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Varanasi News: कागजों पर ‘स्वच्छ’ चोलापुर, कबाड़ हो रहीं 1.25 करोड़ की ई-कचरा गाड़ियां; ज्यादातर सफेद हाथी बनी

Sun, 31 May 2026 11:34 AM IST
Aman Vishwakarma संजय सिंह, अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
संजय सिंह, अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: Aman Vishwakarma Updated Sun, 31 May 2026 11:34 AM IST
सार

Varanasi News: चोलापुर में कागजों पर स्वच्छता व्यवस्था दिखाने के बावजूद ई-कचरा गाड़ियां कबाड़ में तब्दील हो रही हैं। 89 ग्राम पंचायतों में करीब 1.25 से 1.40 करोड़ रुपये की लागत से खरीदी गई ये गाड़ियां अधिकतर बेकार पड़ी हैं। अधिकारियों और ग्राम प्रधानों की लापरवाही से यह योजना फेल साबित हो रही है और लाखों रुपये की संपत्ति सफेद हाथी बन गई है।

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Varanasi Cholapur Clean Paper—E-Waste Vehicles Worth one Crore Gathering Dust Most Have Become White Elephants
चोलापुर के सुल्तानीपुर गांव में खड़ी ई-कचरा गाड़ी। - फोटो : संवाद

विस्तार

Varanasi News: चोलापुर ब्लॉक में अधिकारियों और ग्राम प्रधानों की लापरवाही के कारण स्वच्छ भारत मिशन अभियान पर पलीता लग रहा है। ब्लॉक की 89 ग्राम पंचायतों में ग्रामीणों के घरों से कूड़ा उठाने के लिए 1.25 करोड़ की लागत से खरीदी गईं इलेक्ट्रिक गाड़ियां अब कबाड़ में तब्दील होने की कगार पर हैं। 

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सन 2023 से शुरू हुई इस योजना की स्थिति यह है कि बमुश्किल 10 से 15 गांवों में गाड़ियां चल रही हैं। बाकी ग्राम पंचायतों में खड़ी कबाड़ हो रही हैं या फिर निजी काम में लगी हुई हैं।  
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साल 2023 से ही लापरवाही बरतने वाले सचिवों का वेतन तक रोका गया। इसके बावजूद जमीन पर कोई सुधार नहीं दिखा। कूड़े से खाद बनाने और उसके निस्तारण के लिए स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) और रूरबन मिशन के तहत लाखों रुपये की लागत से रिसोर्स रिकवरी सेंटर यानी कूड़ा घर बनाए गए थे। इस ब्लॉक में ये भी कई बंद पड़े हैं। डुडवा, बर्थरा खुर्द, भगवानपुर, धौरहरा, पिपरी, बेला, गरथौली, उगापुर, चंद्रावती और मोलनापुर में 12.50 लाख की लागत से अत्याधुनिक रिसोर्स रिकवरी सेंटर, आरसीसी सेंटर बनाए गए। 
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इसी तरह स्वच्छ भारत मिशन के तहत मुनारी, रौना खुर्द, जगदीशपुर, कैथी, राजवारी, बर्थरा, धरसौना और गौरा उपरवार में 7.50 लाख की लागत से आरआरसी केंद्र तैयार हुए। अन्य गांवों में भी दो लाख की लागत से इन केंद्रों का निर्माण कराया गया। योजना थी कि गांवों से गीला और सूखा कचरा लाकर यहां छंटनी होगी और जैविक खाद बनाई जाएगी, लेकिन इसमें अधिकांश सेंटर बंद पड़े हैं। 

ब्लॉक के चंद गांवों में ही चल रहीं गाड़ियां 
ब्लॉक के नियार, अजगरा, ढाका, कैथी, धरसौना, खरदहा, खनुआन, तिलमापुर, रूपचंदपुर, मोहनडीह, भरतपुर, बेला, बवियांव, मगरहुआ, लटौनी और रसड़ा जैसे चुनिंदा गांवों में ही गाड़ियां सड़क पर दिखती हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि इनमें से कई जगहों पर सिस्टम पूरी तरह फेल है और प्राइवेट लोग अपने स्तर से इसे चला रहे हैं। बाकी के दर्जनों गांवों में गाड़ियां कहां हैं और किस हाल में हैं, इसका जवाब किसी के पास नहीं है।

89 ग्राम पंचायतों में इलेक्ट्रिक गाड़ियां खरीदी गई थीं। 2023 से अब तक लापरवाही के कारण सचिवों का वेतन भी रोका गया, फिर भी योजना पूरी तरह संचालित नहीं हुई। प्रधान तत्परता नहीं दिखा रहे हैं। कई गाड़ियां खराब हुईं, जिनकी मरम्मत पर भी धनराशि खर्च हो रही है। - अंशुमान सिंह, सहायक विकास अधिकारी (पंचायत), चोलापुर

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