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बनारस में भी शुरू हो गया मुस्लिमों का सियासी इस्तेमाल
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Tue, 14 Feb 2017 04:39 PM IST
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मुस्लिम वोटर्स
भले ही निर्वाचन आयोग ने प्रत्याशियों को धर्म के नाम पर वोट मांगने पर पाबंदी लगा दी है लेकिन मुस्लिमों का राजनीतिक इस्तेमाल शुरू हो गया है।
दिल्ली के जामा मस्जिद के इमाम बुखारी के बाद लखनऊ में इमाम मौलाना खालिद रशीद फरंगी महल समेत मुस्लिम धर्मगुरुओं ने ऐसी ही अपील जारी की है। ताजा मामला बनारस का है।
जामा मस्जिद बादशाह बाग के इमाम मौलाना हसीन अहमद हबीबी ने सोमवार को मुसलमानों से बसपा को वोट देने की अपील की है। कहा, हमें ऐसी पार्टी की हिमायत करनी चाहिए, जो कानून व्यवस्था पर काबू रख सके।
उलमा की ओर से अलग-अलग पार्टी को वोट देने की अपील पर मुफ्ती-ए-शहर मौलाना अब्दुल बातिन नोमानी का कहना है कि किसी भी पार्टी का नाम लेकर वोट की अपील कतई मुनासिब नहीं है।
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इससे समाज में गलत इत्तेला दी जा रही है। लोगों से ये अपील की जाए कि वो ज्यादा से ज्यादा वोट करें।
सैयद फरमान हैदर का कहना है कि उलमा को किसी भी पार्टी के लिए अपील नहीं करनी चाहिए। मुसलमान पढ़ी-लिखी कौम है और बखूबी जानती है कि किसे वोट देना है।
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दिल्ली के जामा मस्जिद के इमाम बुखारी के बाद लखनऊ में इमाम मौलाना खालिद रशीद फरंगी महल समेत मुस्लिम धर्मगुरुओं ने ऐसी ही अपील जारी की है। ताजा मामला बनारस का है।
जामा मस्जिद बादशाह बाग के इमाम मौलाना हसीन अहमद हबीबी ने सोमवार को मुसलमानों से बसपा को वोट देने की अपील की है। कहा, हमें ऐसी पार्टी की हिमायत करनी चाहिए, जो कानून व्यवस्था पर काबू रख सके।
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उलमा की ओर से अलग-अलग पार्टी को वोट देने की अपील पर मुफ्ती-ए-शहर मौलाना अब्दुल बातिन नोमानी का कहना है कि किसी भी पार्टी का नाम लेकर वोट की अपील कतई मुनासिब नहीं है।
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इससे समाज में गलत इत्तेला दी जा रही है। लोगों से ये अपील की जाए कि वो ज्यादा से ज्यादा वोट करें।
सैयद फरमान हैदर का कहना है कि उलमा को किसी भी पार्टी के लिए अपील नहीं करनी चाहिए। मुसलमान पढ़ी-लिखी कौम है और बखूबी जानती है कि किसे वोट देना है।