तीन तलाक पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई पर क्या कहते हैं उलेमा,जानिए..
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इसका भदोही जिले के मुस्लिम उलेमा, सामाजिक कार्यकर्ताओं ने स्वागत किया है। उनका मानना है इससे तलाक को लेकर फैल रही भ्रांतियां एवं गलत फहमियां दूर होगी। क्योंकि तलाक की पूरी प्रक्रिया का जिक्र कुरआन और हदीस में है,इस्लाम का आधार ही कुरआन और हदीस है।
वरिष्ठ अधिवक्ता शमशाद खां का कहना है कि तलाक का जिक्र कुरआन में है, शाहबानो के केस में इसका जिक्र भी हुआ था। पहले सुलह-समझौता,फिर इसकी गुंजाइश न रहने पर तलाक होता है। हदीस में परिस्थिति अनुसार तलाक व्यवस्था है।
दारूल उलूम हबीविया रिजविया गोपीगंज के प्रिंसिपल मौलाना मोहम्मद मुख्तार रिजवी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का पहल सराहनीय है,क्योंकि तलाक इस्लाम का हिस्सा है, धर्म के मूल में है। समीक्षा में साबित भी हो जाएगा। कहा कि तीन तलाक इस्लाम में हराम है पर यदि गुस्से में दे दिया तो मान्य भी है।
दारूल उलूम साबिरा गर्ल्स मेवड़ापुर की वाइस प्रिंसिपल खुर्शीदा खातून ने बताया कि तलाक का जिक्र कुरआन, हदीस में भी आया है। यह वह पहले भी कह चुकी हूं। उसी से इस्लाम का शरीअत है। सुप्रीम कोर्ट की समीक्षा में साबित भी हो जाएगा।
कालीन निर्यातक फिरोज वजीरी ने कहा कि इस्लाम की भ्रांतियों को दूर करने,वास्तविकता सामने लाने के लिए कोर्ट का कदम स्वागत योग्य है। क्योंकि धर्म में अड़चन न आने के लिए ये टिप्पणी है।
सामाजिक कार्यकर्ता माबूद खां ने कहा कि सुनवाई के पहले दिन ही सुप्रीम कोर्ट ने तलाक को ले कर इस्लाम के विचार को अहमियत दी है।