Varanasi News: समावेशी शिक्षा की मिसाल बना जाल्हूपुर का समेकित विद्यालय, दिव्यांग और सामान्य बच्चे साथ पढ़ेंगे
जिले में चिरईगांव के जाल्हुपुर में 38.77 करोड़ रुपये से बना समेकित विद्यालय दिव्यांग और सामान्य बच्चों को एक साथ शिक्षा देगा। कक्षा छह से इंटर तक पढ़ाई, 550 विद्यार्थियों की क्षमता और 100 छात्रों के लिए आवासीय सुविधा होगी। विद्यालय पूरी तरह दिव्यांग अनुकूल है और समावेशी शिक्षा को बढ़ावा देगा।
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Varanasi News: चिरईगांव ब्लॉक क्षेत्र के जाल्हुपुर में 38.77 करोड़ रुपये की लागत से तैयार समेकित विद्यालय शिक्षा के क्षेत्र में नई सोच और समावेशी व्यवस्था का उदाहरण बनेगा। इस विद्यालय की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां दिव्यांग और सामान्य बच्चे एक ही परिसर में साथ पढ़ाई करेंगे। इससे दिव्यांग विद्यार्थियों को अलग विद्यालयों में जाने की आवश्यकता नहीं होगी और उनमें आत्मविश्वास के साथ सामाजिक समरसता की भावना भी विकसित होगी।
करीब तीन एकड़ क्षेत्र में निर्मित इस अत्याधुनिक विद्यालय में कक्षा छह से इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई कराई जाएगी। विद्यालय में कुल 550 विद्यार्थियों के अध्ययन की क्षमता है। साथ ही 100 विद्यार्थियों के लिए आवासीय सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है। इसमें 50 बालकों और 50 बालिकाओं के रहने की अलग-अलग व्यवस्था की गई है। विद्यालय का पूरा परिसर दिव्यांग अनुकूल बनाया गया है, ताकि विभिन्न प्रकार की दिव्यांगता वाले बच्चे बिना किसी बाधा के शिक्षा ग्रहण कर सकें।
विद्यालय में आधुनिक शिक्षण सुविधाओं के साथ रैंप, सुगम मार्ग, विशेष शौचालय और अन्य आवश्यक संसाधन विकसित किए गए हैं। इसका उद्देश्य दिव्यांग बच्चों को समान अवसर प्रदान करते हुए मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ना है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की व्यवस्था से बच्चों में एक-दूसरे के प्रति सहयोग, संवेदनशीलता और समानता की भावना मजबूत होगी।
जिला दिव्यांग सशक्तीकरण अधिकारी आरपी सिंह ने बताया कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत सभी बच्चों को बिना किसी भेदभाव के गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। इसी उद्देश्य से समेकित विद्यालय की स्थापना की गई है। उन्होंने कहा कि यहां दिव्यांग बच्चों की प्रतिभा को पहचानकर उनके सर्वांगीण विकास पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, जिससे वे आत्मनिर्भर और सक्षम नागरिक बन सकें।
उन्होंने बताया कि इस विद्यालय के संचालन से न केवल दिव्यांग बच्चों को बेहतर शैक्षिक वातावरण मिलेगा, बल्कि समाज में समावेशी शिक्षा की अवधारणा भी मजबूत होगी। आने वाले समय में यह विद्यालय प्रदेश के लिए एक मॉडल संस्थान के रूप में स्थापित हो सकता है, जहां समान अवसर और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का लक्ष्य साकार होगा।