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डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर में दौड़ेगा बरेका का इंजन
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वाराणसी। देश का सबसे शक्तिशाली इंजन बनाने की दिशा में बनारस रेल इंजन कारखाना आगे बढ़ रहा है। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 29 दिसंबर को जिस न्यू भाऊपुर-खुर्जा डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का उद्घाटन किया था, उस रूट पर जल्द ही बरेका का विद्युत इंजन मालगाड़ियों को लेकर तेज गति से दौड़ेगा।
रेलवे बोर्ड ने तय कर दिया है कि शक्तिशाली विद्युत इंजन बनाने की दिशा में बरेका अपनी तैयारियों को पुख्ता रखे। बरेका की महाप्रबंधक अंजली गोयल ने बताया कि मालवाहक इंजन के उत्पादन की दिशा में तेजी से काम हो रहा है। वहीं 9000 अश्व शक्ति के रेल इंजन निर्माण के लिए प्रौद्योगिक हस्तांतरण का कार्य लेने के लिए तैयार रहने को निर्देशित किया गया है। इसमें शेल, बोगी, ट्रेक्शन मोटर, लोकोमोटिव असेंबली, परीक्षण व कमिशनिंग शामिल है। यह परियोजना चार साल की होगी, इसके तहत 200 रेल इंजनों का उत्पादन किया जाएगा।
शनिवार को अधिकारी क्लब में पत्रकारों से रूबरू महाप्रबंधक अंजली गोयल ने बताया कि वर्तमान परियोजना व भविष्य की योजनाओं पर बरेका काम कर रहा है। मिशन रफ्तार के अंतर्गत भारतीय रेल ने पुश एवं पुल मोड में संचालन केद्वारा ट्रेनों की औसत गति में वृद्धि किया है। रेल इंजनों के बीच रेक के साथ दो डब्ल्यूएपी-7 रेलइंजन के मल्टीपल फार्मेशन द्वारा डब्ल्यूएपी-7 यात्री लोको को पुश पुल मोड में किया गया। इसका सफलता पूर्वक परीक्षण किया गया है। बरेका मार्च 2020 से निर्मित सभी रेलइंजनों में पुश-पुल फीचर जोड़ रहा है। महाप्रबंधक ने उपलब्धियों को रखते हुए कहा कि विश्व में पहली बार हाई हॉर्स पावर डीजल लोकोमोटिव को विद्युत लोकोमोटिव में सफलतापूर्वक परिवर्तित करने का श्रेय बरेका को प्राप्त है। प्रधानमंत्री द्वारा बरेका से 10000 अश्व-शक्ति के कनवर्जन लोकोमोटिव डब्लूएजीसी-3 की ऐसी पहली ट्विन यूनिट को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया और 6000 टन के मालवाहक ट्रेनों का सफलतापूर्वक संचालन किया गया। तब से बरेका ने आठ डीजल लोकोमोटिव को विद्युत लोकोमोटिव में परिवर्तित किया है।
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रेल इंजनों में लगेंगे बायो-टायलेट
अमर उजाला से विशेष बातचीत में महाप्रबंधक ने बताया कि रेलइंजनों में ड्राइवर की परेशानियां खत्म हो जाएंगी। नए वित्तीय वर्ष 2021-22 से उत्पादित बरेका के विद्युत इंजनों में बायो टायलेट होगा। इससे ड्राइवरों की शिकायतें व परेशानियां दूर हो जाएंगी। वहीं पहले से उत्पादित इंजनों में शेड के जरिए यह कार्य होगा।
जल्द होगा ट्रेन टेलीमेट्री का अंत
