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कुशीनगर हादसाः काश...मैं मासूमों की जान बचा पाता, ट्रेन के पायलट का छलका दर्द
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Fri, 27 Apr 2018 02:11 PM IST
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कुशीनगर हादसा
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कुशीनगर में गुरुवार को ट्रेन की चपेट में स्कूली वैन के आ जाने से 13 मासूम बच्चों की जान चली गई। घटना को लेकर बच्चों की मौत का कारण बनी पैसेंजर ट्रेन के पायलट का दर्द रह-रहकर छलक रहा है। उनको बहुत गहरा सदमा लगा है।
वह बार-बार यही कह रहे हैं कि काश...काश मैं मासूमों की जान बचा पाता। काश....मैं कुछ कर पाता। कुशीनगर में 13 स्कूली बच्चों की मौत का कारण बनी पैसेंजर ट्रेन के पायलट डीरेका निवासी विजय शंकर यादव उस भयंकर मंजर को भूल नहीं पा रहे हैं।
वह सदमे की हालत में हैं। हादसे का जिक्र करते हुए कभी लंबी चुप्पी साध लेते हैं तो कभी दहाड़े मारकर रोने लगते हैं। फोन पर हुई वार्ता में विजय ने बताया कि वह शेड्यूल पर समय से ट्रेन चला रहे थे।
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अचानक ड्राइवर स्कूल वैन लेकर आ गया। उन्होंने कहा कि वैन से टक्कर लगने के बाद वह पैसेंजर ट्रेन को रोक भी नहीं पाए क्योंकि आक्रोशित भीड़ से यात्रियों को खतरा हो सकता था। विजय का परिवार डीरेका में रहता है और वह गोरखपुर में कार्यरत हैं।
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वह बार-बार यही कह रहे हैं कि काश...काश मैं मासूमों की जान बचा पाता। काश....मैं कुछ कर पाता। कुशीनगर में 13 स्कूली बच्चों की मौत का कारण बनी पैसेंजर ट्रेन के पायलट डीरेका निवासी विजय शंकर यादव उस भयंकर मंजर को भूल नहीं पा रहे हैं।
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वह सदमे की हालत में हैं। हादसे का जिक्र करते हुए कभी लंबी चुप्पी साध लेते हैं तो कभी दहाड़े मारकर रोने लगते हैं। फोन पर हुई वार्ता में विजय ने बताया कि वह शेड्यूल पर समय से ट्रेन चला रहे थे।
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अचानक ड्राइवर स्कूल वैन लेकर आ गया। उन्होंने कहा कि वैन से टक्कर लगने के बाद वह पैसेंजर ट्रेन को रोक भी नहीं पाए क्योंकि आक्रोशित भीड़ से यात्रियों को खतरा हो सकता था। विजय का परिवार डीरेका में रहता है और वह गोरखपुर में कार्यरत हैं।
मंडल में 299 मानव रहित क्रासिंग
मानव रहित क्रासिंग
कुशीनगर में गुरुवार की सुबह हुई स्कूल वैन के ट्रेन से टकराने जैसी घटना की पुनरावृत्ति वाराणसी व आस-पास के क्षेत्रों में भी हो सकती है। पूर्वोत्तर रेलवे वाराणसी मंडल में अभी भी 299 क्रासिंग पर कोई कर्मचारी नही है। यहां खुद की जागरूकता और सतर्कता पर लोग गुजरते हैं।
वाराणसी में ही पूर्वोत्तर व उत्तर रेलवे की आधा दर्जन क्रासिंग अनमेंड हैं। पूर्वोत्तर रेलवे के अंतर्गत पहले भी अनमेंड क्रासिंग पर कुशीनगर जैसी दुर्घटनाएं हो चुकी हैं।
25 जुलाई 2016 में भदोही में इसी प्रकार मंडुवाडीह-इलाहाबाद पैसेंजर से स्कूली वैन टकरा गई थी जिसमें 10 बच्चों की मौत हो गई थी। इसके बाद मानव रहित समपारों को मेेंड करने का अभियान शुरू हुआ। अभी भी बड़ी संख्या में क्रासिंग मानव रहित हैं।
जन संपर्क अधिकारी पूर्वोत्तर रेलवे वाराणसी मंडल अशोक कुमार ने बताया कि इस वित्तीय वर्ष में 100 समपारों को मेंड या बंद कर दिया जाएगा। कहीं-कहीं अंडरपास भी बनेगा। यह सब होने के बाद भी 199 रेलवे क्रासिंग अनमेंड (मानव रहित) ही रहेंगी।
वाराणसी में ही पूर्वोत्तर व उत्तर रेलवे की आधा दर्जन क्रासिंग अनमेंड हैं। पूर्वोत्तर रेलवे के अंतर्गत पहले भी अनमेंड क्रासिंग पर कुशीनगर जैसी दुर्घटनाएं हो चुकी हैं।
25 जुलाई 2016 में भदोही में इसी प्रकार मंडुवाडीह-इलाहाबाद पैसेंजर से स्कूली वैन टकरा गई थी जिसमें 10 बच्चों की मौत हो गई थी। इसके बाद मानव रहित समपारों को मेेंड करने का अभियान शुरू हुआ। अभी भी बड़ी संख्या में क्रासिंग मानव रहित हैं।
जन संपर्क अधिकारी पूर्वोत्तर रेलवे वाराणसी मंडल अशोक कुमार ने बताया कि इस वित्तीय वर्ष में 100 समपारों को मेंड या बंद कर दिया जाएगा। कहीं-कहीं अंडरपास भी बनेगा। यह सब होने के बाद भी 199 रेलवे क्रासिंग अनमेंड (मानव रहित) ही रहेंगी।