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वाराणसी नगर निगम सदन की पहली बैठक, न कार्यकारिणी बनी न शहर के विकास पर हुई चर्चा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Sun, 07 Jan 2018 02:18 PM IST
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सदन की पहली बैठक में मेयर मृदुला जायसवाल
- फोटो : अमर उजाला
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वाराणसी नगर निगम सदन की पहली बैठक शनिवार को चौकाघाट स्थित गिरिजा देवी संकुल में करीब सवा घंटे चलने के बाद खत्म हो गई। सदन में न कार्यकारिणी के गठन पर और न ही शहर की बुनियादी सुविधाओं के विकास पर चर्चा हुई।
सदन में सड़कों की खुदाई का मुद्दा उठा मगर पार्षदों के विरोध और नोंकझोंक में ही रह गया। अलाव पर चर्चा हुई और जरूरी स्थानों पर जलाने पर नगर आयुक्त ने भरोसा दिलाया। परिचय, स्वागत और शोकसभा का प्रस्ताव आने के बाद अध्यक्ष/महापौर मृदुला जायसवाल ने सदन को स्थगित कर दिया।
सदन की कार्यवाही 11.00 बजे शुरू हुई। सबसे पहले महापौर मृदुला जायसवाल ने सदन में उपस्थित पार्षदों, जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और कर्मचारियों को सदन की कार्यवाही से अवगत कराया। पार्षदों का परिचय कराया गया। वंदेमातरम से कार्यवाही शुरू हुई।
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इस बीच सपा के एमएलसी एवं सदन के पदेन सदस्य शतरुद्र प्रकाश ने 12 दिसंबर को संस्कृत में शपथ लेने पर आपत्ति जताई और अलाव नहीं जलने का मुद्दा उठाया। इस पर पार्षदों ने नाराजगी जाहिर करते हुए कुछ देर के लिए शोरशराबा मचाने लगे।
नगर आयुक्त ने आश्वस्त किया कि जहां जरुरी है वहां अलाव जलेगा, तब जाकर सदस्य माने। नगर आयुक्त ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी भाषा में शपथ ली जा सकती है। अलाव का भी मसला उठा।
कांग्रेस पार्षद दल के नेता सीताराम केशरी ने सड़कों की खुदाई, आईपीडीएस के अधिकारियों को सदन में बुलाने का मसला उठाया। सपा के निर्दल पार्षद प्रशांत सिंह पिंकू ने भी समर्थन किया। इस बीच भाजपा के राजेश यादव चुल्लू, वंदना सिंह, नरसिंह दास ने कड़ा विरोध किया और हल्की नोंकझोंक हुई।
भाजपा पार्षदों ने आरोप लगाया कि विरोधी दल केपार्षद सदन को गुमराह कर रहे हैं और कोई चर्चा नहीं हुई। इसके बाद पार्षदों ने शोकसभा का प्रस्ताव ला दिया। शोकसभा पढ़ने के बाद सदन को अध्यक्ष ने सवा 12 बजे स्थगित कर दी।
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सदन में सड़कों की खुदाई का मुद्दा उठा मगर पार्षदों के विरोध और नोंकझोंक में ही रह गया। अलाव पर चर्चा हुई और जरूरी स्थानों पर जलाने पर नगर आयुक्त ने भरोसा दिलाया। परिचय, स्वागत और शोकसभा का प्रस्ताव आने के बाद अध्यक्ष/महापौर मृदुला जायसवाल ने सदन को स्थगित कर दिया।
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सदन की कार्यवाही 11.00 बजे शुरू हुई। सबसे पहले महापौर मृदुला जायसवाल ने सदन में उपस्थित पार्षदों, जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और कर्मचारियों को सदन की कार्यवाही से अवगत कराया। पार्षदों का परिचय कराया गया। वंदेमातरम से कार्यवाही शुरू हुई।
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इस बीच सपा के एमएलसी एवं सदन के पदेन सदस्य शतरुद्र प्रकाश ने 12 दिसंबर को संस्कृत में शपथ लेने पर आपत्ति जताई और अलाव नहीं जलने का मुद्दा उठाया। इस पर पार्षदों ने नाराजगी जाहिर करते हुए कुछ देर के लिए शोरशराबा मचाने लगे।
