कार्यकारिणी चुनाव: कांग्रेस ने कराया सपा को एक सीट का नुकसान, समिति के 12 में से 11 सदस्य भाजपा के
वाराणसी नगर निगम कार्यकारिणी चुनाव में कांग्रेस ने सपा को एक सीट का नुकसान कराया। अब कार्यकारिणी समिति के 12 में से 11 सदस्य भाजपा के और एक सदस्य सपा का रह गया।
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गहमागहमी के बीच हुए नगर निगम कार्यकारिणी चुनाव में कांग्रेस की मौजूदगी से सपा को एक सीट का नुकसान हुआ, जबकि भाजपा को एक सीट का फायदा मिला। कार्यकारिणी के छह सदस्यों के सेवानिवृत्त होने के बाद शुक्रवार को टाउनहाॅल में नगर निगम सदन की बैठक के दौरान चुनाव कराया गया। इसमें भाजपा के पांच, सपा के एक और कांग्रेस के एक प्रत्याशी समेत कुल सात उम्मीदवार मैदान में रहे। चुनाव के बाद कार्यकारिणी समिति के 12 सदस्यों में भाजपा के 11 और सपा का एक सदस्य रह गया। पहले सपा के दो सदस्य थे। चुनाव में रिकॉर्ड 95.53 प्रतिशत मतदान हुआ।
मेयर अशोक कुमार तिवारी की अध्यक्षता में दोपहर ढाई बजे चुनाव प्रक्रिया शुरू हुई। करीब साढ़े पांच घंटे बाद रात आठ बजे परिणाम घोषित किए गए। भाजपा के प्रत्याशियों में उपसभापति नरसिंह दास, बलराम कन्नौजिया, इंद्रारानी, संदीप रघुवंशी और संजय केशरी विजयी रहे। सपा के गोविंद सिंह पटेल भी चुनाव जीत गए, जबकि कांग्रेस के प्रत्याशी गुलशन अली पराजित हो गए। कार्यकारिणी के 12 सदस्यों में से छह सदस्य 27 जून को सेवानिवृत्त हो गए थे। इन्हीं छह रिक्त पदों के लिए चुनाव कराया गया।
चुनाव के लिए कुल आठ प्रत्याशियों ने नामांकन किया था, लेकिन पर्याप्त समर्थन न होने के कारण सपा प्रत्याशी अमरदेव यादव ने नाम वापस ले लिया। इसके बाद सात प्रत्याशी मैदान में रह गए। कांग्रेस प्रत्याशी गुलशन अली ने नाम वापस नहीं लिया। कांग्रेस के पास पर्याप्त मत न होने के बावजूद चुनाव मैदान में बने रहने के कारण चुनाव कराना पड़ा।
चुनाव में दो राज्यमंत्री, तीन विधायक और तीन एमएलसी ने डाले वोट
चुनाव में राज्यमंत्री रविंद्र जायसवाल और हंसराज विश्वकर्मा ने मतदान किया। विधायकों में डॉ. नीलकंठ तिवारी, सौरभ श्रीवास्तव और सुनील पटेल ने वोट डाला। विधान परिषद सदस्यों में धर्मेंद्र राय, अन्नपूर्णा सिंह और सपा के स्नातक एमएलसी आशुतोष सिन्हा ने मतदान किया। कार्यकारिणी चुनाव की मतदाता सूची में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत 112 सदस्य शामिल हैं। इनमें दो सांसद, पांच विधायक, पांच विधान परिषद सदस्य और 100 पार्षद हैं। नगर निगम की ओर से सभी मतदाताओं को मतदान के लिए पत्र भेजा गया था। सांसदों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चंदौली से सपा सांसद वीरेंद्र सिंह शामिल हैं। विधायकों में शिवपुर विधायक एवं कैबिनेट मंत्री अनिल राजभर को छोड़कर अन्य चार विधायकों ने मतदान किया। विधान परिषद सदस्यों में राज्यमंत्री डॉ. दयाशंकर मिश्र ''दयालु'' को छोड़कर अन्य चार सदस्यों ने मतदान किया।
शहर से बाहर होने के कारण प्रधानमंत्री समेत पांच मतदाता नहीं डाल सके वोट
