{"_id":"5a687d764f1c1b8f268b616f","slug":"varanasi-these-daughters-are-icon-of-society","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"परिवार का स्वाभिमान और समाज की आइकॉन हैं बनारस की ये बेटियां ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
परिवार का स्वाभिमान और समाज की आइकॉन हैं बनारस की ये बेटियां
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Thu, 25 Jan 2018 03:47 PM IST
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विदेशों तक फैली है इनकी चमक, कर रही हैं देश का नाम
- फोटो : अमर उजाला
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गार्गी, घोषा, मुद्रा, इंद्राणी जैसी विदुषियों की परंपरा और वीरांगना लक्ष्मीबाई की साहस गाथा की अगली पंक्ति हैं ये बेटियां। हालात मुश्किल और परिस्थितियां हर पल परीक्षा लेने को आतुर, लेकिन इन बेटियों ने हार नहीं मानी। अपने हौसले के दम पर साबित किया कि वे किसी से कम नहीं हैं। राष्ट्रीय बालिका दिवस के मौके पर काशी की ऐसी ही बेटियों की सफलता की कहानी आपसे साझा कर रहे हैं। वे बेटियां, जो अपने घर का चिराग हैं, मां-बाप का मान हैं और समाज के लिए आइकॉन हैं। मां पिता ने उन्हें उड़ने को खुला आसमान दिया तो उन्होंने भी अपनी धमक सात समंदर पार तक कायम की।
सरकार और समाज में ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ का नारा खूब गूंज रहा है। जिनको अब भी इसके मायने बताने की जरूरत है, निश्चित रूप से इन बेटियों की कहानी उनका संदेह-संशय दूर कर देगी।
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काशी की काजल सिंह
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बीते शनिवार को राष्ट्रपति के हाथों देश की ‘फर्स्ट लेडीज’ को सम्मानित किया गया। ऐश्वर्या राय समेत 112 ‘फर्स्ट लेडीज’ में काशी की काजल सिंह भी शामिल थीं। काजल सिंह को ये सम्मान देश की पहली ग्राफिटी आर्टिस्ट के तौर पर मिला। डीरेका कैंपस के निवासी केदारनाथ सिंह और अनीता सिंह की इस बेटी की धमक देश में ही नहीं बल्कि विदेशों तक है। ग्राफिटी (भित्ती चित्र) और स्ट्रीट आर्ट के लिए मशहूर 22 साल की ये बाला जर्मनी से लेकर चीन, यूएसए में अपनी इस कला की बदौलत नाम कमा रही है। काजल को ट्रिनिटी कॉलेज यूएसए, रचनात्मक विश्व मेला जर्मनी, स्ट्रीट आर्ट फेस्टिवल चीन व रूस में अपनी कला का कौशल दिखाने का मौका मिला। मां अनीता सिंह बेटी की उपलब्धि पर निहाल हैं। कहती हैं उनकी बेटी बेटे से बढ़कर है।
ऐश्वर्या गुप्ता
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अपनी मम्मी-पापा की लाडली ऐश्वर्या गुप्ता का बचपन से ही सपना था डॉक्टर बनने का। मम्मी-पापा ने भी उसके सपने को पूरा करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। हर कदम पर उत्साह से साथ दिया। मां अनीता गुप्ता और पिता सुनील गुप्ता का हौसला मिला तो ऐश्वर्या ने भी अपनी मेहनत और लगन से कामयाबी की ऊंचाइयों को छूने के लिए कदम बढ़ाए। हाईस्कूल और इंटरमीडिएट में बेहतरीन प्रदर्शन पर मेडिकल की तैयारी में जुट गई। चीन की यूनिवर्सिटी में उसका सेलेक्शन हो गया। फिलहाल वो चीन के जियांग्जी यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही है।
shivani singh
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शिवपुर के शरद सिंह और रंजना सिंह की दो बेटियां हैं। इन्हें जितना अपनी बेटियों पर नाज है, बेटियों ने भी उन्हें उतना ही मान दिलाया है। बेटे की कमी कभी खलने नहीं दी। बचपन से ही पढ़ाई में होनहार शिवानी और रिया खेलकूद में भी अव्वल हैं। बड़ी बेटी शिवानी सिंह ने 2013 में मिशिगन में हुए जूनियर ओलंपिक में ताइक्वांडो में गोल्ड मेडल हासिल कर मान बढ़ाया तो वहीं रिया भी ताइक्वांडो में नेशनल क्वालिफायर रहीं। फिलहाल शिवानी सिंह ओहियो स्टेट यूनिवर्सिटी से स्नातक कर रही हैं और दूसरी बेटी रिया लंदन में मेडिकल की तैयारी कर रही है।