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Kashi Vishwanath Dham: अनोखी है विश्वनाथ धाम के निर्माण की कहानी, 463 सालों बाद बाबा के धाम ने लिया मूर्त रूप

Wed, 13 Dec 2023 01:40 PM IST
प्रगति चंद न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: प्रगति चंद Updated Wed, 13 Dec 2023 01:40 PM IST
सार

436 साल पहले 1558 में टोडरमल ने काशी विश्वनाथ मंदिर का कायाकल्प कराया था। इसके बाद 1777 में रानी अहिल्याबाई होल्कर ने मंदिर व परिसर का जीर्णोद्धार कराया। इसके बाद राणा रणजीत सिंह ने 1835 में 22 मन सोने से बाबा के मंदिर के गुंबद को स्वर्ण मंडित कराया। 

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Unique story of Kashi Vishwanath Dham Corridor construction in varanasi
श्री काशी विश्वनाथ मंदिर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दुनिया भर के सनातनधर्मियों के आकर्षण का केंद्र बन चुके काशी विश्वनाथ धाम के निर्माण की कहानी भी अनोखी है। 463 वर्षों बाद बाबा के धाम ने मूर्त रूप लिया। बाबा विश्वनाथ के मंदिर के पुनरुद्धार, निर्माण और कायाकल्प में महाराणा रणजीत सिंह, टोडरमल और अहिल्याबाई के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की संकल्पना ने मूर्त रूप लिया जो आज श्री काशी विश्वनाथ धाम के रूप में दुनिया के सामने है।

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श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के अध्यक्ष प्रो. नागेंद्र पांडेय ने बताया कि ना भूतो ना भविष्यति की तर्ज पर आयोजित लोकार्पण समारोह भी इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया। देशभर के संत, महंत, श्रीमहंत, अखाड़ों और संप्रदाय की उपस्थिति ने इसे यादगार बना दिया। दुनियाभर के शिवभक्तों के आस्था का केंद्र काशी विश्वनाथ मंदिर का जीर्णोद्धार तीसरी बार हुआ है। 
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436 साल पहले 1558 में टोडरमल ने काशी विश्वनाथ मंदिर का कायाकल्प कराया था। इसके बाद 1777 में रानी अहिल्याबाई होल्कर ने मंदिर व परिसर का जीर्णोद्धार कराया। इसके बाद राणा रणजीत सिंह ने 1835 में 22 मन सोने से बाबा के मंदिर के गुंबद को स्वर्ण मंडित कराया। इसके बाद आठ मार्च 2019 को प्रधानमंत्री ने श्री काशी विश्वनाथ धाम का शिलान्यास किया और 13 दिसंबर 2021 को इसे सनातनधर्मियों के लिए लोकार्पित कर दिया। इस तरह 463 सालों के लंबे अंतराल के बाद आज श्री काशी विश्वनाथ धाम का भव्य स्वरूप दुनिया के सामने है और यह पूरे देश भर के मंदिरों के लिए नजीर भी है।
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मिथकों को किया ध्वस्त, मिल रही श्रद्धालुओं को सुविधाएं
आजादी के सात दशक बाद श्री काशी विश्वनाथ धाम के निर्माण ने कई मिथकों को ध्वस्त किया है। श्रद्धालुओं को धाम तक पहुंचने के लिए तंग गलियों से राहत मिली तो वहीं गंगा द्वार से स्नान करके श्रद्धालु सीधे बाबा के धाम में प्रवेश कर सकते हैं। धाम क्षेत्र में गेस्ट हाउस, मुमुक्षु भवन, म्यूजियम, सिक्योरिटी हॉल व पुस्तकालय का भी निर्माण किया गया है। 54 हजार वर्गमीटर में विकसित काशी विश्वनाथ धाम में प्रवेश करने के बाद श्रद्धालुओं को सारी सुविधाएं मिल रही हैं। स्नान से लेकर दर्शन के बाद तक की सारी सुविधाएं श्रद्धालुओं को धाम में ही मिल रही हैं।

यात्री सुविधा केंद्र पर अलग-अलग भाषा में मिल रही जानकारी
देश भर से बाबा विश्वनाथ का दर्शन पूजन करने आ रहे शिवभक्तों की भाषाई समस्या का समाधान भी धाम में हो रहा है। यात्री सुविधा केंद्र के जरिये श्रद्धालुओं को उनकी भाषा में जानकारी दी जा रही है। जगह-जगह लगाए गए साइनेज बोर्ड भी हिंदी, अंग्रेजी के साथ ही तमिल व तेलुगू में जानकारियां दे रहे हैं।


एक तरफ बाबा का दरबार तो दूसरी ओर गंगा की धारा
बाबा विश्वनाथ धाम में बनी गंगा गैलरी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र है। इसमें एक तरफ भक्तों को जहां बाबा विश्वनाथ का दरबार नजर आता है तो दूसरी ओर मां गंगा की अविरल धारा। इसके साथ ही रैंप, एस्कलेटर और लिफ्ट की सुविधाएं भी धाम में उपलब्ध हैं। इसके साथ ही दिव्यांग और बुजुर्ग श्रद्धालुओं के लिए सुगम दर्शन और व्हीलचेयर का भी इंतजाम है।

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