शहर से बाहर होने के कारण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत पांच मतदाता मतदान में हिस्सा नहीं ले सके। इनमें कैबिनेट मंत्री अनिल राजभर, राज्यमंत्री डॉ. दयाशंकर मिश्र ''दयालु'', सपा सांसद वीरेंद्र सिंह और निर्दलीय पार्षद अर्चना यादव भी शामिल रहे।
कार्यकारिणी चुनाव के निर्वाचन अधिकारी एवं सहायक लेखा अधिकारी अयोध्या प्रसाद तिवारी के अनुसार कुल 112 मतदाताओं में से 107 ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। इस तरह चुनाव में रिकॉर्ड 95.53 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। मतदान समाप्त होने के तुरंत बाद मतगणना अधिकारी शशिकांत सिंह के नेतृत्व में मतगणना हुई। इस दौरान एक मत अवैध घोषित किया गया। इसके बाद निर्वाचन अधिकारी ने विजयी प्रत्याशियों के नामों की आधिकारिक घोषणा की। महापौर ने सेवानिवृत्त हुए छह सदस्यों और नवनिर्वाचित छह सदस्यों को सम्मानित किया।
कार्यकारिणी चुनाव में एक सीट जीतने के लिए 16 मतों की आवश्यकता होती है। 13 मई 2023 को हुए नगर निगम चुनाव में 100 वार्डों के परिणाम घोषित हुए थे। उस समय भाजपा के 63, सपा के 13, कांग्रेस के आठ और जन अधिकार पार्टी का एक पार्षद निर्वाचित हुआ था। इसके अलावा 15 निर्दलीय पार्षद जीते थे। बाद में 12 निर्दलीय पार्षद भाजपा में शामिल हो गए, जबकि दो निर्दलीय पार्षद सपा के साथ चले गए। कांग्रेस के एक पार्षद ने भी भाजपा का दामन थाम लिया, जबकि एक निर्दलीय पार्षद कांग्रेस में शामिल हो गया। इसके बाद सदन में भाजपा के 74, सपा के 15, कांग्रेस के आठ, जन अधिकार पार्टी का एक और दो निर्दलीय सदस्य हैं।
- भाजपा (5 सीटें)
- बलराम कन्नौजिया (शिवपुर, वार्ड नं. 9)
- इंद्रारानी (शिवपुरवा, वार्ड नं. 10)
- संदीप रघुवंशी (नरायनपुर, वार्ड नं. 31)
- संजय केशरी (गोलादीनानाथ, वार्ड नं. 84)
- नरसिंह दास (दशाश्वमेध, वार्ड नं. 96)
- समाजवादी पार्टी (1 सीट)
- गोविंद सिंह पटेल (पिसौर, वार्ड नं. 49)
कार्यकारिणी का चुनाव एकल संक्रमणीय पद्धति (सिंगल ट्रांसफरेबल वोट) से कराया गया। इसमें मतदाताओं को प्रत्याशियों के पक्ष में वरीयता क्रम के आधार पर मतदान का अधिकार होता है। प्रथम वरीयता के मत का सबसे अधिक महत्व होता है। चुनाव में संदीप रघुवंशी को प्रथम वरीयता के 17 मत मिले। वहीं बलराम कन्नौजिया, इंद्रारानी, संजय केशरी, नरसिंह दास और गोविंद सिंह पटेल को 16-16 मत मिले। कांग्रेस प्रत्याशी गुलशन अली को नौ मत प्राप्त हुए।
कांग्रेस प्रत्याशी नाम वापस लेते तो नहीं होता चुनाव
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि कांग्रेस प्रत्याशी नाम वापस ले लेते तो चुनाव की नौबत नहीं आती। ऐसे में समाजवादी पार्टी के दो सदस्यों का कार्यकारिणी में पहुंचना लगभग तय माना जा रहा था। स्थिति तब बदली, जब पर्याप्त मत न होने के बावजूद कांग्रेस प्रत्याशी गुलशन अली (कमालपुरा, वार्ड नं. 100) चुनाव मैदान में बने रहे। इसके कारण मतदान कराना पड़ा। नतीजतन कांग्रेस प्रत्याशी चुनाव हार गए और समाजवादी पार्टी को भी एक संभावित सीट का नुकसान उठाना पड़ा। इस स्थिति का लाभ भाजपा को मिला और उसने चार के बजाय पांच सीटों पर जीत दर्ज की।