भारतीय रेल की एक महत्वपूर्ण परियोजना पर बरेका काम कर रहा है। इसके तहत मालवाहक ट्रेनों में गार्ड और ब्रेकवान को हटाने का विकल्प तलाशते हुए बहुत ही कम लागत का रेडियो टेलीमेट्री उपकरण का उपयोग किया जाएगा। इससे रेल इंजन ड्राइवर व अंतिम वैगन के बीच संचार स्थापित हो जाएगा और यह सुनिश्चित होगा कि ट्रेन सभी कोच-वैगन के साथ चल रही है। इस परियोजना के कार्यान्वयन के लिए गठित टास्क फोर्स का संयोजक बरेका है।
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रेलवे बोर्ड ने तय कर दिया है कि शक्तिशाली विद्युत इंजन बनाने की दिशा में बरेका अपनी तैयारियों को पुख्ता रखे। बरेका की महाप्रबंधक अंजली गोयल ने बताया कि मालवाहक इंजन के उत्पादन की दिशा में तेजी से काम हो रहा है। वहीं 9000 अश्व शक्ति के रेल इंजन निर्माण के लिए प्रौद्योगिक हस्तांतरण का कार्य लेने के लिए तैयार रहने को निर्देशित किया गया है। इसमें शेल, बोगी, ट्रेक्शन मोटर, लोकोमोटिव असेंबली, परीक्षण व कमिशनिंग शामिल है। यह परियोजना चार साल की होगी, इसके तहत 200 रेल इंजनों का उत्पादन किया जाएगा।
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शनिवार को अधिकारी क्लब में पत्रकारों से रूबरू महाप्रबंधक अंजली गोयल ने बताया कि वर्तमान परियोजना व भविष्य की योजनाओं पर बरेका काम कर रहा है। मिशन रफ्तार के अंतर्गत भारतीय रेल ने पुश एवं पुल मोड में संचालन केद्वारा ट्रेनों की औसत गति में वृद्धि किया है। रेल इंजनों के बीच रेक के साथ दो डब्ल्यूएपी-7 रेलइंजन के मल्टीपल फार्मेशन द्वारा डब्ल्यूएपी-7 यात्री लोको को पुश पुल मोड में किया गया। इसका सफलता पूर्वक परीक्षण किया गया है। बरेका मार्च 2020 से निर्मित सभी रेलइंजनों में पुश-पुल फीचर जोड़ रहा है। महाप्रबंधक ने उपलब्धियों को रखते हुए कहा कि विश्व में पहली बार हाई हॉर्स पावर डीजल लोकोमोटिव को विद्युत लोकोमोटिव में सफलतापूर्वक परिवर्तित करने का श्रेय बरेका को प्राप्त है। प्रधानमंत्री द्वारा बरेका से 10000 अश्व-शक्ति के कनवर्जन लोकोमोटिव डब्लूएजीसी-3 की ऐसी पहली ट्विन यूनिट को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया और 6000 टन के मालवाहक ट्रेनों का सफलतापूर्वक संचालन किया गया। तब से बरेका ने आठ डीजल लोकोमोटिव को विद्युत लोकोमोटिव में परिवर्तित किया है।
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रेल इंजनों में लगेंगे बायो-टायलेट
अमर उजाला से विशेष बातचीत में महाप्रबंधक ने बताया कि रेलइंजनों में ड्राइवर की परेशानियां खत्म हो जाएंगी। नए वित्तीय वर्ष 2021-22 से उत्पादित बरेका के विद्युत इंजनों में बायो टायलेट होगा। इससे ड्राइवरों की शिकायतें व परेशानियां दूर हो जाएंगी। वहीं पहले से उत्पादित इंजनों में शेड के जरिए यह कार्य होगा।
जल्द होगा ट्रेन टेलीमेट्री का अंत
भारतीय रेल की एक महत्वपूर्ण परियोजना पर बरेका काम कर रहा है। इसके तहत मालवाहक ट्रेनों में गार्ड और ब्रेकवान को हटाने का विकल्प तलाशते हुए बहुत ही कम लागत का रेडियो टेलीमेट्री उपकरण का उपयोग किया जाएगा। इससे रेल इंजन ड्राइवर व अंतिम वैगन के बीच संचार स्थापित हो जाएगा और यह सुनिश्चित होगा कि ट्रेन सभी कोच-वैगन के साथ चल रही है। इस परियोजना के कार्यान्वयन के लिए गठित टास्क फोर्स का संयोजक बरेका है।