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बीएचयू में खुलेगा वैक्सीन रिसर्च सेंटर, अमेरिकी संस्था के सहयोग से चलेगा सेंटर, 500 करोड़ रुपये होगा खर्च

Thu, 05 Nov 2020 11:16 PM IST
स्‍वाधीन तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: स्‍वाधीन तिवारी Updated Thu, 05 Nov 2020 11:16 PM IST
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Vaccine Research Center will open in BHU
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

वह दिन दूर नहीं जब बीएचयू में अलग-अलग बीमारियों से बचाव के लिए वैक्सीन बनाई जाएगी। इसके लिए बीएचयू में वैक्सीन रिसर्च सेंटर खोले जाने का निर्णय लिया गया है। इससे जहां विभिन्न बीमारियों के लिए वैक्सीन बनाने का काम शुरू होगा, वहीं आने वाले दिनों में बीमारियों के प्रकोप को कम करने में भी मदद मिलेगी। अमेरिकन संस्था के सहयोग से 500 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाले सेंटर से बीएचयू को नई पहचान भी मिलेगी।

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कुलपति प्रोफेसर राकेश भटनागर की अध्यक्षता में बुधवार को हुई विद्दत परिषद की बैठक में इस प्रस्ताव पर मुहर लगी। अब इस प्रस्ताव को कार्यकारिणी परिषद की बैठक में रखा जाएगा। बैठक में विभागों में चलने वाले कोर्स शोध कार्य सहित अन्य बिंदुओं पर चर्चा हुई।
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कोरोना काल में जिस तरह से वैक्सीन की मांग बढ़ी है उसको देखते हुए ही आने वाले दिनों में इस तरह की किसी भी बीमारी पर  नियंत्रण के लिए वैक्सीन बनाए जाने की दिशा में सेंटर की अहम भूमिका होगी। अमेरिकी संस्था के सहयोग से बनने वाले सेंटर का संचालन पांच मंजिला भवन में होगा। इसमें आइएमएस बीएचयू के अलावा नियमानुसार  बीएचयू के वैज्ञानिकों को शामिल किया जाएगा। सेंटर की मंजूरी मिलने के बाद यहां कोर्स चलाए जाने, शोध सहित अन्य कार्य भी कराए जा सकेंगे। 

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वैदिक विज्ञान केंद्र में डिग्री कोर्स को मंजूरी
विद्दत परिषद की बैठक में ही वैदिक विज्ञान केंद्र में चलने वाले तीन साल के डिग्री कोर्स वैदिक योग विज्ञान को भी मंजूरी मिली है। जिसके बाद यहां योग विज्ञान की पढ़ाई हो सकेगी। आने वाले दिनों में वैदिक विज्ञान, वैदिक प्रौद्योगिकी और वैदिक योग विज्ञान में शोध कार्य भी किया जा सकेगा।  

सुबह 11 बजे से शुरू होकर शाम करीब चार बजे तक चली बैठक में अलग-अलग मुद्दों पर चर्चा की गई।  जिसमें दृश्य कला संकाय में टेक्सटाइल डिपार्टमेंट बनाए जाने का प्रस्ताव भी रखा गया, जिस पर कोई निर्णय नहीं हो सका।  फिलहाल सेंटर  के रूप में संचालित करने का निर्णय लिया गया है।  

इस बार नहीं होगा दीक्षांत समारोह
 विद्दत परिषद की बैठक में दीक्षांत समारोह के आयोजन पर भी चर्चा हुई। इसमें कोरोना संक्रमण को देखते हुए विश्वविद्यालय में फिलहाल इस साल दीक्षांत समारोह नहीं मनाए जाने का निर्णय लिया गया। 
 

आइएमएस में सीनियर प्रोफेसर बनने का रास्ता साफ
आईएमएस बीएचयू में सीनियर प्रोफेसर पद की नियुक्ति को लेकर नियमों की बंदिश जो आड़े आ रही थी अब उसका रास्ता साफ हो गया है। सीनियर प्रोफेसर पद के लिए यूजीसी की ओर से अब तक 10 साल के प्रोफ़ेसरशिप और दो पीएचडी कराने वाले प्रोफेसरों को ही सीनियर प्रोफेसर के लिए आवेदन करने के लिए योग्य माना जा रहा था।

विद्दत परिषद की बैठक में इस पर लंबी बहस के बाद यह फैसला हुआ कि आईएमएस के शिक्षक छात्रों को एमडी, एमएस कराते हैं। ऐसे में परिषद की बैठक में नियमों को शिथिल करते हुए यह फैसला हुआ है कि 10 साल प्रोफेसरशिप वाले आइएमएस के प्रोफेसर यदि 5 छात्रों को एमडी/एमएस कराते हैं तो वह भी सीनियर प्रोफेसर के लिए योग्य माने जाएंगे। इस फैसले से बड़ी संख्या में आइएमएस के प्रोफेसरों को लाभ होगा।

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