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पूर्व खनन मंत्री गायत्री प्रजापति से लखनऊ जाकर वाराणसी पुलिस करेगी पूछताछ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Mon, 02 Jul 2018 02:13 PM IST
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पूर्व मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति पर रंगदारी मांगने से जुड़ा मामला दर्ज
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सपा सरकार के पूर्व मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति के खिलाफ दशाश्वमेध थाने में दर्ज रंगदारी मांगने का मुकदमा सोनभद्र जिले के चोपन क्षेत्र की 36 एकड़ जमीन के बालू खनन के टेंडर से जुड़ा है। यह टेंडर जंगमबाड़ी निवासी अरविंद तिवारी को मिला था लेकिन कभी काम ही नहीं शुरू हो पाया।
अरविंद का कहना है कि उन्होंने टेंडर के लिए पर्यावरण विभाग, वन विभाग, खनन विभाग, जिला प्रशासन और लखनऊ के अधिकारियों पर 10 लाख रुपये से ज्यादा खर्च किया लेकिन एक रुपये का भी खनन नहीं करा पाए।
अरविंद ने बताया कि वर्ष 2014 में उन्हें बालू खनन का टेंडर मिला था। इसके बाद लगभग ढाई साल का समय पर्यावरण विभाग की एनओसी मिलने में लग गया। इस दौरान वन विभाग की एनओसी सहित अन्य प्रशासनिक शर्तों को भी पूरा किया।
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2017 में जब काम शुरू कराने की बारी आई तो प्रदेश की नई सरकार ने नई खनन नीति जारी कर दी और उनका टेंडर निरस्त हो गया। कहा कि एनओसी वगैरह के काम के दौरान ही उन्होंने लखनऊ में गायत्री प्रसाद प्रजापति से मुलाकात की थी।
मगर, पर्यावरण विभाग की एनओसी मिलने में पूर्व मंत्री की कोई भूमिका नहीं रही और काम शुरू होने से पहले ही टेंडर निरस्त हो गया। इसके बावजूद पूर्व मंत्री ने नौ जून को कॉल कर कहा कि कमीशन दे जाओ नहीं तो गंभीर परिणाम भुगतना होगा।
यही नहीं, पूर्व मंत्री के दो करीबियों ने भी उनसे कहा कि लखनऊ जेल चले जाओ और कमीशन दे आओ। अरविंद ने कहा कि धमकी भरी कॉल से वह और उनका परिवार सहमा हुआ है। उधर, पुलिस मुकदमा दर्ज करने के बाद मामले की छानबीन में जुटी है।
सर्विलांस की मदद से पुलिस की तफ्तीश में यह स्पष्ट हो गया है कि अरविंद तिवारी के मोबाइल पर नौ जून को लखनऊ जेल से कॉल आई थी। ऐसे में जल्द ही आरोपी गायत्री प्रसाद प्रजापति से पूछताछ के लिए पुलिस की एक टीम लखनऊ जेल जाएगी।
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अरविंद का कहना है कि उन्होंने टेंडर के लिए पर्यावरण विभाग, वन विभाग, खनन विभाग, जिला प्रशासन और लखनऊ के अधिकारियों पर 10 लाख रुपये से ज्यादा खर्च किया लेकिन एक रुपये का भी खनन नहीं करा पाए।
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अरविंद ने बताया कि वर्ष 2014 में उन्हें बालू खनन का टेंडर मिला था। इसके बाद लगभग ढाई साल का समय पर्यावरण विभाग की एनओसी मिलने में लग गया। इस दौरान वन विभाग की एनओसी सहित अन्य प्रशासनिक शर्तों को भी पूरा किया।
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2017 में जब काम शुरू कराने की बारी आई तो प्रदेश की नई सरकार ने नई खनन नीति जारी कर दी और उनका टेंडर निरस्त हो गया। कहा कि एनओसी वगैरह के काम के दौरान ही उन्होंने लखनऊ में गायत्री प्रसाद प्रजापति से मुलाकात की थी।
मगर, पर्यावरण विभाग की एनओसी मिलने में पूर्व मंत्री की कोई भूमिका नहीं रही और काम शुरू होने से पहले ही टेंडर निरस्त हो गया। इसके बावजूद पूर्व मंत्री ने नौ जून को कॉल कर कहा कि कमीशन दे जाओ नहीं तो गंभीर परिणाम भुगतना होगा।
यही नहीं, पूर्व मंत्री के दो करीबियों ने भी उनसे कहा कि लखनऊ जेल चले जाओ और कमीशन दे आओ। अरविंद ने कहा कि धमकी भरी कॉल से वह और उनका परिवार सहमा हुआ है। उधर, पुलिस मुकदमा दर्ज करने के बाद मामले की छानबीन में जुटी है।
सर्विलांस की मदद से पुलिस की तफ्तीश में यह स्पष्ट हो गया है कि अरविंद तिवारी के मोबाइल पर नौ जून को लखनऊ जेल से कॉल आई थी। ऐसे में जल्द ही आरोपी गायत्री प्रसाद प्रजापति से पूछताछ के लिए पुलिस की एक टीम लखनऊ जेल जाएगी।
सुर्खियों में इंस्पेक्टर दशाश्वमेध की कार्यशैली
इंस्पेक्टर दशाश्वमेध राघवेंद्र त्रिपाठी अपनी कार्यशैली को लेकर हमेशा सुर्खियों में रहते हैं। 11 मई को सिंधिया घाट पर प्रभु साहनी की हत्या की गई थी। वारदात के एक दिन पहले प्रभु और दूसरे पक्ष में विवाद हुआ था लेकिन शिकायत मिलने पर भी दशाश्वमेध पुलिस ने गंभीरता नही दिखाई और टरका दिया था।
वहीं, भाजपा के पांच पार्षदों से गाजीपुर जेल से रंगदारी मांगी गई तो क्राइम ब्रांच ने दो बदमाशों को गिरफ्तार कर जेल भेजा। मगर, दशाश्वमेध इंस्पेक्टर ने आरोपियों को रिमांड पर नहीं लिया और दोनों को जमानत मिल गई।
इस मामले को लेकर पुलिस की जिले में जबरदस्त किरकिरी हुई। इसी तरह अरविंद तिवारी ने भी दशाश्वमेध पुलिस से 10 जून को ही शिकायत की थी लेकिन सुनवाई नहीं हुई।
वहीं, भाजपा के पांच पार्षदों से गाजीपुर जेल से रंगदारी मांगी गई तो क्राइम ब्रांच ने दो बदमाशों को गिरफ्तार कर जेल भेजा। मगर, दशाश्वमेध इंस्पेक्टर ने आरोपियों को रिमांड पर नहीं लिया और दोनों को जमानत मिल गई।
इस मामले को लेकर पुलिस की जिले में जबरदस्त किरकिरी हुई। इसी तरह अरविंद तिवारी ने भी दशाश्वमेध पुलिस से 10 जून को ही शिकायत की थी लेकिन सुनवाई नहीं हुई।