बचने के लिए दही, मक्खन और दूध का उपयोग ज्यादा किया जाता है। इसके साथ ही नारियल पानी और ठंडक देने वाली दूसरी और भी चीजें खायी जाती हैं।
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इसकी वजह यह है कि इस दौरान सूर्य की लंबवत किरणें धरती पर पड़ती हैं। लेकिन इस बार शुक्र अस्त होने से इसका प्रभाव कम रहेगा। शुक्र 31 मई को अस्त होंगे, जिससे कि तेज हवा और बारिश के आसार बन रहे हैं। इससे लोगों को गरमी से राहत मिलेगी। ज्योतिषाचार्य के अनुसार 25 मई को सुबह करीब 8.10 पर सूर्यदेव रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। सूर्य जब रोहिणी नक्षत्र में होकर वृष राशि के 10 से 20 अंश तक रहते हैं, तब नौतपा होता है। इस नक्षत्र में सूर्य करीब 15 दिनों तक रहेंगे। शुरुआती नौ दिनों में गर्मी बहुत बढ़ जाती है। इसलिए इन 9 दिनों के समय को ही नौतपा कहा जाता है। ये समय 25 मई से 2 जून तक रहेगा। इसके अलावा ज्येष्ठ महीने के शुक्लपक्ष में चंद्रमा जब आद्रा से स्वाती तक 10 नक्षत्रों में रहता हो तो नौतपा होता है। रोहिणी नक्षत्र के साथ ही बारिश शुरू हो जाती है। इसे रोहिणी नक्षत्र का गलना भी कहा जाता है।
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काशी विद्वत परिषद के अध्यक्ष प्रो. रामयत्न शुक्ला ने बताया कि परंपरा के अनुसार नौतपा के दौरान महिलाएं हाथ पैरों में मेहंदी लगाती हैं। मेहंदी की तासीर ठंडी होने से तेज गर्मी से राहत मिलती है। इन दिनों में पानी खूब पिया जाता है और जलदान भी किया जाता है ताकि पानी की कमी से लोग बीमार न हो। इस तेज गर्मी से बचने के लिए दही, मक्खन और दूध का उपयोग ज्यादा किया जाता है। इसके साथ ही नारियल पानी और ठंडक देने वाली दूसरी और भी चीजें खायी जाती हैं।
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