UP : ठगी की मिलती है ट्रेनिंग..., टार्गेट पूरा करने पर अच्छा पैकेज-विदेश की सैर; 9 आरोपियों ने उगले अहम राज
Varanasi News : नेवी से रिटायर सब लेफ्टिनेंट को 22 दिन तक डिजिटल अरेस्ट कर 98 लाख की साइबर ठगी मामले में साइबर क्राइम थाने की पुलिस ने अंतरराष्ट्रीय गिरोह के मास्टरमाइंड समेत नौ आरोपियों को गिरफ्तार किया था। आरोपियों के कब्जे से 10 से अधिक मोबाइल, लैपटॉप, टैबलेट और डेबिट कार्ड, सिम कार्ड और 7,51,860 रुपये बरामद हुए थे। उनसे पूछताछ में कई अहम तथ्य सामने आए हैं।
विस्तार
सीबीआई, ईडी या फिर इनकम टैक्स डिपार्टमेंट से बोल रहा हूं। आप फंस गए हैं। ब्लैक मनी खपाने में आपका नाम आ रहा है। आरबीआई ने मुकदमा दर्ज कराया है... इतने पैसे जमा करा दीजिए। साइबर जालसाज ऐसी ट्रेनिंग पूर्वांचल के युवाओं को दे रहे हैं।
जालसाज युवाओं को मोटी तनख्वाह पर रखते हैं, फिर ठगी का टास्क पूरा करने का लक्ष्य देते हैं। जो युवा ठगी का टार्गेट पूरा करता है, उसे भारी भरकम प्रोत्साहन राशि दी जाती है। फ्लाइट के जरिये विदेश की सैर कराई जाती है। इसका खुलासा 98 लाख रुपये की जालसाजी में गिरफ्तार नौ आरोपियों ने किए हैं।
पुलिस की पूछताछ में आरोपियों ने बताया है कि विदेशों में बैठे साइबर ठगों के निशाने पर 22 से 35 साल के युवा रहते हैं। बीबीए, एमबीए, बीटेक और एमटेक की डिग्री हासिल करने वाले युवाओं को ज्यादा तलाशते हैं। अच्छी कमाई और बेहतर भविष्य का हवाला देकर अपने जाल में फंसाते हैं। नेटवर्क ऐसा होता है कि गिरोह का सरगना सामने नहीं आता है। डायरेक्शन इंटरनेट के जरिये ही मिलता है।
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नेवी के रिटायर सैन्य अफसर अनुज यादव से 98 लाख रुपये की साइबर ठगी में गिरफ्तार नौ आरोपियों में आठ वाराणसी, चंदौली, मिर्जापुर और जौनपुर के हैं। मामले में 12 से ज्यादा ऐसे आरोपियों की पहचान हुई है, जो आसपास के जनपदों के ही रहने वाले हैं। साइबर क्राइम की टीम जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार करने का प्रयास कर रही है।
उगला सच तो हो गए हैरान
आरोपियों को गिरफ्तार करने वाली टीम के अफसर ने बताया कि म्यामांर, कंबोडिया, दुबई में बैठे साइबर ठगों ने ऐसा जाल बिछाया है कि उत्तर प्रदेश और आसपास राज्यों के युवा फंस जा रहे हैं। ठग अब वर्चुअल ट्रेनिंग देते हैं। महंगे होटलों में वर्कशॉप करते हैं। इसके जरिये बैंक खाते जुटाए जाते हैं।
मोबाइल नंबर और आधार कार्ड की फोटो कॉपी प्राप्त की जाती है। युवाओं को बैंक खाता खुलवाने और सिमकार्ड उपलब्ध कराने का लक्ष्य दिया जाता है। फिर कैसे जाल में फंसाना है, इसकी 10 से 15 दिन की ट्रेनिंग दी जाती है। ट्रेनिंग ऑनलाइन होती है। ज्यादातर युवाओं को यह पता नहीं होता है कि वह साइबर अपराध के दलदल में फंस गए हैं। उन्हें लगता है कि वह गेमिंग एप के जरिये पैसे कमा रहे हैं, लेकिन ऐसा होता नहीं।
मामले में गिरफ्तार सीतापुर के संदीप और चंदौली के चकिया निवासी अभिषेक जायसवाल को सिर्फ पता था कि साइबर जालसाजी से रकम मिलती है। इन दोनों ने ही कुनाल, विकास पटेल समेत अन्य की ट्रेनिंग कराई थी। नेटवर्क से जुड़ने से पहले सब एक दूसरे से नहीं मिले थे।
जालसाजों का हथियार बना टेलीग्राम
टेलीग्राम पर इंडियन बैंक कार्ड, कारपोरेट एकाउंट, गेमिंग एकाउंट जैसे समूह साइबर जालसाजों की ओर से बना गए हैं। टेलीग्राम पर ही एसएमएस फारवर्ड जैसे कई एप मिल जाते हैं। शुरू में जो भी युवा जुड़े होते हैं, उनके बैंक खाते में अप्रत्याशित रकम भेज दी जाती है। इससे युवा उत्साहित रहते हैं और साइबर जालसाजों के इशारे पर नाचते हैं।
साइबर विशेषज्ञों के अनुसार टेलीग्राम ऐसा प्लेटफाॅर्म है, जहां से सूचनाएं पुलिस या अन्य किसी एजेंसी को जल्दी नहीं मिल पाती हैं। इसका ही फायदा साइबर जालसाज उठाते हैं। उदाहरण के तौर पर वाराणसी में बड़ी ठगी हुई तो उसे अंजाम देने वाला तेलंगाना, आंध्र प्रदेश में होता है। ऐसे में उसकी गिरफ्तारी बहुत मुश्किल होती है।
लग्जरी आइटम और महंगे होटलों में कराते हैं पार्टी
मिशन पूरा होने पर साइबर जालसाज गिरोह के मास्टरमाइंड की ओर से सदस्यों को महंगे होटलों में पार्टी और लग्जरी आइटम उपहार में दिए जाते हैं। महंगे ब्रांडेड कपड़े, मोबाइल और टूर पैकेज तक दिए जाते हैं।
बोले अधिकारी
किसी भी लालच या उपहार के चक्कर में युवा न फंसे। अपरिचित किसी से भी न जुड़े और लालच आकर अपना भविष्य न खराब करें। किसी को भी आधार, पैनकार्ड, बैंक खाते का विवरण न साझा करें। - विजय नारायण मिश्रा, प्रभारी निरीक्षक, साइबर क्राइम थाना