बनारस में बागी नेताओं ने बनाया फुलप्रूफ प्लान, जानें क्या
पांच साल से ही इस बार के चुनाव का इंतजार कर रहे कई दावेदारों को प्रत्याशियों की सूची आने के बाद करारा झटका लगा है। लेकिन करें भी तो क्या... जब चिड़िया चुग गई खेत...? जिले की सियासी फिजा में असंतोष की हवा भी घुल गई है।
हर पार्टी में कुछ लोग मुंह फुलाए बैठे हैं। आखिर इतने सालों से अरमान सजा रखे थे कि अबकी तो ‘माननीय’ का तमगा लेकर रहेंगे। पर... हाथ लगी घोर निराशा। भाजपा, सपा और कांग्रेस में ऐसे लोगों की तादाद ज्यादा है।
प्रत्याशी घोषित होने के बाद भी खूब जोर लगा लिया लेकिन कामयाबी हाथ न लगी। अब थक-हार कर यही सोच रहे हैं कि ‘न खेलब न खेले देब, खेलवै बिगाड़ देब...।’ प्रमुख दलों के भीतर से छनकर आ रही खबरों के मुताबिक अब इन कार्यकर्ताओं-नेताओं ने तय किया है कि आपसी कड़वाहट भुलाकर, दलों के बंधन तोड़कर एक मजबूत प्रत्याशी खड़ा किया जाए।
ऐसे प्रत्याशी उन सीटों पर खड़े किए जाएं जहां से दावेदारों को झुनझुना थमा दिया गया। उन्हें लगता है कि पार्टी के आलाकमान तक उनकी बात पहुंचाई नहीं जा रही, उधर हाईकमान इस तैयारी में है कि बागी सुर निकालने वाले लोगों को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया जाए।
असंतुष्टों को मनाने में जुट वरिष्ठ संगठन मंत्री
इसी कड़ी में कैंट और रोहनिया क्षेत्र के असंतुष्ट भाजपा कार्यकर्ताओं ने महापंचायत बुलाने का निर्णय लिया है। यहीं आगे की रणनीति तय की जाएगी।
मंगलवार को लंका में पार्षद दल के नेता अशोक मिश्र की अगुवाई में हुई बैठक में कैंट के भाजपा पार्षदों ने तय किया कि 10 फरवरी को महापंचायत करेंगे। उधर, रोहनिया के मनीष सिंह ने नौ फरवरी को क्षेत्र में महापंचायत बुलाई है।
उधर, भाजपा के वरिष्ठ संगठन मंत्री हृदयनाथ सिंह ने मंगलवार को असंतुष्ट कार्यकर्ताओं को मनाने का प्रयास किया। उन्होंने कई पुराने नेताओं से बातकर उनकी नाराजगी दूर करने की कोशिश की। पार्टी सूत्रों के मुताबिक बागियों को शांत कराने के लिए उन्होंने उच्च पदाधिकारियों से भी बातचीत की।
उनके पहले यहां राष्ट्रीय संगठन मंत्री रामलाल के अलावा रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा और मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय असंतुष्टों को समझा चुके हैं। उनके फिर यहां आने की चर्चा है। राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री शिव प्रकाश भी नौ फरवरी को यहां आ रहे हैं।