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Varanasi: सरकारी विभागों पर तीन साल में ही 4489 करोड़ बाकी, न बढ़ें बिजली दरें; निगम की बताई हकीकत

Sat, 12 Jul 2025 05:26 PM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: अमन विश्वकर्मा Updated Sat, 12 Jul 2025 05:26 PM IST
सार

जनसुनवाई में निगम की ओर से आंकड़ों के आधार पर वित्तीय वर्ष में हानि बताते हुए बिजली दर में बढ़ोतरी के प्रस्ताव को सही ठहराते हुए कहा गया कि बिजली दर बढ़ने के बाद आर्थिक संकट कुछ हद तक दूर हो जाएगा। 

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Varanasi news Government departments owe 4489 crore rupees in three years electricity rates not increased
सुनवाई के दाैरान उद्यमी आरके चाैधरी ने रखी अपनी बात। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

Varanasi News: बिजली व्यवस्था में सुधार को लेकर हुई विद्युत नियामक आयोग की जनसुनवाई में आम उपभोक्ता से लेकर उद्यमियों, बुनकरों ने बिजली व्यवस्था की समस्याएं बताईं। बिजली निगम के अधिकारियों द्वारा किसी भी समस्या पर फोन न उठाने, स्मार्ट मीटर के तेज चलने, मीटर संबंधी गड़बड़ियों की समस्या गिनाई। इस दौरान आयोग के अध्यक्ष अरविंद कुमार ने भी माना कि अगर अधिकारी फोन उठाते तो उपभोक्ताओं की समस्या इतनी नहीं रहती।

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कमिश्नरी सभागार में हुई जनसुनवाई में पहले पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के अधिकारियों की ओर से तीन साल (सत्र 2023-24, 2024-25 और 2025-26) के आंकड़ों को आयोग के अध्यक्ष और सभागार में मौजूद लोगों के सामने रखा।
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इसपर राज्य उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश वर्मा ने कहा कि सरकारी विभागों पर 3 साल में 4489 करोड़ का बिजली बिल बाकी है, उसे सरकार क्यों नहीं दे रही है। अतिरिक्त सब्सिडी के मद में भी पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम को उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा 8115 करोड़ देना है। ऐसे में कहीं से भी निगम घाटे में नहीं है। जनसुनवाई में संजय कुमार, प्रबंध निदेशक शंभू कुमार सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

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उपभोक्ता गिनाने लगे समस्या तो सकते में आ गए अधिकारी
विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष के सामने सभागार में मौजूद उपभोक्ताओं (उद्यमी, बुनकर, आम उपभोक्ता) ने एक-एक कर समस्याएं गिनाईं। रामनगर के जगदीश झुनझुनवाला ने कहा कि बिजली निगम की लापरवाही का आलम यह है कि अपनी यूनिट बंद कर गुजरात में नई यूनिट स्थापित करने की तैयारी है। गोविंद ने स्मार्ट मीटर के सही न चलने की बात कही। बुनकरों ने कहा कि अप्रैल 2006 से पावरलूम को फिक्स रेट पर बिजली देने का निर्णय हुआ लेकिन तभी से बिजली का बिल लिया जा रहा है।

बिजली कंपनियों पर उपभोक्ताओं का 33122 करोड़ बाकी
राज्य उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश वर्मा ने कहा कि किसी भी कीमत पर न तो बिजली निगम का निजीकरण होना चाहिए और न ही बिजली दर में बढ़ोतरी मान्य होगी। अगर सही से मूल्यांकन किया जाए तो पूरे प्रदेश में उपभोक्ताओं का बिजली कंपनियों पर 33122 करोड़ बकाया निकलेगा। इसको देखते हुए बिजली दर में 45 प्रतिशत बढ़ोतरी की जगह 45 प्रतिशत की कमी करनी चाहिए। निगम का निजीकरण किसी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। प्राइवेट सेक्टर से महंगी बिजली खरीदी जाती है उसका खामियाजा प्रदेश की जनता भुगत रही है।

उद्यमी बोले-फिक्स चार्ज नहीं लगाना चाहिए
इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के बैनर तले उद्यमियों ने भी अपनी समस्या बताई। आरके चौधरी ने बताया कि प्रदेश में 14700 से अधिक औद्योगिक इकाइयां हैं। प्रदेश के समग्र विकास एवं औद्योगिक निवेश के लिए विद्युत दरें जो निर्धारित हैं, वो अन्य प्रदेशों से अधिक हैं। ऐसे में किसी भी प्रकार की बढ़ोतरी करने की अपेक्षा लाइन लॉस को कम करना होगा। प्रदेश में सरप्लस बिजली एवं बिजली के संसाधन हैं। ऐसे में फिक्स्ड चार्ज का कोई औचित्य नहीं है। इस दौरान राजेश भाटिया, अनुपम देवा, पंकज अग्रवाल, नीरज पारीख मौजूद रहे।

आयोग के अध्यक्ष बोले, निगम का परफार्मेंस खराब
विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष अरविंद कुमार ने सभी की बातों को सुनने के बाद माना कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम का परफार्मेंस बहुत खराब है। मुख्य रूप से टेक्निकल लाॅस पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि सब कुछ होने के बाद भी ट्रांसफाॅर्मर जल रहे हैं, तार जल रहे हैं, यह ठीक नहीं है। ऐसा लगता है कि अधिकारी निगरानी नहीं करते हैं। यह बहुत चिंतनीय है।

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