वाराणसी: रेलवे ने ट्रेन को बदला आइसोलेशन कोच में, पर नहीं हो सका प्रयोग, स्टेशन पर खड़ी रही
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पूर्वात्तर रेलवे की ओर से जून में वाराणसी मंडल के दस स्टेशनों पर भी चिकित्सकीय सुविधाओं से लैस ग्यारह आइसोलेशन रैक लगाए गए। मऊ को छोड़ दिया जाए तो अन्य नौ स्टेशनों के आइसोलेशन कोच का कोई उपयोग नहीं हुआ।
मऊ स्टेशन पर खड़ी आइसोलेशन रैक में 59 मरीजों को भर्ती कराया गया था। शासन की होम आइसोलेशन की गाइड लाइन आने के बाद आइसोलेशन कोच की महत्ता कम होती गई। उच्चाधिकारियों के आदेश के बाद यह रैक जहां-तहां शंट कर दिए गए। मंडुवाडीह स्टेशन की 12 कोच वाली आइसोलेशन रैक को मंडुवाडीह कोचिंग डिपो में नई लाइन बनाकर खड़ा करा दिया गया है
भविष्य में इसका उपयोग कैसे होगा, यह रेलवे बोर्ड के आदेश पर छोड़ दिया गया है। रेल अधिकारियों के अनुसार, मुख्यालय से जिस तरह का आदेश आएगा, उस पर काम किया जाएगा।
कहां कितने आइसोलेशन रैक
मंडुवाडीह स्टेशन 01
वाराणसी सिटी 01
पड़ेहरी स्टेशन 01
आजमगढ़ 01
गाजीपुर सिटी 01
थखे 01
सीवान 01
मऊ 01
बांसडीह 01
भटनी 02
एक कोच पर 50 हजार से अधिक हुए खर्च
आइसोलेशन वार्ड में परिवर्तित 12 कोच वाली कोविड केयर में 160 बेड हैं। इसमें 10 कोविड केयर सेंटर, एक वातानुकूलित और एक एसएलआर कोच है। एक कोच में मरीजों के लिए आठ केबिन हैं। एक कोच को तैयार करने में 50 हजार रुपये से अधिक खर्च हुए थे। कोच के मिडिल बर्थ अलग किए गए थे। 220 वोल्ट एसी करंट की व्यवस्था की गई थी। शौचालय में बाल्टी, शॉवर व नल लगाए गए थे। चिकित्सक व पैरामेडिकल स्टाफ के लिए केबिन बनाए गए थे। खिड़कियों को मच्छरदानी से पैक किया गया था। मेडिकल उपकरण भी रखे गए थे।
आइसोलेशन कोच में किसी तरह का कोई बदलाव नहीं किया गया है। कोच सुरक्षित खड़ा है। कोच को लेकर कोई भी फैसला रेलवे बोर्ड की ओर से लिया जाएगा। -अशोक कुमार, पीआरओ, पूर्वोत्तर रेलवे