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मानसूनः ऐसी हालत में वाराणसी के हालात फिर होंगे खराब
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Fri, 09 Jun 2017 02:54 PM IST
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42 किलोमीटर छोटे-बड़े नालों की कराई जानी है सफाई
- फोटो : अमर उजाला
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वाराणसी नगर निगम और जलकल अब भी नहीं चेते तो इस मानसून में वाराणसी का हालात पहले की तरह फिर बिगड़ेगा। बारिश के बाद सड़कों-गलियों से घरों तक सीवर उफनाएगा। लोग परेशान होंगे,कोसेंगे। मानसून सिर पर है और तैयारियां अब तक आधी-अधूरी।
इसका नतीजा आप दो दिन पहले ही प्री मानसून की पहली बारिश में देख चुके हैं। आधे से एक घंटे की बारिश में ही सड़कों-गलियों पर हुए जलभराव से जगह-जगह पूरे दिन परेशानी उठानी पड़ी थी। बावजूद इसके न नगर निगम की नींद खुल रही न जलकल की।
मानसून से पहले शहर के छोटे-बड़े 75 नाले-नालियों की सफाई का काम 30 मई तक ही पूरा करा लिया जाना था। 42 किलोमीटर सफाई कराई जानी थी। नगर निगम के चीफ इंजीनियर कैलाश सिंह का दावा है कि अब तक 32 किलोमीटर नाले-नालियों की सफाई कराई जा चुकी है लेकिन हकीकत इससे मेल नहीं खाता।
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एक तो कई नालों की सफाई का काम अब तक शुरू ही नहीं हो पाया है। दूसरे, जिन नालों की सफाई नगर निगम की ओर से करा लिए जाने का दावा किया जा रहा है, उनकी भी हालात दुरुस्त नहीं है।
पहड़िया-बेला, पांडेयपुर-हुकुलगंज और सिगरा में जगह-जगह नालों में सिल्ट और कचरा भरा पड़ा है जबकि निगम प्रशासन का दावा है कि इनकी सफाई कराई जा चुकी है।
जहां नाले-नालियों की सफाई का काम चल रहा है, वहां सड़कों-गलियों में सिल्ट से लोग परेशान हैं। सिल्ट न उठवाए जाने से आवागमन में दिक्कतें हो रही हैं।
जानकारों का दावा है कि नगर निगम के अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत से नाले-नालियों की सफाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है। नाला सफाई पर 45 लाख रुपये का बजट निर्धारित है।
जलभराव वाले इलाके
महमूरगंज, रथयात्रा, सिगरा, नई सड़क, गोदौलिया, बेनियाबाग, मलदहिया, अंधरापुल, तेलियाबाग, लहरतारा, बजरडीहा, जक्खा, रवींद्रपुरी, लंका, मंडुवाडीह, सरायनंदन, दशमी, सुंदरपुर प्रज्ञा नगर समेत 29 स्थानों पर अधिक होता है जलभराव।
75 बड़े-छोटे नाले-नालियां की होनी है सफाई
45 लाख रुपये का कराया गया है टेंडर
30 मई तक 42 किमी लंबे नाले-नालियों को करना था साफ
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इसका नतीजा आप दो दिन पहले ही प्री मानसून की पहली बारिश में देख चुके हैं। आधे से एक घंटे की बारिश में ही सड़कों-गलियों पर हुए जलभराव से जगह-जगह पूरे दिन परेशानी उठानी पड़ी थी। बावजूद इसके न नगर निगम की नींद खुल रही न जलकल की।
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मानसून से पहले शहर के छोटे-बड़े 75 नाले-नालियों की सफाई का काम 30 मई तक ही पूरा करा लिया जाना था। 42 किलोमीटर सफाई कराई जानी थी। नगर निगम के चीफ इंजीनियर कैलाश सिंह का दावा है कि अब तक 32 किलोमीटर नाले-नालियों की सफाई कराई जा चुकी है लेकिन हकीकत इससे मेल नहीं खाता।
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एक तो कई नालों की सफाई का काम अब तक शुरू ही नहीं हो पाया है। दूसरे, जिन नालों की सफाई नगर निगम की ओर से करा लिए जाने का दावा किया जा रहा है, उनकी भी हालात दुरुस्त नहीं है।
पहड़िया-बेला, पांडेयपुर-हुकुलगंज और सिगरा में जगह-जगह नालों में सिल्ट और कचरा भरा पड़ा है जबकि निगम प्रशासन का दावा है कि इनकी सफाई कराई जा चुकी है।
जहां नाले-नालियों की सफाई का काम चल रहा है, वहां सड़कों-गलियों में सिल्ट से लोग परेशान हैं। सिल्ट न उठवाए जाने से आवागमन में दिक्कतें हो रही हैं।
जानकारों का दावा है कि नगर निगम के अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत से नाले-नालियों की सफाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है। नाला सफाई पर 45 लाख रुपये का बजट निर्धारित है।
जलभराव वाले इलाके
महमूरगंज, रथयात्रा, सिगरा, नई सड़क, गोदौलिया, बेनियाबाग, मलदहिया, अंधरापुल, तेलियाबाग, लहरतारा, बजरडीहा, जक्खा, रवींद्रपुरी, लंका, मंडुवाडीह, सरायनंदन, दशमी, सुंदरपुर प्रज्ञा नगर समेत 29 स्थानों पर अधिक होता है जलभराव।
75 बड़े-छोटे नाले-नालियां की होनी है सफाई
45 लाख रुपये का कराया गया है टेंडर
30 मई तक 42 किमी लंबे नाले-नालियों को करना था साफ
20 जून तक दस्तक दे सकता है मानसून
बारिश
- फोटो : amar ujala
बनारस समेत पूर्वांचल में 15 से 20 जून के बीच मानसून के दस्तक देने की उम्मीद है। इस बार अच्छी बारिश के आसार हैं। मौसम विज्ञानियों के मुताबिक पिछले साल शुरुआती दौर में अच्छी बारिश हुई लेकिन बाद में मानसून कमजोर होने से दिक्कतें हुईं।
इस बार खेती-बारी के लिहाज से मानसून बेहतर रहेगा। समय-समय के अंतराल पर पूरे मानसून सत्र तक बारिश के आसार हैं।
बीएचयू के मौसम विज्ञानी प्रो एसएन पांडेय का कहना है कि मध्य-पश्चिमी बंगाल की खाड़ी में नमी बनने लगी है। इसका असर दिखने लगा है।
उमस के साथ आसमान में बादल बनने लगे हैं। उधर अंडमान निकोबार में भी मानसूनी मौसम से उम्मीद है कि इस बार समय पर मानसून की दस्तक होगी।
इस बार खेती-बारी के लिहाज से मानसून बेहतर रहेगा। समय-समय के अंतराल पर पूरे मानसून सत्र तक बारिश के आसार हैं।
बीएचयू के मौसम विज्ञानी प्रो एसएन पांडेय का कहना है कि मध्य-पश्चिमी बंगाल की खाड़ी में नमी बनने लगी है। इसका असर दिखने लगा है।
उमस के साथ आसमान में बादल बनने लगे हैं। उधर अंडमान निकोबार में भी मानसूनी मौसम से उम्मीद है कि इस बार समय पर मानसून की दस्तक होगी।