नगर आयुक्त ने आश्वस्त किया कि जहां जरुरी है वहां अलाव जलेगा, तब जाकर सदस्य माने। नगर आयुक्त ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी भाषा में शपथ ली जा सकती है। अलाव का भी मसला उठा।
कांग्रेस पार्षद दल के नेता सीताराम केशरी ने सड़कों की खुदाई, आईपीडीएस के अधिकारियों को सदन में बुलाने का मसला उठाया। सपा के निर्दल पार्षद प्रशांत सिंह पिंकू ने भी समर्थन किया। इस बीच भाजपा के राजेश यादव चुल्लू, वंदना सिंह, नरसिंह दास ने कड़ा विरोध किया और हल्की नोंकझोंक हुई।
भाजपा पार्षदों ने आरोप लगाया कि विरोधी दल केपार्षद सदन को गुमराह कर रहे हैं और कोई चर्चा नहीं हुई। इसके बाद पार्षदों ने शोकसभा का प्रस्ताव ला दिया। शोकसभा पढ़ने के बाद सदन को अध्यक्ष ने सवा 12 बजे स्थगित कर दी।
कार्यकारिणी का चुनाव पहले से ही टालने की थी मंशा
शोक में दो मिनट के मौन में मेयर समेत पूरा सदन
- फोटो : अमर उजाला
नगर निगम सदन की बैठक के एजेंडे में कार्यकारिणी का गठन प्रमुख बिंदु था लेकिन शनिवार को ऐसा नहीं हो सका। न तो कार्यकारिणी पर चर्चा हुई और न ही गठन हुआ। सवा घंटे में सदन की सारी कार्यवाही की औपचारिकता पूरी कर स्थगित कर दिया गया।
सूत्रों का कहना है कि चुने गए 13 निर्दल पार्षदों में से कुछ पार्षद कार्यकारिणी गठन में भाजपा की रणनीति का खेल बिगाड़ रहे हैं। शुक्रवार की शाम तक मामला नहीं बन पाने पर पहले ही तय कर लिया गया था कि शोक प्रस्ताव के बाद सदन स्थगित कर दी जाए।
कार्यकारिणी के गठन के लिए 12 सदस्यों की जरूरत होती हे। प्रत्येक आठ पार्षद पर एक सदस्य होते हैं। ऐसे में भाजपा केपांच सदस्य आसानी से बन जाएंगे। पार्टी सूत्रों के अनुसार कार्यकारिणी में भी पार्टी बहुमत चाहती है ताकि किसी भी प्रस्ताव को आसानी से पास कराया जा सके।
लेकिन अभी दो सदस्य कम पड़ रहे हैं। ऐसे में निर्दल पार्षदों को अपने पाले में करने की पूरी कोशिश में जुटी है। ऐसे में सपा के 14, कांग्रेस के 21 और बसपा केदो पार्षद हैं। निर्दल के साथ ही बसपा के पार्षदों को भी अपने पक्ष में करने की जुगत हो रही है।
जानकारों का कहना है कि इसके लिए जोड़तोड़ के साथ जुगाड़ भी किया जा रहा है। सदन में अपर नगर आयुक्त मोतीलाल सिंह, संयुक्त नगर आयुक्त रमेश चंद्र सिंह, पार्षद रेशमा परवीन, मिथिलेश साहनी, मनोज यादव मौजूद रहे।
सूत्रों का कहना है कि चुने गए 13 निर्दल पार्षदों में से कुछ पार्षद कार्यकारिणी गठन में भाजपा की रणनीति का खेल बिगाड़ रहे हैं। शुक्रवार की शाम तक मामला नहीं बन पाने पर पहले ही तय कर लिया गया था कि शोक प्रस्ताव के बाद सदन स्थगित कर दी जाए।
कार्यकारिणी के गठन के लिए 12 सदस्यों की जरूरत होती हे। प्रत्येक आठ पार्षद पर एक सदस्य होते हैं। ऐसे में भाजपा केपांच सदस्य आसानी से बन जाएंगे। पार्टी सूत्रों के अनुसार कार्यकारिणी में भी पार्टी बहुमत चाहती है ताकि किसी भी प्रस्ताव को आसानी से पास कराया जा सके।
लेकिन अभी दो सदस्य कम पड़ रहे हैं। ऐसे में निर्दल पार्षदों को अपने पाले में करने की पूरी कोशिश में जुटी है। ऐसे में सपा के 14, कांग्रेस के 21 और बसपा केदो पार्षद हैं। निर्दल के साथ ही बसपा के पार्षदों को भी अपने पक्ष में करने की जुगत हो रही है।
जानकारों का कहना है कि इसके लिए जोड़तोड़ के साथ जुगाड़ भी किया जा रहा है। सदन में अपर नगर आयुक्त मोतीलाल सिंह, संयुक्त नगर आयुक्त रमेश चंद्र सिंह, पार्षद रेशमा परवीन, मिथिलेश साहनी, मनोज यादव मौजूद रहे।